{"_id":"5d02b912bdec226dc81b0c3a","slug":"156045952811158-bareilly-news105","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौबारी का घोड़ा मेला खत्म तीन दिन में 158 घोड़े ही बिके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौबारी का घोड़ा मेला खत्म तीन दिन में 158 घोड़े ही बिके
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बरेली। रामगंगा के निकट चौबारी में लगे नखासे में तीन दिन में 158 घोड़े ही बिक सके। अंतिम दिन यहां 20 घोड़ों की खरीद फरोख्त हुई। पशुपालन विभाग टीम ने गुरुवार को भी ग्लैंडर्स के संभावित खतरे वाले 10 और घोड़े चिह्नित कर उनके खून के सैंपल लेकर जांच को भेजे।
नखासा 11 जून को शुरू हुआ था। मेले में मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर, हरदोई, कासगंज समेत प्रदेश के कई जिलों से करीब 1000 घोड़े बिकने के लिए आए, लेकिन ग्लैंडर्स के संभावित खतरे और ई-रिक्शा का प्रचलन बढ़ने से कम हुई घोड़ों की मांग के चलते मेला ठंडा रहा। यहां पहले दिन 40, दूसरे दिन 98 और तीसरे दिन 20 घोड़ों की बिक्री हुई। उधर ग्लैंडर्स के संभावित खतरे को लेकर पशुपालन विभाग की टीम ने बुधवार को 15 और गुरुवार को चिह्नित किए गए 10 घोड़ों के खून का सैंपल लेकर जांच को भिजवाए।
प्रबंधक का पुलिस प्रशासन पर मेला फेल करने का आरोप
बरेली। नखासा मेले के प्रबंधक अमरजीत सिंह ने पुलिस-प्रशासन पर मेला फेल करने का आरोप लगाया है। अमरजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मेले की अनुमति को 20 दिन पहले ही आवेदन कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति 1.70 लाख रुपये में एक दिन पहले शाम को दी। इसके चलते वह प्रचार प्रसार नहीं कर सके। जो कारोबारी मेले में पहुंचे उन्हें भी 12 जून की रात से ही पुलिस बल भगाने की कोशिश में रहा। गुरुवार सुबह ही पुलिस ने घोड़ा लेकर पहुंचे लोगों को वापस जाने के लिए कहना शुरू कर दिया। जब उन्हें बताया गया कि 13 जून की शाम पांच बजे तक उनके पास परमीशन है तब वे माने, लेकिन पांच बजते ही उन्हें भगा दिया गया। जबकि मेले में आए घोड़ा व्यापारी धंदा मंदा होने के कारण स्वेच्छा से एक दिन और रुकना चाहते थे। मेले से उन्हें सिर्फ 70 हजार रुपये मिले। एक-दो दिन में वह इसकी शिकायत डीएम से करेंगे।
नखासा 11 जून को शुरू हुआ था। मेले में मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर, हरदोई, कासगंज समेत प्रदेश के कई जिलों से करीब 1000 घोड़े बिकने के लिए आए, लेकिन ग्लैंडर्स के संभावित खतरे और ई-रिक्शा का प्रचलन बढ़ने से कम हुई घोड़ों की मांग के चलते मेला ठंडा रहा। यहां पहले दिन 40, दूसरे दिन 98 और तीसरे दिन 20 घोड़ों की बिक्री हुई। उधर ग्लैंडर्स के संभावित खतरे को लेकर पशुपालन विभाग की टीम ने बुधवार को 15 और गुरुवार को चिह्नित किए गए 10 घोड़ों के खून का सैंपल लेकर जांच को भिजवाए।
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प्रबंधक का पुलिस प्रशासन पर मेला फेल करने का आरोप
बरेली। नखासा मेले के प्रबंधक अमरजीत सिंह ने पुलिस-प्रशासन पर मेला फेल करने का आरोप लगाया है। अमरजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मेले की अनुमति को 20 दिन पहले ही आवेदन कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति 1.70 लाख रुपये में एक दिन पहले शाम को दी। इसके चलते वह प्रचार प्रसार नहीं कर सके। जो कारोबारी मेले में पहुंचे उन्हें भी 12 जून की रात से ही पुलिस बल भगाने की कोशिश में रहा। गुरुवार सुबह ही पुलिस ने घोड़ा लेकर पहुंचे लोगों को वापस जाने के लिए कहना शुरू कर दिया। जब उन्हें बताया गया कि 13 जून की शाम पांच बजे तक उनके पास परमीशन है तब वे माने, लेकिन पांच बजते ही उन्हें भगा दिया गया। जबकि मेले में आए घोड़ा व्यापारी धंदा मंदा होने के कारण स्वेच्छा से एक दिन और रुकना चाहते थे। मेले से उन्हें सिर्फ 70 हजार रुपये मिले। एक-दो दिन में वह इसकी शिकायत डीएम से करेंगे।
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