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महिलाओं का करें सम्मान, अपमान का नतीजा है ‘महाभारत’

Tue, 26 Mar 2019 01:40 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 26 Mar 2019 01:40 AM IST
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महिलाओं का करें सम्मान, अपमान का नतीजा है ‘महाभारत’
महिलाओं का करें सम्मान, अपमान का नतीजा है ‘महाभारत’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। ‘जो अपराध भक्त कर करई, राम रोष पावक सो जरई, सुन सुरेश रघुनाथ सुभाहु, निज अपराध रिसाई न काहू’। संत मोरारी बापू ने सोमवार को इसी चौपाई के साथ श्रीराम कथा का शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां शांति और जहां अपमान होता है वहां ‘महाभारत’ होना सुनिश्चित है, इसलिए मां, बहन, बेटी, पत्नी सबका हृदय से सम्मान करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर मेें घरों में महिलाओं के साथ किसी न किसी प्रकार से अपराध हो रहा है। इसी का नतीजा है कि घर में अशांति का माहौल रहता है। जहां ‘लक्ष्मी’ का अपमान होता है वहां भला मां लक्ष्मी का वास कैसे होगा? उन्होंने बताया कि द्रौपदी ने अनजाने में दुर्योधन पर तंज कसा तो प्रतिशोध में उसने द्रौपदी का भरी सभा में अपमान किया। अपमान हुआ तो द्रौपदी ने इसका विरोध कर खुद को साबित करने का सफल प्रयास किया। चूंकि, दुर्योधन के अन्य भी बहुत से बुरे कर्म थे सो उसके अंत का माध्यम प्रभु ने द्रौपदी को बना दिया। कहने का अर्थ यह है कि जिसके जितने बुरे कर्म थे, उसको उतना बुरा फल मिलता गया। जल्दी या देर से कर्म फल मिलता ही है। इसी क्रम में उन्होंने देवराज इंद्र का प्रसंग सुनाया। बोले, देवराज इंद्र चाहते थे कि भरत भगवान श्रीराम से मिलने चित्रकूट न पहुंचे। इसके लिए उन्होंने तमाम बाधाएं पैदा कीं, लेकिन सफल नहीं हुए। आखिकार उन्हें अपने पाप का अहसास हुआ तो ग्लानि से भर गए। वह देव गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। देव गुरु ने उन्हें बताया कि रघुनाथ जी का स्वभाव बेहद सौम्य है। भक्त के गलती मान लेने पर वह उसे पाप मुक्त कर खुद में समाहित कर लेते हैं। दंड भी कम हो जाता है। हां, अपराध बार-बार नहीं होना चाहिए।
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आज ज्यादातर लोग असत्य मार्ग पर
श्रीराम कथा के तीसरे दिन संत मोरारी बापू ने सत्य की महिमा का भी गुणगान किया। उन्होंने कहा कि आज ज्यादातर लोग असत्य का मार्ग अपना रहे हैं। इसका फल अशांत करने वाला ही होता है। वहीं, सत्य नया या पुराना नहीं सार्थक होता है। असत्य की कितनी ही परतें सत्य पर चढ़ें, लेकिन वह एक दिन सामने आता है। इसका डर सदैव असत्य भाषी को परेशान करता है।
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दशरथ को भूलवश हुए पाप की भी मिली सजा
‘मानव अपराध’ कथा क्रम में बापू ने कर्म की भूमिका बताई। बोले, अपराध तीन प्रकार के होते हैं- तामसी, राजसी और सात्विक। राजा दशरथ और कौशल्या संवाद के जरिए उन्होंने इसे समझाया। श्रीराम को वनवास की आज्ञा देने के बाद अंत समय में राजा दशरथ कहते हैं, मुझे श्रवण कुमार के माता-पिता का दिया श्राप याद आ रहा है। भूलवश हुए पाप का फल मिलेगा यह नहीं पता था।

आकर्षण से बड़ा है प्रेम
आकर्षण और प्रेम में अंतर समझाते हुए उन्होंने बताया कि द्रौपदी तो कर्ण के पराक्रम से उनके प्रति आकर्षित हुईं। वहीं, कृष्ण चाहते थे कि द्रौपदी अर्जुन को मिले, क्योंकि उनमें प्रेम था। कृष्ण ने द्रौपदी को समझाया कि आकर्षण अस्थायी होता है, लेकिन प्रेम शाश्वत है। आकर्षण अक्सर अपमान की वजह बनता है। तब द्रौपदी ने अर्जुन से विवाह का संकल्प लिया।


‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’
कथा के मध्य में संत मोरारी बापू ने बरेली के झुमके की चर्चा भी की। झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में.. सुनाते हुए उन्होंने झुमके को आत्म सम्मान से जोड़ा। बोले, इसे गिरने से बचाना जरूरी है। पहली बार आत्म सम्मान को ठेस लगे तो विरोध जरूरी है। कथा में मोहता परिवार, आरके अग्रवाल, जगदीश भाटिया, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, रमेश खानीजो आदि मौजूद रहे।
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