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जमीन की फर्जी रिपोर्ट तैयार करने पर फंसे लेखपाल और तहसीलदार
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बरेली। माफिया के इशारे पर खतौनियों को खुरचने का धंधा सिर्फ कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में नहीं चल रहा है बल्कि इसकी आंच अब तहसील तक पहुंच गई है। नया मामला तहसील सदर का है, जहां पीलीभीत रोड पर विहारमान नगला की एक बेशकीमती जमीन की राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर मिल्कियत बदल दी गई। हैरतअंगेज बात यह है कि यह घोटाला तत्कालीन तहसीलदार गिरीश झा के इशारे पर हुआ। लेखपाल ने बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश के जमीन की पैमाइश की और उसे किसी और की मिल्कियत में दिखा दिया। हाल ही में इस मामले में डीएम की ओर से शासन से आरोपी तहसीलदार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई है। लेखपाल पर मुकदमा चलाने के लिए एडीएम सिटी ने एसडीएम सदर को संस्तुति करने को लिखा है।
विहारमान नगला पीलीभीत रोड का वह इलाका है जो व्यावसायिक तौर पर लगातार विकसित हो रहा है। पिछले कुछ सालों में तमाम कॉलोनियां यहां बन चुकी हैं और कई कॉलोनियां अब भी बन रही हैं। विहारमान नगला में ही राजकुमार अग्रवाल की गाटा संख्या 625 पर जमीन थी, जिसे हड़पने के लिए तत्कालीन तहसीलदार गिरीश झा और लेखपाल अमर सिंह ने सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए। बताया जाता है कि तहसीलदार के इशारे पर लेखपाल ने पहले तो बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश के यहां गाटा संख्या 623, 624 और 624 की पैमाइश की। इस दौरान राजकुमार अग्रवाल की गाटा नंबर 625 पर स्थित जमीन को गाटा संख्या 624 का अंश बता दिया गया और गलत नक्शा और रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी गई। इसके बाद तहसीलदार ने भी जालसाजी कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और अपनी टिप्पणी के साथ जमीन पर अवैध कब्जा कराने के लिए एसडीएम के माध्यम से इज्जतनगर पुलिस को आदेश भिजवा दिया।
राजकुमार अग्रवाल को जब इस गड़बड़ी की भनक लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत की। मामला शासन तक पहुंचने के बाद लंबी जांच चली जिसमें तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल का सारा खेल खुलकर सामने आ गया। कुछ समय पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दे दी गई। इसके बाद एसएसपी की ओर से राजपत्रित अधिकारी होने के कारण आरोपी तहसीलदार और लेखपाल पर मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति लेने को कहा गया। डीएम के स्तर से अनुमति के लिए शासन को लिखा गया है। इसके अलावा लेखपाल पर मुकदमा चलाने के लिए एडीएम सिटी की ओर से उसके नियुक्ति प्राधिकारी एसडीएम सदर को संस्तुति करने के लिए पत्र भेजा गया है। है।
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विहारमान नगला पीलीभीत रोड का वह इलाका है जो व्यावसायिक तौर पर लगातार विकसित हो रहा है। पिछले कुछ सालों में तमाम कॉलोनियां यहां बन चुकी हैं और कई कॉलोनियां अब भी बन रही हैं। विहारमान नगला में ही राजकुमार अग्रवाल की गाटा संख्या 625 पर जमीन थी, जिसे हड़पने के लिए तत्कालीन तहसीलदार गिरीश झा और लेखपाल अमर सिंह ने सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए। बताया जाता है कि तहसीलदार के इशारे पर लेखपाल ने पहले तो बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश के यहां गाटा संख्या 623, 624 और 624 की पैमाइश की। इस दौरान राजकुमार अग्रवाल की गाटा नंबर 625 पर स्थित जमीन को गाटा संख्या 624 का अंश बता दिया गया और गलत नक्शा और रिपोर्ट तहसीलदार को भेज दी गई। इसके बाद तहसीलदार ने भी जालसाजी कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और अपनी टिप्पणी के साथ जमीन पर अवैध कब्जा कराने के लिए एसडीएम के माध्यम से इज्जतनगर पुलिस को आदेश भिजवा दिया।
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राजकुमार अग्रवाल को जब इस गड़बड़ी की भनक लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत की। मामला शासन तक पहुंचने के बाद लंबी जांच चली जिसमें तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल का सारा खेल खुलकर सामने आ गया। कुछ समय पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दे दी गई। इसके बाद एसएसपी की ओर से राजपत्रित अधिकारी होने के कारण आरोपी तहसीलदार और लेखपाल पर मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति लेने को कहा गया। डीएम के स्तर से अनुमति के लिए शासन को लिखा गया है। इसके अलावा लेखपाल पर मुकदमा चलाने के लिए एडीएम सिटी की ओर से उसके नियुक्ति प्राधिकारी एसडीएम सदर को संस्तुति करने के लिए पत्र भेजा गया है। है।
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