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बीडीए से केवल 100 नक्शे पास हुए, 500 अफसरों से

Tue, 15 Jan 2019 01:42 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 15 Jan 2019 01:42 AM IST
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बीडीए से केवल 100 नक्शे पास हुए, 500 अफसरों से
बरेली। शहर में अवैध निर्माण का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते साल बीडीए के राजस्व वसूली रिकार्ड पर नजर डालें तो पूरे साल में केवल 100 मकानों के मानचित्र स्वीकृत हुए। मगर, 500 से ज्यादा मकान अवैध बन गए। वह कमाई नंबर एक में बीडीए को तो नहीं मिली बल्कि इंजीनियरों की जेब में चली गई। हालांकि इनमें कुछ अवैध निर्माण के कंपाउंडिंग नक्शे दाखिल हुए हैं।
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वर्ष 2018 तक बीडीए ने शहर में करीब 100 मकानों के मानचित्र स्वीकृत किए। इनमें आवासीय और कामर्शियल दोनों तरह के निर्माण शामिल थे। इन मानचित्रों की मंजूरी से बीडीए को 7-8 करोड़ की आमदनी हुई। उसमें बीडीए ने हर माह अदा किए जाने वाले बैंक लोन की 5.50 करोड़ की किस्त अदा की क्योंकि बीडीए ने रामगंगा नगर आवासीय योजना को पूरा करने के लिए 100 करोड़ का लोन लिया था। अब यह लोन 50 करोड़ का बचा है। बाकी बचे रुपयों से स्टाफ के वेतन भत्तों पर खर्च किया गया। रामगंगा के कुछ प्रोजेक्ट के रेरा (रियल एस्टेट रेग्यूलेटिंग एक्ट अधिनियम) के पंजीकरण पर खर्च हुए। सबसे बड़ी बात यह कि बीते साल बीडीए ने जितने नक्शे मंजूर नहीं किए, उससे पांच गुने से ज्यादा अवैध निर्माण हो गए। रामपुर रोड, बदायूं रोड, बदायूं रोड, पीलीभीत बाईपास रोड के अलावा डेलापीर, सिविल लाइंस, सिकलापुर, मॉडल टाउन, सौ फुटा रोड समेत अधिकांश इलाकों में 50 से ज्यादा अवैध कालोनियां बन गईं। 500 से ज्यादा निर्माण बिना मानचित्र पास कराए हो गए। इनकी अधिकांश कमाई इंजीनियरों की जेब में चली गई। इसमें प्राधिकरण को 32 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो गया। अगर सभी अवैध कालोनियों के भी नक्शे स्वीकृत किए जाते तो बीडीए को 40 करोड़ से अधिक की आमदनी होती। बता दें कि बीडीए अपने स्टाफ को वेतन भत्ते समेत अन्य सभी खर्चे अपनी ही आमदनी से करता है। हर माह डेढ़ से दो करोड़ रुपये स्टाफ के वेतन भत्तों पर खर्च होता है। रामगंगा नगर आवासीय योजना को छोड़कर, बीडीए की कोई अन्य बड़ी आवासीय योजना चल नहीं रही है। इसलिए प्राधिकरण की आमदनी का एकमात्र जरिया कालोनियों के ले आउट और मकानों के नक्शे स्वीकृत करने से ही होता है। इसके अलावा जो अवैध निर्माण कंपाउंड होते हैं, उनसे वसूला गया जुर्माना भी बीडीए की आमदनी में ही जोड़ा जाता है।
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पहले के मुकाबले बीडीए की राजस्व आमदनी बढ़ी है। जो अवैध निर्माण हुए हैं, उनमें से भी बहुतों के कंपाउंडिंग नक्शे दाखिल हो रहे हैं। उनसे वसूले जाने वाले जुर्माने से राजस्व वसूली में और इजाफा होगा। सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव बीडीए
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