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कालागढ़ डैम बंद, रामगंगा सूखने के कगार पर
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:03 AM IST
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कालागढ़ डैम बंद, रामगंगा सूखने के कगार पर
गंगा की सहायक नदी रामगंगा सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। भीषण गर्मी में नदी में पानी पहले से ही न्यूनतम स्तर पर था, अब कालागढ़ डैम में रिपेयर का काम होने के कारण यहां से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। इससे रामगंगा नदी की धार सामान्य का दसवां हिस्सा भी नहीं रह गई है। नदी में अब केवल शहरों और गांवों के नाले-नालियों का गंदा और प्रदूषित पानी ही पहुंच रहा है।
अक्टूबर से जून तक आमतौर पर नदियों में पानी की कमी हो जाती है। रामपुर से होती हुई बरेली से आगे रामगंगा नदी फर्रुखाबाद और कन्नौज की सीमा में कानपुर से पहले गंगा नदी में विलीन हो जाती है। बरेली और रामपुर में रामगंगा की धार सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। नदी में सफेद रंग के साफ पानी की जगह शहरों और गांवों के नाले नालियों का प्रदूषित पानी ही पहुंच रहा है। इसके चलते नदी के पानी का रंग काला पड़ चुका है। कालागढ़ डैम में पिछले हफ्ते से सफाई का काम चल रहा है जो कम से कम दो हफ्ते से ज्यादा चलेगा। इसके चलते डैम से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। बरसात से पहले कालागढ़ डैम से नदी में पानी पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं है।
फसलें हुईं प्रभावित
नदी के किनारे गांवों में रहने वाले किसान राम सेवक गंगवार, राकेश यादव, मुकेश कुमार, मुन्नूलाल आदि का कहना है कि इस बार रामगंगा नदी में पानी की कमी कई साल से ज्यादा है। इसके चलते इस बार अप्रैल से जून तक किनारे पैदा होने वाली जायद की फसलों में खरबूज, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि पहलेज भी पहले से कम हुई है।
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कालागढ़ डैम में दो हफ्ते से सफाई का काम चल रहा है। इसके चलते वहां से पानी की सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई है। वैसे भी कालागढ़ डैम से केवल बरसात के दिनों में रामगंगा में पानी छोड़ा जाता है। अक्टूबर से जून तक डैम में पानी की कमी रहती है। पहाड़ों से भी पानी न आने से नदी में पानी की कमी है। बरसात शुरू होते ही ये दूर हो जाएगी। -केएल गुप्ता, एसई बाढ़ खंड
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गंगा की सहायक नदी रामगंगा सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। भीषण गर्मी में नदी में पानी पहले से ही न्यूनतम स्तर पर था, अब कालागढ़ डैम में रिपेयर का काम होने के कारण यहां से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। इससे रामगंगा नदी की धार सामान्य का दसवां हिस्सा भी नहीं रह गई है। नदी में अब केवल शहरों और गांवों के नाले-नालियों का गंदा और प्रदूषित पानी ही पहुंच रहा है।
अक्टूबर से जून तक आमतौर पर नदियों में पानी की कमी हो जाती है। रामपुर से होती हुई बरेली से आगे रामगंगा नदी फर्रुखाबाद और कन्नौज की सीमा में कानपुर से पहले गंगा नदी में विलीन हो जाती है। बरेली और रामपुर में रामगंगा की धार सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। नदी में सफेद रंग के साफ पानी की जगह शहरों और गांवों के नाले नालियों का प्रदूषित पानी ही पहुंच रहा है। इसके चलते नदी के पानी का रंग काला पड़ चुका है। कालागढ़ डैम में पिछले हफ्ते से सफाई का काम चल रहा है जो कम से कम दो हफ्ते से ज्यादा चलेगा। इसके चलते डैम से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। बरसात से पहले कालागढ़ डैम से नदी में पानी पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं है।
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फसलें हुईं प्रभावित
नदी के किनारे गांवों में रहने वाले किसान राम सेवक गंगवार, राकेश यादव, मुकेश कुमार, मुन्नूलाल आदि का कहना है कि इस बार रामगंगा नदी में पानी की कमी कई साल से ज्यादा है। इसके चलते इस बार अप्रैल से जून तक किनारे पैदा होने वाली जायद की फसलों में खरबूज, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि पहलेज भी पहले से कम हुई है।
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कालागढ़ डैम में दो हफ्ते से सफाई का काम चल रहा है। इसके चलते वहां से पानी की सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई है। वैसे भी कालागढ़ डैम से केवल बरसात के दिनों में रामगंगा में पानी छोड़ा जाता है। अक्टूबर से जून तक डैम में पानी की कमी रहती है। पहाड़ों से भी पानी न आने से नदी में पानी की कमी है। बरसात शुरू होते ही ये दूर हो जाएगी। -केएल गुप्ता, एसई बाढ़ खंड