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फायरिंग टेस्ट के डर से सरेंडर करने लगे शस्त्र लाइसेंस
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 10 Jun 2018 12:48 AM IST
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फायरिंग
- फोटो : SELF
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अर्जुन को बचपन से ही असलहे रखने का शौक था। पिताजी की दो नाली बंदूक थी। उसे विरासत में अपने नाम करा लिया। कुछ साल पहले राइफल और फिर रिवाल्वर का लाइसेंस भी बनवा लिया। अब शुरू हुआ हर तीन साल में लाइसेंसों के नवीनीकरण का सिलसिला। पहले 60 रुपये प्रति असलहा के हिसाब से 180 रुपये देकर नवीनीकरण करा लेते थे। शस्त्र प्रक्रिया ऑनलाइन होने के अलावा नवीनीकरण फीस बढ़ने और पुलिस लाइन में फायरिंग टेस्ट देने के बाद नवीनीकरण के झंझट से बचने के लिए अर्जुन ने दो असलहों का लाइसेंस सरेंडर कर दिया। अब केवल रिवाल्वर बचा है।
नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर तो फिलहाल रोक है। मगर, ऑनलाइन होने के बाद पुराने शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है। लिहाजा दो या तीन असलहे लेकर हनक में चलने वाले अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने के बजाय उन्हें सरेंडर करने लगे हैं। अब तक 150 से ज्यादा लाइसेंस सरेंडर हो चुके हैं। नवीनीकरण की कठिन प्रक्रिया खासतौर से पुलिस लाइन में होने वाले फायरिंग टेस्ट से शस्त्र लाइसेंस धारक परेशान हैं। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारियों को छोड़कर लगभग 42 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस ऑनलाइन हो चुके हैं। इनका अगर तय समय तीन साल पूरा होने के बाद एक महीने के अंदर नवीनीकरण नहीं हो पाता है, तो लाइसेंसधारक को दो हजार रुपये लेट फीस देनी पड़ती है।
यह है नवीनीकरण की प्रक्रिया
जनपद के 25 थानों में 46900 शस्त्र लाइसेंस हैं। शस्त्रों में इकनाली, दोनाली बंदूक के अलावा राइफल, रिवाल्वर, पिस्टल और माउजर के लाइसेंस हैं। सबसे ज्यादा लाइसेंस बंदूक और राइफलों के हैं। किसी भी शस्त्र लाइसेंस का तीन साल में नवीनीकरण कराया जाना जरूरी है। नवीनीकरण कराने के लिए सबसे पहले आवेदक को राइफल क्लब से 50 रुपये देकर आवेदन खरीदकर संबंधित थाने में जमा करना होता है। पुलिस उसमें अपनी रिपोर्ट लगाती है कि लाइसेंस धारक की छवि ठीक है। उस पर कोई आपराधिक मुकदमा पंजीकृत नहीं हैं। पहले एसडीएम की भी रिपोर्ट लगती थी, लेकिन अब यह रिपोर्ट नहीं लगती, बल्कि लाइसेंसधारक को एसपी ट्रैफिक द्वारा बुलाई गई तारीख को पुलिस लाइन में आकर फायरिंग टेस्ट देना होता है। अधिकांश लाइसेंस धारक फायरिंग टेस्ट देने से बचना चाहते हैं। अगर असलहा धारक फायरिंग टेस्ट देकर उसमें सफल होता है तो उसे कोषागार में 1500 रुपये फीस जमा करनी होती है। उसके बाद जिलाधिकारी की अनुमति से लाइसेंस का नवीनीकरण होता है। एक बार फायरिंग टेस्ट में असफल होने पर असलहाधारी को उसके अनुरोध पर कुछ दिन बाद दोबारा मौका भी दिया जा सकता है।
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नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर रोक लगी है। पुराने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए फायरिंग टेस्ट देना जबसे अनिवार्य किया गया है, तबसे बहुत से लोग अपने लाइसेंस सरेंडर करने लगे हैं। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर तो फिलहाल रोक है। मगर, ऑनलाइन होने के बाद पुराने शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है। लिहाजा दो या तीन असलहे लेकर हनक में चलने वाले अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने के बजाय उन्हें सरेंडर करने लगे हैं। अब तक 150 से ज्यादा लाइसेंस सरेंडर हो चुके हैं। नवीनीकरण की कठिन प्रक्रिया खासतौर से पुलिस लाइन में होने वाले फायरिंग टेस्ट से शस्त्र लाइसेंस धारक परेशान हैं। केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारियों को छोड़कर लगभग 42 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस ऑनलाइन हो चुके हैं। इनका अगर तय समय तीन साल पूरा होने के बाद एक महीने के अंदर नवीनीकरण नहीं हो पाता है, तो लाइसेंसधारक को दो हजार रुपये लेट फीस देनी पड़ती है।
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यह है नवीनीकरण की प्रक्रिया
जनपद के 25 थानों में 46900 शस्त्र लाइसेंस हैं। शस्त्रों में इकनाली, दोनाली बंदूक के अलावा राइफल, रिवाल्वर, पिस्टल और माउजर के लाइसेंस हैं। सबसे ज्यादा लाइसेंस बंदूक और राइफलों के हैं। किसी भी शस्त्र लाइसेंस का तीन साल में नवीनीकरण कराया जाना जरूरी है। नवीनीकरण कराने के लिए सबसे पहले आवेदक को राइफल क्लब से 50 रुपये देकर आवेदन खरीदकर संबंधित थाने में जमा करना होता है। पुलिस उसमें अपनी रिपोर्ट लगाती है कि लाइसेंस धारक की छवि ठीक है। उस पर कोई आपराधिक मुकदमा पंजीकृत नहीं हैं। पहले एसडीएम की भी रिपोर्ट लगती थी, लेकिन अब यह रिपोर्ट नहीं लगती, बल्कि लाइसेंसधारक को एसपी ट्रैफिक द्वारा बुलाई गई तारीख को पुलिस लाइन में आकर फायरिंग टेस्ट देना होता है। अधिकांश लाइसेंस धारक फायरिंग टेस्ट देने से बचना चाहते हैं। अगर असलहा धारक फायरिंग टेस्ट देकर उसमें सफल होता है तो उसे कोषागार में 1500 रुपये फीस जमा करनी होती है। उसके बाद जिलाधिकारी की अनुमति से लाइसेंस का नवीनीकरण होता है। एक बार फायरिंग टेस्ट में असफल होने पर असलहाधारी को उसके अनुरोध पर कुछ दिन बाद दोबारा मौका भी दिया जा सकता है।
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नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर रोक लगी है। पुराने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए फायरिंग टेस्ट देना जबसे अनिवार्य किया गया है, तबसे बहुत से लोग अपने लाइसेंस सरेंडर करने लगे हैं। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम