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घोटाला करने के लिए मंत्री ने बनाया था अपना अलग सीएमओ
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बरेली। एनआरएचएम घोटाले में फंसे पूर्व सीएमओ डॉ. शिव ओम तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री एवं बसपा के कद्दावर नेता रहे बाबू सिंह कुशवाहा के अपने सीएमओ थे। कुशवाहा ने एनआरएचएम का अलग सीएमओ सिर्फ बरेली में ही नहीं बल्कि कई जिलों में तैनात किए थे। मंत्री के नियुक्त इन सीएमओ को ही सारे वित्तीय अधिकार भी दिए गए थे। सीबीआई की अदालत में अब तत्कालीन सीएमओ (एनआरएचएम) समेत चार पर आरोप तय होने के बाद लोगों को एक बार फिर उस दौर की यादें ताजा हो गई हैं।
बसपा शासन काल में एनआरएचएम योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के दावे किए गए थे। उस दौर में मायावती के सबसे करीबी एवं विश्वसनीय माने जाने वाले बाबू सिंह कुशवाहा के पास ही स्वास्थ्य विभाग का मंत्रालय भी था। यही वजह रही कि नियम कायदे को ताक पर रख कर ये सीएमओ और उनकी टीम स्वास्थ्य संबंधी उपकरण से लेकर दवाओं तक की खरीद में अनियमितता पर अनियमितता करती चली गई। जिला अस्पताल के लिए मेडिकल किट खरीदने में धांधली की गई। दवा खरीद में भी जमकर घोटाला हुआ। मामले की पड़ताल शुरू हुई तो तत्कालीन सीएमओ डॉ. शिव ओम, एसीएमओ डॉ. रवि शंकर अग्रवाल के साथ दो दवा कारोबारी मैसर्स मेडिकेयर फार्मा लखनऊ के मालिक हरेंद्र वर्मा और इस फर्म की लाइजनिंग करने वाले अवधराम वर्मा घोटाले में फंस गए।
ये था मामला
केंद्र सरकार की योजना के बजट से 2010 और 2011 में तत्कालीन सीएमओ शिवओम के निर्देश पर लाखों रुपये की दवाई खरीदी गई थी। इसमें कम दाम की दवाएं अधिक रेट पर खरीदी गई थीं। जननी सुरक्षा योजना में भी भारी घोटला किया था। इन घोटालों की जांच सीबीआई ने की थी। फरवरी 2013 में सीबीआई की टीम ने यहां पहुंचकर कई दिन तक एनआरएचएम योजना से संबंधित दस्तावेज खंगाले थे। कई लोगों से पूछताछ भी की थी। सीबीआई ने इस मामले में बरेली के पूर्व सीएमओ डॉ. शिवओम, डॉ. रवि शंकर और दवा सप्लाई करने वाले अवधराम और महेंद्र वर्मा को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने चारों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया था।
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बसपा शासन काल में एनआरएचएम योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के दावे किए गए थे। उस दौर में मायावती के सबसे करीबी एवं विश्वसनीय माने जाने वाले बाबू सिंह कुशवाहा के पास ही स्वास्थ्य विभाग का मंत्रालय भी था। यही वजह रही कि नियम कायदे को ताक पर रख कर ये सीएमओ और उनकी टीम स्वास्थ्य संबंधी उपकरण से लेकर दवाओं तक की खरीद में अनियमितता पर अनियमितता करती चली गई। जिला अस्पताल के लिए मेडिकल किट खरीदने में धांधली की गई। दवा खरीद में भी जमकर घोटाला हुआ। मामले की पड़ताल शुरू हुई तो तत्कालीन सीएमओ डॉ. शिव ओम, एसीएमओ डॉ. रवि शंकर अग्रवाल के साथ दो दवा कारोबारी मैसर्स मेडिकेयर फार्मा लखनऊ के मालिक हरेंद्र वर्मा और इस फर्म की लाइजनिंग करने वाले अवधराम वर्मा घोटाले में फंस गए।
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ये था मामला
केंद्र सरकार की योजना के बजट से 2010 और 2011 में तत्कालीन सीएमओ शिवओम के निर्देश पर लाखों रुपये की दवाई खरीदी गई थी। इसमें कम दाम की दवाएं अधिक रेट पर खरीदी गई थीं। जननी सुरक्षा योजना में भी भारी घोटला किया था। इन घोटालों की जांच सीबीआई ने की थी। फरवरी 2013 में सीबीआई की टीम ने यहां पहुंचकर कई दिन तक एनआरएचएम योजना से संबंधित दस्तावेज खंगाले थे। कई लोगों से पूछताछ भी की थी। सीबीआई ने इस मामले में बरेली के पूर्व सीएमओ डॉ. शिवओम, डॉ. रवि शंकर और दवा सप्लाई करने वाले अवधराम और महेंद्र वर्मा को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने चारों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया था।
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