{"_id":"5d30bcb38ebc3e6ce212a24f","slug":"15634750902-bareilly-news119","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘पैसों की खातिर लाश का करते रहे इलाज, एक लाख वसूले’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘पैसों की खातिर लाश का करते रहे इलाज, एक लाख वसूले’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। वर्ष 2015 में रिलीज हुई फिल्म गब्बर इज बैक में नर्सिंग होम संचालकों को एक व्यक्ति की मौत के बाद भी पैसे ऐंठने के लिए उसे भर्ती कर इलाज करते दिखाया गया था। वहां तो गब्बर ने संचालकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था लेकिन असल जिंदगी में हाल कुछ और ही होता है। शहर के एक प्रमुख अस्पताल पर आरोप है कि पैसे के लिए डॉक्टरों ने एक युवक की मौत के बाद भी इलाज के नाम पर उसे जबरन वेंटिलेटर पर रखा। इस मामले की शिकायत गुरुवार को भीम आर्मी सेना के पदाधिकारियों ने एडीएम और सीएमओ से की। इसके बाद एडीएम ने एसडीएम सदर को जांच सौंपी है तो सीएमओ ने डॉक्टरों का तीन सदस्यीय पैनल जांच के लिए गठित कर दिया है।
पूरनपुर के ग्राम सिकराना निवासी राजू को घायल अवस्था में सात जून की रात करीब एक बजे गंभीर हालत में लेकर परिवार वाले अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने भर्ती करने से पहले ही इलाज के एग्रीमेंट पेपर पर दस्तखत करा लिए थे। आरोप है अस्पताल के डॉक्टर ने हालत गंभीर बताकर 40 हजार रुपये जमा कराए और इसके बाद आईसीयू में वेंटिलेटर पर राजू को रखने की बात कही। पत्नी शारदा देवी के मुताबिक आईसीयू में भर्ती करने के बाद 60 हजार रुपये और ले लिए गए। सुबह करीब नौ बजे जब वह पति को देखने पहुंचीं तो उनकी आंख पर पट्टी बंधी थी और टेप लगा था। इससे उन्हें पति की मौत होने का संदेह हुआ। उन्होंने डॉक्टर से राजू की छुट्टी करने की बात कही। आरोप है कि इस पर डॉक्टर ने हालत गंभीर बताते हुए 72 घंटे से पहले छुट्टी करने से इनकार कर दिया। परिजन के विरोध करने पर हायर सेंटर के लिए रेफर करने का लेटर बनाकर आठ जून को पूर्वाह्न करीब 11 बजे राजू को उनके सुपुर्द कर दिया गया। दम तोड़ चुके राजू के शव का दोपहर करीब तीन बजे पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजू की मौत 12 से 24 घंटे पहले होने की बात कही गई है। इससे साफ होता है कि सिर्फ पैसा ऐंठने के लिए डॉक्टर लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करते रहे। परिजन के मुताबिक उनसे एक लाख रुपये लिए गए। भीम आर्मी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी, जिलाध्यक्ष महेंद्रपाल आदि ने मृतक के परिजन के संग गुरुवार को मामले की शिकायत एडीएम और सीएमओ से की। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एडीएम अतुल कुमार ने एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी को जांच सौंप दी। इधर, सीएमओ ने भी जांच के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल गठित कर दिया है।
अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर डॉक्टर पर एफआईआर कराने की मांग
भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने इस मामले में अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और डॉक्टर पर एफआईआर कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन
यह बोलीं सीएमओ
राजू की मौत के बाद भी उसका इलाज कर रुपये ऐंठने के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सौंपी गई है। इसके आधार पर मामले की जांच के लिए एसीएमओ की अध्यक्षता में तीन डॉक्टरों का पैनल गठित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
मरीज सात जून की रात करीब एक बजे अस्पताल पहुंचा था। उसको ब्रेन संबंधी समस्या थी। हालत काफी गंभीर थी। परिजन को इसकी जानकारी देने के बाद मरीज को भर्ती किया गया। दिमाग ने काम करना बंद करने के बाद भी 72 घंटे तक मरीज की हार्टबीट रहती है। लिहाजा मरीज के परिजन को 72 घंटे सघन चिकित्सा में रखने के बाद ही कुछ कह पाने की बात कही थी। हालत गंभीर होने पर आठ जून को मरीज को रेफर करने के लिए लेटर बनाया गया था, लेकिन पूर्वाह्न 11 बजे परिजन के कहने पर मरीज की छुट्टी कर दी गई।
- अस्पताल संचालक
डीएम कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान अस्पताल में मरीज की मौत से जुड़ा मामला सामने आया था। पीड़ित परिवार ने इसकी लिखित शिकायत भी दी है। लिहाजा मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एसडीएम सदर को दे दी गई है।
-अतुल सिंह, एडीएम प्रशासन
अस्पताल में वेंटीलेटर पर शव को रखकर इलाज के नाम पर घर वालों से रुपये ऐंठने की शिकायत मिली है। सीएमओ से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम
विज्ञापन
पूरनपुर के ग्राम सिकराना निवासी राजू को घायल अवस्था में सात जून की रात करीब एक बजे गंभीर हालत में लेकर परिवार वाले अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने भर्ती करने से पहले ही इलाज के एग्रीमेंट पेपर पर दस्तखत करा लिए थे। आरोप है अस्पताल के डॉक्टर ने हालत गंभीर बताकर 40 हजार रुपये जमा कराए और इसके बाद आईसीयू में वेंटिलेटर पर राजू को रखने की बात कही। पत्नी शारदा देवी के मुताबिक आईसीयू में भर्ती करने के बाद 60 हजार रुपये और ले लिए गए। सुबह करीब नौ बजे जब वह पति को देखने पहुंचीं तो उनकी आंख पर पट्टी बंधी थी और टेप लगा था। इससे उन्हें पति की मौत होने का संदेह हुआ। उन्होंने डॉक्टर से राजू की छुट्टी करने की बात कही। आरोप है कि इस पर डॉक्टर ने हालत गंभीर बताते हुए 72 घंटे से पहले छुट्टी करने से इनकार कर दिया। परिजन के विरोध करने पर हायर सेंटर के लिए रेफर करने का लेटर बनाकर आठ जून को पूर्वाह्न करीब 11 बजे राजू को उनके सुपुर्द कर दिया गया। दम तोड़ चुके राजू के शव का दोपहर करीब तीन बजे पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजू की मौत 12 से 24 घंटे पहले होने की बात कही गई है। इससे साफ होता है कि सिर्फ पैसा ऐंठने के लिए डॉक्टर लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करते रहे। परिजन के मुताबिक उनसे एक लाख रुपये लिए गए। भीम आर्मी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी, जिलाध्यक्ष महेंद्रपाल आदि ने मृतक के परिजन के संग गुरुवार को मामले की शिकायत एडीएम और सीएमओ से की। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एडीएम अतुल कुमार ने एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी को जांच सौंप दी। इधर, सीएमओ ने भी जांच के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल गठित कर दिया है।
विज्ञापन
अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर डॉक्टर पर एफआईआर कराने की मांग
भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने इस मामले में अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और डॉक्टर पर एफआईआर कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन
यह बोलीं सीएमओ
राजू की मौत के बाद भी उसका इलाज कर रुपये ऐंठने के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सौंपी गई है। इसके आधार पर मामले की जांच के लिए एसीएमओ की अध्यक्षता में तीन डॉक्टरों का पैनल गठित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
मरीज सात जून की रात करीब एक बजे अस्पताल पहुंचा था। उसको ब्रेन संबंधी समस्या थी। हालत काफी गंभीर थी। परिजन को इसकी जानकारी देने के बाद मरीज को भर्ती किया गया। दिमाग ने काम करना बंद करने के बाद भी 72 घंटे तक मरीज की हार्टबीट रहती है। लिहाजा मरीज के परिजन को 72 घंटे सघन चिकित्सा में रखने के बाद ही कुछ कह पाने की बात कही थी। हालत गंभीर होने पर आठ जून को मरीज को रेफर करने के लिए लेटर बनाया गया था, लेकिन पूर्वाह्न 11 बजे परिजन के कहने पर मरीज की छुट्टी कर दी गई।
- अस्पताल संचालक
डीएम कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान अस्पताल में मरीज की मौत से जुड़ा मामला सामने आया था। पीड़ित परिवार ने इसकी लिखित शिकायत भी दी है। लिहाजा मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एसडीएम सदर को दे दी गई है।
-अतुल सिंह, एडीएम प्रशासन
अस्पताल में वेंटीलेटर पर शव को रखकर इलाज के नाम पर घर वालों से रुपये ऐंठने की शिकायत मिली है। सीएमओ से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम