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पशुओं के लिए बनाए गए आश्रय केंद्र खुद बेसहारा
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बरेली। सीएम योगी चाहते हैं कि आवारा गोवंशीय पशुओं को आश्रय मिले, इसके लिए सरकारी मशीनरी ने लाखों रुपये खर्च भी कर दिए लेकिन पशु आश्रय गृहों का संचालन कौन करेगा, इसकी प्लानिंग नहीं की गई। ऐसे में पशुओं के लिए बनाए गए ये आश्रय केंद्र खुद बेसहारा बने हुए है। यहां आए जिले के प्रभारी अधिकारी पी. गुरु प्रसाद के सामने भी यह मामला उठा था। उन्होंने इस मामले को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था।
प्रशासन ने गांवों में आवारा पशुओं के लिए 132 गो संरक्षण केंद्र संचालित किए हैं। एक केंद्र को बनाने के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा अब तक 405 पशुओं को इन सेंटरों पर रखा गया है। शासन ने इन पशुओं के चारे के लिए करीब एक करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया। इससे प्रत्येक जानवर को प्रत्येक दिन 30 रुपये का चारा खिलाया जाना है। दिक्कत यह आ रही है कि पशुओं को पकड़ने के लिए एनीमल कैचर टीम नहीं है। ऐसे में खेत खलियान में घूम रहे जानवरों को कैसे पकड़ा जाए यह सवाल खड़ा रहता है। इसी प्रकार इन पशु आश्रय गृहों के लिए कोई विभागीय कर्मचारी भी तैनात नहीं किए गए हैं। जिला पंचायत राज विभाग की देखरेख में चल रहे इन केंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सफाई कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, बावजूद इसके पशुओं की देखरेख, चारे का इंतजाम और बीमार होने पर उन्हें पशु चिकित्सालय ले जाने के लिए विभागीय कर्मचारी की तैनाती की जरूरत महसूस की जा रही है। इससे सीएम योगी की यह पहल मंजिल तक नहीं पहुंच पा रही है।
पशु आश्रय गृहों के लिए पशुओं की टैगिंग कराई जा रही है। सफाई कर्मचारियों को फिलहाल जिम्मेदारी दी गई है। इसकी मॉनीटरिंग ग्राम सभा से भी होगी।
-सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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प्रशासन ने गांवों में आवारा पशुओं के लिए 132 गो संरक्षण केंद्र संचालित किए हैं। एक केंद्र को बनाने के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा अब तक 405 पशुओं को इन सेंटरों पर रखा गया है। शासन ने इन पशुओं के चारे के लिए करीब एक करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया। इससे प्रत्येक जानवर को प्रत्येक दिन 30 रुपये का चारा खिलाया जाना है। दिक्कत यह आ रही है कि पशुओं को पकड़ने के लिए एनीमल कैचर टीम नहीं है। ऐसे में खेत खलियान में घूम रहे जानवरों को कैसे पकड़ा जाए यह सवाल खड़ा रहता है। इसी प्रकार इन पशु आश्रय गृहों के लिए कोई विभागीय कर्मचारी भी तैनात नहीं किए गए हैं। जिला पंचायत राज विभाग की देखरेख में चल रहे इन केंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सफाई कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, बावजूद इसके पशुओं की देखरेख, चारे का इंतजाम और बीमार होने पर उन्हें पशु चिकित्सालय ले जाने के लिए विभागीय कर्मचारी की तैनाती की जरूरत महसूस की जा रही है। इससे सीएम योगी की यह पहल मंजिल तक नहीं पहुंच पा रही है।
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पशु आश्रय गृहों के लिए पशुओं की टैगिंग कराई जा रही है। सफाई कर्मचारियों को फिलहाल जिम्मेदारी दी गई है। इसकी मॉनीटरिंग ग्राम सभा से भी होगी।
-सत्येंद्र कुमार, सीडीओ