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छह मौतों के जिम्मेदार विभागों पर एक्शन के बजाय मांगे उनके रिएक्शन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 05 Aug 2018 12:44 AM IST
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पीलीभीत बाईपास रोड पर भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने को खोदे जा रहे गड्ढे में दबकर छह मजूदरों की मौत का मामला अब कागजी खानापूरी करके निपटाया जा रहा है। प्रशासन ने जिम्मेदार विभागों पर कार्रवाई के बजाय नोटिस भेजकर उनके रिएक्शन मांगे हैं। एडीएम सिटी ने छह मजदूरों की मौत के मामले में विंध्या टेल लिमिटेड के अफसरों के अलावा नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, बीडीए और आवास विकास को नोटिस भेजकर पूछा कि अब तक उनके विभागों को किस काम के लिए कितनी एनओसी किन कंपनियों को जारी की गईं।
पीलीभीत बाईपास रोड पर केबिल नेटवर्क डालने के लिए जमीन के गड्ढे खोदने से कुछ दिन पहले छह मजदूरों की मौत हो गई थी और दो घायल हुए थे, जिनका अभी इलाज चल रहा है। मजदूरों की मौत के बाद गड्ढे खोदने वाली कंपनी पर औपचारिकतावश एफआईआर भले ही दर्ज हो गई है, लेकिन अब तक मजदूरों की मौत के दोषी किसी भी व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी। हालांकि एडीएम (सिटी) ओपी वर्मा ने विंध्या टेल लिमिटेड (बीटीएल) कंपनी को नोटिस देकर पूछा है कि उसने गड्ढे खोदने के लिए किन विभागों से अनुमति ली थी। अगर अनुमति ली गई तो वह उनके दफ्तर में आकर दिखाएं। जबकि नगर निगम, बीडीए, आवास विकास, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई कंपनी द्वारा गड्ढे खोदने से पहले किसी भी तरह की एनओसी लिए जाने से इंकार कर चुके हैं। हादसे के बाद हुई प्रारंभिक जांच में ंयह बात साफ हो चुकी है।
एडीएम सिटी ने नगर निगम, बीडीए, पीडब्ल्यूडी, नेशलन हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अफसरों को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि जब भी शहर में किसी काम के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं, तो उसकी एनओसी देने के क्या नियम हैं। किन कामों के लिए एनओसी कितने दिन में और किन सी शर्तों पर दी जा सकती है। अगर कोई गड्ढे खोदने से पहले एनओसी न ले तो उस पर किस तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। विभागाध्यक्षों से सप्ताह भर में जवाब मांगा गया है।
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ऐसे होता है खेल
टेलीकॉम कंपनियां केबिल नेटवर्क बिछाने के लिए शासन के अफसरों से मिलकर आदेश जारी करा लेती हैं। उस आदेश की कॉपी दिखाकर कंपनी के इंजीनियर गड्ढे खोदना शुरू कर देते हैं। नगर नगर निगम से सख्ती होने पर उनके कर्मचारी और अफसरों की सेवा हो जाती है। तीन साल पहले एक कंपनी ने केबल नेटवर्क बिछाने के लिए पूरा शहर खोद डाला था। नगर निगम को उसका मुआवजा नहीं मिला। अब यह दूसरी कंपनी है जो उसी तर्ज पर किसी भी विभाग से बिना एनओसी लिए गड्ढे खोदने में लगी है।
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पीलीभीत बाईपास रोड पर केबिल नेटवर्क डालने के लिए जमीन के गड्ढे खोदने से कुछ दिन पहले छह मजदूरों की मौत हो गई थी और दो घायल हुए थे, जिनका अभी इलाज चल रहा है। मजदूरों की मौत के बाद गड्ढे खोदने वाली कंपनी पर औपचारिकतावश एफआईआर भले ही दर्ज हो गई है, लेकिन अब तक मजदूरों की मौत के दोषी किसी भी व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी। हालांकि एडीएम (सिटी) ओपी वर्मा ने विंध्या टेल लिमिटेड (बीटीएल) कंपनी को नोटिस देकर पूछा है कि उसने गड्ढे खोदने के लिए किन विभागों से अनुमति ली थी। अगर अनुमति ली गई तो वह उनके दफ्तर में आकर दिखाएं। जबकि नगर निगम, बीडीए, आवास विकास, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई कंपनी द्वारा गड्ढे खोदने से पहले किसी भी तरह की एनओसी लिए जाने से इंकार कर चुके हैं। हादसे के बाद हुई प्रारंभिक जांच में ंयह बात साफ हो चुकी है।
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एडीएम सिटी ने नगर निगम, बीडीए, पीडब्ल्यूडी, नेशलन हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अफसरों को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि जब भी शहर में किसी काम के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं, तो उसकी एनओसी देने के क्या नियम हैं। किन कामों के लिए एनओसी कितने दिन में और किन सी शर्तों पर दी जा सकती है। अगर कोई गड्ढे खोदने से पहले एनओसी न ले तो उस पर किस तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। विभागाध्यक्षों से सप्ताह भर में जवाब मांगा गया है।
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टेलीकॉम कंपनियां केबिल नेटवर्क बिछाने के लिए शासन के अफसरों से मिलकर आदेश जारी करा लेती हैं। उस आदेश की कॉपी दिखाकर कंपनी के इंजीनियर गड्ढे खोदना शुरू कर देते हैं। नगर नगर निगम से सख्ती होने पर उनके कर्मचारी और अफसरों की सेवा हो जाती है। तीन साल पहले एक कंपनी ने केबल नेटवर्क बिछाने के लिए पूरा शहर खोद डाला था। नगर निगम को उसका मुआवजा नहीं मिला। अब यह दूसरी कंपनी है जो उसी तर्ज पर किसी भी विभाग से बिना एनओसी लिए गड्ढे खोदने में लगी है।