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बुखार से दो छात्राओं समेत तीन की मौत
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:19 AM IST
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बुखार से दो छात्राओं समेत चार और की मौत
- एक पखवाड़े में मरने वालों की संख्या 94 पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। आंवला के मनौना गांव में बुखार से दसवीं की छात्रा निशा की मौत हो गई। उसे कई दिनों से तेज बुखार था। मनौना गांव में यह पांचवीं मौत है। रामगंगा खादर के गांव हरदोई में 55 वर्षीय मजदूर पूरनलाल कश्यप ने भी गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। पूरन लाल को भी कई दिनों से बुखार आ रहा था लेकिन घरवाले गरीबी के चलते उनका इलाज तक नहीं करा सके। पूरनलाल का 12 वर्षीय बेटा नारायणदास, भाभी नन्ही देवी, भतीजे सियाराम की पत्नी संगीता और उनके दोनों बच्चे दीपक और मोहित कई दिनों से बुखार की चपेट में हैं। इधर, मीरगंज के गांव पिपरिया में 17 वर्षीय हीराकली की भी बुखार से मौत हो गई। वह प्राइवेट स्कूल में कक्षा नौ की छात्रा थी। जिले में एक पखवाड़े की भीतर बुखार से 93 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, देवचरा गांव में 32 वर्षीय रेखा की भी मौत हो गई। वह बुखार से पीड़ित थी। भमोरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दवा चल रही थी, लेकिन तबीयत नहीं सुधरने पर गुरुवार को उन्हें जिला अस्पताल लाया जा रहा था, जब उन्होंने दम तोड़ा।
इन मौतों की मूल वजह गांव की गंदगी और जलभराव है। मेरी अपील है कि किसी झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न फंसे। सरकारी अस्पतालों में सभी दवायें उपलब्ध हैं। सभी गांव में फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। मैंने सभी चिकित्साधिकारियों को प्रधानों के साथ बैठक करके हालात सुधारने के निर्देश दिये हैं। - डॉ. एससी अग्रवाल, एडी हेल्थ
बकैनिया वीरपुर के हर घर में बुखार के रोगी
दुनका। गांव बकैनिया वीरपुर के मुख्य मार्ग और सभी गलियों में कीचड़-बरसाती पानी भरा हुआ है। गांव में जानलेवा बुखार का जबर्दस्त प्रकोप है। हर में बुखार के रोगी हैं। दो दिन पहले गांव की एक महिला की कैंसर से भी मौत हो चुकी है। सभी सरकारी नल पीला प्रदूषित पानी उगल रहे हैं। मजबूरी में लोगों को यही पानी पीना पड़ रहा है। लाखन सिंह श्रीवास्तव, तेजराम, अशर्फी लाल, लाल सिंह, भूपाल, ज्ञानसिंह, प्रेमशंकर, रामौतार आदि ग्रामीणों ने एसडीएम रोहित यादव को शिकायती पत्र दिया है।
- एक पखवाड़े में मरने वालों की संख्या 94 पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। आंवला के मनौना गांव में बुखार से दसवीं की छात्रा निशा की मौत हो गई। उसे कई दिनों से तेज बुखार था। मनौना गांव में यह पांचवीं मौत है। रामगंगा खादर के गांव हरदोई में 55 वर्षीय मजदूर पूरनलाल कश्यप ने भी गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। पूरन लाल को भी कई दिनों से बुखार आ रहा था लेकिन घरवाले गरीबी के चलते उनका इलाज तक नहीं करा सके। पूरनलाल का 12 वर्षीय बेटा नारायणदास, भाभी नन्ही देवी, भतीजे सियाराम की पत्नी संगीता और उनके दोनों बच्चे दीपक और मोहित कई दिनों से बुखार की चपेट में हैं। इधर, मीरगंज के गांव पिपरिया में 17 वर्षीय हीराकली की भी बुखार से मौत हो गई। वह प्राइवेट स्कूल में कक्षा नौ की छात्रा थी। जिले में एक पखवाड़े की भीतर बुखार से 93 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, देवचरा गांव में 32 वर्षीय रेखा की भी मौत हो गई। वह बुखार से पीड़ित थी। भमोरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दवा चल रही थी, लेकिन तबीयत नहीं सुधरने पर गुरुवार को उन्हें जिला अस्पताल लाया जा रहा था, जब उन्होंने दम तोड़ा।
इन मौतों की मूल वजह गांव की गंदगी और जलभराव है। मेरी अपील है कि किसी झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न फंसे। सरकारी अस्पतालों में सभी दवायें उपलब्ध हैं। सभी गांव में फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। मैंने सभी चिकित्साधिकारियों को प्रधानों के साथ बैठक करके हालात सुधारने के निर्देश दिये हैं। - डॉ. एससी अग्रवाल, एडी हेल्थ
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बकैनिया वीरपुर के हर घर में बुखार के रोगी
दुनका। गांव बकैनिया वीरपुर के मुख्य मार्ग और सभी गलियों में कीचड़-बरसाती पानी भरा हुआ है। गांव में जानलेवा बुखार का जबर्दस्त प्रकोप है। हर में बुखार के रोगी हैं। दो दिन पहले गांव की एक महिला की कैंसर से भी मौत हो चुकी है। सभी सरकारी नल पीला प्रदूषित पानी उगल रहे हैं। मजबूरी में लोगों को यही पानी पीना पड़ रहा है। लाखन सिंह श्रीवास्तव, तेजराम, अशर्फी लाल, लाल सिंह, भूपाल, ज्ञानसिंह, प्रेमशंकर, रामौतार आदि ग्रामीणों ने एसडीएम रोहित यादव को शिकायती पत्र दिया है।
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