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मानक से ज्यादा फीस लेने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:52 AM IST
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school fees hike
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प्राइवेट स्कूलों को राज्य सरकार के अध्यादेश के प्रावधानों के मुताबिक ही फीस लेनी पड़ेगी। जिन स्कूलों ने सत्र की शुरुआत में अभिभावकों से अध्यादेश में तय मानकों से ज्यादा फीस वसूली है, उन्हें ज्यादा फीस वापस करनी पड़ेगी या फिर उसे अगली तिमाही की फीस में समायोजित करना होगा। बृहस्पतिवार को स्कूल फीस नियंत्रण के लिए बनी मंडलीय समिति की बैठक लेने के बाद मंडलायुक्त डॉ. पीवी जगनमोहन ने यह आदेश जारी किया। मंडलायुक्त का यह आदेश सीबीएसई और आईसीएसई समेत सभी बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो स्कूल अपने बैंक खाते और फीस वसूली का स्टेटमेंट नहीं देगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंडलीय फीस नियंत्रण समिति की बैठक में कमिश्नर को बताया गया कि मंडल के बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं जनपदों में निजी स्कूलों से उनके फीस स्ट्रक्चर के अभिलेख दो जुलाई 2018 तक मांगे गए थे। बरेली के हैरो स्कूल और पीलीभीत के तीन स्कूलों ने अपना रिकॉर्ड नहीं दिया। कमिश्नर ने इन चारों स्कूलों को डिफाल्टर मानते हुए मंडलीय कमेटी को उनके खिलाफ अध्यादेश के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करना का निर्देश दिया। बताया गया कि जिन स्कूलों ने अभिभावकों से ली जाने वाली फीस के क्लासवार अभिलेख दिए है, उनका परीक्षण डीआईओएस और उनके लेखाधिकारी कर रहे हैं। कमिश्नर ने प्रत्येक स्कूल के फीस वसूली रिकार्ड की रिपोर्ट चारों जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से मांगी है। मंडलीय समिति की बैठक में ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा अंजना गोयल, डीआईओएस अचल मिश्रा, चार्टर एकाउंटेंट योगेश कुमार अग्रवाल, उप निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा वीके जैन, पैरेंट्स एसोसिएशन से शालिनी शर्मा, एसई पीडब्ल्यूडी प्रभाकर शर्मा और स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
वेबसाइट पर अपलोड करें फीस का ब्योरा
कमिश्नर ने बैठक में कहा कि सरकार ने अपने फीस नियंत्रण अध्यादेश में फीस में वृद्धि करने के स्पष्ट मानक दिए हैं। प्रत्येक स्कूल को इसकी कॉपी भी उपलब्ध कराई जा चुकी है। अब स्कूल संचालकों का दायित्व है कि वे क्लासवार अपना फीस स्ट्रक्चर वेबसाइट पर अपलोड करें। एडमीशन फीस, हर महीने वसूली जाने वाली फीस को स्कूल ब्रोशर के साथ स्कूल कैंपस में नोटिस बोर्ड पर भी लिखवाएं ताकि अभिभावकों को अपने बच्चे का एडमीशन कराते समय स्कूल की फीस के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके। स्कूलों को अपना ऑडिट भी कराना होगा।
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फीस बढ़ाई तो शिक्षकों का वेतन भी बढ़ाना होगा
बैठक में स्कूल संचालकों को बताया गया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर स्कूल वर्ष 2015-16 में 9.83 प्रतिशत, 2016-17 में 8.89 प्रतिशत और 2018-19 में अधिकतम 9.28 प्रतिशत की फीस वृद्धि कर सकते हैं। इसमें भी शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतन बढ़ोत्तरी के तहत फीस वृद्धि का आकलन होगा। अगर कोई स्कूल संचालक किसी क्लास में फीस बढ़ाना चाहता है तो उसी अनुपात में अपने विद्यालय के शिक्षक स्टाफ का वेतन भी बढ़ाना होगा। बिना वेतन बढ़ाए फीस वृद्धि अध्यादेश के नियमों के विरुद्ध मानी जाएगी।
डीआईओएस ने मांगा तीन साल का रिकार्ड
मंडलीय कमेटी की बैठक के बाद बरेली के डीआईओएस अचल मिश्रा ने प्राइवेट स्कूलों से पिछले तीन साल से प्री नर्सरी से इंटर तक हर साल वसूली जाने वाली फीस का रिकार्ड बैंक स्टेटमेंट सहित सात जुलाई तक मांगा है। अभिभावक भी स्कूल को दी जाने वाली फीस की रसीद दे सकते हैं, ताकि स्कूल के रजिस्टर से छात्र-छात्रा की फीस का बैंक स्टेटमेंट से मिलान किया जा सके। डीआईओएस ने बताया कि स्कूलों को अब हर साल ऑडिट कराना होगा। जो भी स्कूल तय समय पर अपने फीस स्ट्रक्चर का रिकार्ड नहीं देंगे, उन पर अध्यादेश के नियमों के अनुसार कार्रवाई की संस्तुति मंडलीय कमेटी को कर दी जाएगी।
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मंडलीय फीस नियंत्रण समिति की बैठक में कमिश्नर को बताया गया कि मंडल के बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं जनपदों में निजी स्कूलों से उनके फीस स्ट्रक्चर के अभिलेख दो जुलाई 2018 तक मांगे गए थे। बरेली के हैरो स्कूल और पीलीभीत के तीन स्कूलों ने अपना रिकॉर्ड नहीं दिया। कमिश्नर ने इन चारों स्कूलों को डिफाल्टर मानते हुए मंडलीय कमेटी को उनके खिलाफ अध्यादेश के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करना का निर्देश दिया। बताया गया कि जिन स्कूलों ने अभिभावकों से ली जाने वाली फीस के क्लासवार अभिलेख दिए है, उनका परीक्षण डीआईओएस और उनके लेखाधिकारी कर रहे हैं। कमिश्नर ने प्रत्येक स्कूल के फीस वसूली रिकार्ड की रिपोर्ट चारों जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से मांगी है। मंडलीय समिति की बैठक में ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा अंजना गोयल, डीआईओएस अचल मिश्रा, चार्टर एकाउंटेंट योगेश कुमार अग्रवाल, उप निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा वीके जैन, पैरेंट्स एसोसिएशन से शालिनी शर्मा, एसई पीडब्ल्यूडी प्रभाकर शर्मा और स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
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वेबसाइट पर अपलोड करें फीस का ब्योरा
कमिश्नर ने बैठक में कहा कि सरकार ने अपने फीस नियंत्रण अध्यादेश में फीस में वृद्धि करने के स्पष्ट मानक दिए हैं। प्रत्येक स्कूल को इसकी कॉपी भी उपलब्ध कराई जा चुकी है। अब स्कूल संचालकों का दायित्व है कि वे क्लासवार अपना फीस स्ट्रक्चर वेबसाइट पर अपलोड करें। एडमीशन फीस, हर महीने वसूली जाने वाली फीस को स्कूल ब्रोशर के साथ स्कूल कैंपस में नोटिस बोर्ड पर भी लिखवाएं ताकि अभिभावकों को अपने बच्चे का एडमीशन कराते समय स्कूल की फीस के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके। स्कूलों को अपना ऑडिट भी कराना होगा।
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फीस बढ़ाई तो शिक्षकों का वेतन भी बढ़ाना होगा
बैठक में स्कूल संचालकों को बताया गया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर स्कूल वर्ष 2015-16 में 9.83 प्रतिशत, 2016-17 में 8.89 प्रतिशत और 2018-19 में अधिकतम 9.28 प्रतिशत की फीस वृद्धि कर सकते हैं। इसमें भी शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतन बढ़ोत्तरी के तहत फीस वृद्धि का आकलन होगा। अगर कोई स्कूल संचालक किसी क्लास में फीस बढ़ाना चाहता है तो उसी अनुपात में अपने विद्यालय के शिक्षक स्टाफ का वेतन भी बढ़ाना होगा। बिना वेतन बढ़ाए फीस वृद्धि अध्यादेश के नियमों के विरुद्ध मानी जाएगी।
डीआईओएस ने मांगा तीन साल का रिकार्ड
मंडलीय कमेटी की बैठक के बाद बरेली के डीआईओएस अचल मिश्रा ने प्राइवेट स्कूलों से पिछले तीन साल से प्री नर्सरी से इंटर तक हर साल वसूली जाने वाली फीस का रिकार्ड बैंक स्टेटमेंट सहित सात जुलाई तक मांगा है। अभिभावक भी स्कूल को दी जाने वाली फीस की रसीद दे सकते हैं, ताकि स्कूल के रजिस्टर से छात्र-छात्रा की फीस का बैंक स्टेटमेंट से मिलान किया जा सके। डीआईओएस ने बताया कि स्कूलों को अब हर साल ऑडिट कराना होगा। जो भी स्कूल तय समय पर अपने फीस स्ट्रक्चर का रिकार्ड नहीं देंगे, उन पर अध्यादेश के नियमों के अनुसार कार्रवाई की संस्तुति मंडलीय कमेटी को कर दी जाएगी।