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फसल बीमा योजना फिर ठगा गया किसान
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बरेली। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के बजाय बीमा कंपनियों के लिए ज्यादा मुफीद साबित हुई। प्राइवेट बीमा कंपनी बजाज अलियांज ने बीते साल खरीफ में 31118 किसानों की फसल का बीमा करके 2.0 करोड़ का प्रीमियम वसूला। लेकिन जब किसानों को क्लेम देने की बात आई तो तकनीकी पेंच फंसा दिए। 847 किसानों ने बीमा क्लेम पाने का दावा किया तो कंपनी ने 48 घंटे के अंदर सूचना न देने की बात कहते हुए तमाम दावे खारिज कर दिए। किसानों को मात्र 27.99 लाख का क्लेम ही मिल पाया। इस साल सरकार ने प्राइवेट कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया। सरकारी कंपनी न्यू इंश्योरेंस इंडिया को फसल बीमा का टेंडर दिया गया है। किसानों को फसल नुकसान की समय सीमा 48 या 72 घंटे भी समाप्त कर दी गई है।
वर्ष 2018-19 में खरीफ सीजन में 31118 किसानों की 26869 हेक्टेयर एरिया में बोई गई फसलों का बीमा किया गया। इसके लिए किसानों ने लगभग 2.0 करोड़ की प्रीमियम राशि जमा की। ज्यादातर किसानों की प्रीमियम राशि बीमा कंपनी ने किसान क्रेडिट कार्ड से बैंकों के माध्यम से वसूली। रबी सीजन में 14161 किसानों की 11940 हेक्टेयर एरिया में बोई गई फसल का बीमा किया। इसमें भी किसानों ने 90 लाख का प्रीमियम जमा किया। पिछले साल बारिश और ओलावृष्टि से क्यारा, बिथरी चैनपुर और भोजीपुरा में बड़े पैमाने पर धान और दलहन आदि फसलों का नुकसान हुआ। फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए 847 किसानों ने क्लेम के दावे किए। लेकिन, बीमा कंपनी ने 48 घंटे के अंदर सूचना न देने पर तमाम दावे खारिज कर दिए। सरकारी तंत्र भी बीमा कंपनी के नियमों के आगे खामोश रहा। बीमा कंपनी ज्यादा प्रीमियम जमा कराने के बाद कम क्लेम देकर पूरा फायदा उठा ले गई।
शहर विधायक भी उठा चुके हैं मुद्दा
जिला योजना की बैठक में शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक के सामने फसल बीमा योजना की खामियों का मामला उठाया था। उस पर अफसरों ने भी स्वीकार किया कि पिछली बार फसल बीमा में खामियां रहीं। इसके चलते प्राइवेट फर्म का टेंडर निरस्त किया गया है। इस बार फसल नुकसान होने पर किसानों के सामने 48 या 72 घंटे के अंदर सूचना देने की बाध्यता नहीं होगी। किसान निर्धारित समय सीमा के बाद भी क्लेम के दावे कर सकते हैं।
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फसल बीमा योजना में कुछ खामियां थीं। इसीलिए शासन ने इस बार पुरानी बीमा कंपनी के टेंडर निरस्त कर नई कंपनी को टेंडर दिए हैं। नई बीमा कंपनी न्यू इंश्योरेंस इंडिया सरकारी बीमा एजेंसी है। इसमें तमाम पुरानी खामियां को दूर किया गया है। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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वर्ष 2018-19 में खरीफ सीजन में 31118 किसानों की 26869 हेक्टेयर एरिया में बोई गई फसलों का बीमा किया गया। इसके लिए किसानों ने लगभग 2.0 करोड़ की प्रीमियम राशि जमा की। ज्यादातर किसानों की प्रीमियम राशि बीमा कंपनी ने किसान क्रेडिट कार्ड से बैंकों के माध्यम से वसूली। रबी सीजन में 14161 किसानों की 11940 हेक्टेयर एरिया में बोई गई फसल का बीमा किया। इसमें भी किसानों ने 90 लाख का प्रीमियम जमा किया। पिछले साल बारिश और ओलावृष्टि से क्यारा, बिथरी चैनपुर और भोजीपुरा में बड़े पैमाने पर धान और दलहन आदि फसलों का नुकसान हुआ। फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए 847 किसानों ने क्लेम के दावे किए। लेकिन, बीमा कंपनी ने 48 घंटे के अंदर सूचना न देने पर तमाम दावे खारिज कर दिए। सरकारी तंत्र भी बीमा कंपनी के नियमों के आगे खामोश रहा। बीमा कंपनी ज्यादा प्रीमियम जमा कराने के बाद कम क्लेम देकर पूरा फायदा उठा ले गई।
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शहर विधायक भी उठा चुके हैं मुद्दा
जिला योजना की बैठक में शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक के सामने फसल बीमा योजना की खामियों का मामला उठाया था। उस पर अफसरों ने भी स्वीकार किया कि पिछली बार फसल बीमा में खामियां रहीं। इसके चलते प्राइवेट फर्म का टेंडर निरस्त किया गया है। इस बार फसल नुकसान होने पर किसानों के सामने 48 या 72 घंटे के अंदर सूचना देने की बाध्यता नहीं होगी। किसान निर्धारित समय सीमा के बाद भी क्लेम के दावे कर सकते हैं।
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फसल बीमा योजना में कुछ खामियां थीं। इसीलिए शासन ने इस बार पुरानी बीमा कंपनी के टेंडर निरस्त कर नई कंपनी को टेंडर दिए हैं। नई बीमा कंपनी न्यू इंश्योरेंस इंडिया सरकारी बीमा एजेंसी है। इसमें तमाम पुरानी खामियां को दूर किया गया है। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ