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बदायूं: कछला गंगाघाट पर छह लोग डूबे, तीन बच्चों की मौत
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उझानी (बदायूं)। सोमवती अमावस्या के मौके पर कछला गंगा घाट पर नहाते वक्त दौसा (राजस्थान) के चचेरे-तहेरे भाइयों की डूबकर मौत हो गई। उन्हें बचाने की कोशिश में दो अन्य डूबने लगे तो उन्हें किसी तरह बचा लिया गया। यहीं पर राजस्थान के एक बालक की डूबने से मौत हो गई। जबकि एक किशोर बहने के बाद लापता हो गया। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक लोगों को गोताखोरों ने बचा लिया।
पहला हादसा सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे बरेली-मथुरा हाईवे के पुल के कासगंज की ओर वाले पिलर के नजदीक हुआ। दौसा के बांदीकुई थाना क्षेत्र के गांव बसवा के चार-पांच परिवार के लोग गंगा में जलस्तर कम होने की वजह से इसी पिलर के पास स्नान करने लगे। नहाते समय केशराम मीणा का बेटा दिलखुश (12) और भतीजा नितीश (10) पुत्र चेतराम डूब गए। दोनों बच्चों को डूबता देख चाचा धर्मसिंह और उनके दोस्त नेत्र कुमार आगे बढ़े तो वे भी डूबने लगे। यह देखकर बाकी लोगों ने उन दोनों को तो किसी तरह बाहर निकाल लिया लेकिन दिलखुश और नितीश का पता नहीं लग पाया। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे गोताखोरों ने दोनों बच्चों को करीब आधा घंटा की मशक्कत के बाद बाहर निकाला। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। परिवार के लोगों ने दिलखुश और नितीश के जिंदा होने की बात कही तो पुलिस उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची। चिकित्साधिकारी महेश प्रताप सिंह ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि तीनों बच्चों के शव बिना पोस्टमार्टम के परिवार वालों को सौंप दिए गए।
दूसरा हादसा दोपहर बाद हुआ। धौलपुर (राजस्थान) जिले के गांव भैसाना निवासी नेमसिंह का परिवार नहा रहा था। अचानक नेमसिंह का चार वर्षीय बेटा शिवम डूब गया। गोताखोरों ने शिवम के शव को बाहर निकाला। इसके अलावा रेलवे पुल के पिलर के पास ही कासगंज निवासी चंद्रपाल बह गए, जिन्हें गोताखोर ने बाहर निकाला।
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शाम को एक घटना और हुई। आगरा के कुआंखेड़ा इलाके के मोहल्ला नलिया निवासी उदय सिंह का पंद्रह वर्षीय पुत्र अनिकेत गंगा में नहाते समय बह गया। रात तक उसका कुछ पता नहीं चला। गोताखोर और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
नितीश ने नहीं छोड़ा था दिलखुश का हाथ
उझानी (बदायूं)। दौसा (राजस्थान) के केेशराम मीणा के परिवार के लिए सोमवती अमावस्या का दिन ताउम्र कचोटेगा। देवता को स्नान कराने का धार्मिक रिवाज पूरा करने के लिए वह भाई-भतीजों के साथ आए तो खुशी-खुशी थे लेकिन लौटे तो परिवार के दोनों लाडलों के शव साथ लेकर। केशराम का बेटा दिलखुश और भतीजा नितीश नहा भी साथ-साथ रहे थे, लेकिन नितीश ने तहेरे बड़े भाई का हाथ नहीं छोड़ा।
मृतक भतीजे दिलखुश और नितीश के शव के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे चाचा धर्मसिंह तो बदहवास नजर आए। वह कभी दिलखुश तो कभी नितीश के शव को देख बिलख रहे थे। बाद में परिवार के और लोग भी रोते-बिलखते अस्पताल आ गए। धर्म सिंह ने बताया कि नितीश और दिलखुश आपस में प्यार अधिक करते थे। नितीश अपने पिता की तीन संतान में इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं। नितीश की मां सुनीता अपने बच्चे के शव को देख गश खाकर गिर पड़ी। जबकि केशराम मीणा के दो बेटों में दिलखुश बड़ा था। परिजनों की मानें तो राजस्थान में देवता को गंगा स्नान कराने का रिवाज है। इसी को पूरा करने के लिए सोमवती अमावस्या का दिन शुभ माना जाता है, लेकिन धार्मिक रिवाज पूरा करते समय ही केशराम के परिवार के साथ जो अशुभ हुआ, वह उन्हें उम्र भर कचोटता रहेगा।
मां प्रेमा का हाथ छोड़ मौत के मुहं में समाया शिवम
उझानी। गंगा नहाते समय राजस्थान में ही धौलपुर निवासी नेमसिंह का बेटा (4) अपनी मां प्रेमा के साथ था। नहाते समय दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े थे, लेकिन अचानक ही शिवम मां का हाथ छोड़कर आगे बढ़ गया। बेटा नजर नहीं आने पर प्रेमा ने शोर भी मचाया। बेटे का शव गोताखोरों ने गंगा से बाहर निकाला तो प्रेमा फफक पड़ी। वह बेटे के शव को आंचल में समेट कर बिलखती रही।
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पहला हादसा सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे बरेली-मथुरा हाईवे के पुल के कासगंज की ओर वाले पिलर के नजदीक हुआ। दौसा के बांदीकुई थाना क्षेत्र के गांव बसवा के चार-पांच परिवार के लोग गंगा में जलस्तर कम होने की वजह से इसी पिलर के पास स्नान करने लगे। नहाते समय केशराम मीणा का बेटा दिलखुश (12) और भतीजा नितीश (10) पुत्र चेतराम डूब गए। दोनों बच्चों को डूबता देख चाचा धर्मसिंह और उनके दोस्त नेत्र कुमार आगे बढ़े तो वे भी डूबने लगे। यह देखकर बाकी लोगों ने उन दोनों को तो किसी तरह बाहर निकाल लिया लेकिन दिलखुश और नितीश का पता नहीं लग पाया। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे गोताखोरों ने दोनों बच्चों को करीब आधा घंटा की मशक्कत के बाद बाहर निकाला। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। परिवार के लोगों ने दिलखुश और नितीश के जिंदा होने की बात कही तो पुलिस उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची। चिकित्साधिकारी महेश प्रताप सिंह ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि तीनों बच्चों के शव बिना पोस्टमार्टम के परिवार वालों को सौंप दिए गए।
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दूसरा हादसा दोपहर बाद हुआ। धौलपुर (राजस्थान) जिले के गांव भैसाना निवासी नेमसिंह का परिवार नहा रहा था। अचानक नेमसिंह का चार वर्षीय बेटा शिवम डूब गया। गोताखोरों ने शिवम के शव को बाहर निकाला। इसके अलावा रेलवे पुल के पिलर के पास ही कासगंज निवासी चंद्रपाल बह गए, जिन्हें गोताखोर ने बाहर निकाला।
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शाम को एक घटना और हुई। आगरा के कुआंखेड़ा इलाके के मोहल्ला नलिया निवासी उदय सिंह का पंद्रह वर्षीय पुत्र अनिकेत गंगा में नहाते समय बह गया। रात तक उसका कुछ पता नहीं चला। गोताखोर और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
नितीश ने नहीं छोड़ा था दिलखुश का हाथ
उझानी (बदायूं)। दौसा (राजस्थान) के केेशराम मीणा के परिवार के लिए सोमवती अमावस्या का दिन ताउम्र कचोटेगा। देवता को स्नान कराने का धार्मिक रिवाज पूरा करने के लिए वह भाई-भतीजों के साथ आए तो खुशी-खुशी थे लेकिन लौटे तो परिवार के दोनों लाडलों के शव साथ लेकर। केशराम का बेटा दिलखुश और भतीजा नितीश नहा भी साथ-साथ रहे थे, लेकिन नितीश ने तहेरे बड़े भाई का हाथ नहीं छोड़ा।
मृतक भतीजे दिलखुश और नितीश के शव के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे चाचा धर्मसिंह तो बदहवास नजर आए। वह कभी दिलखुश तो कभी नितीश के शव को देख बिलख रहे थे। बाद में परिवार के और लोग भी रोते-बिलखते अस्पताल आ गए। धर्म सिंह ने बताया कि नितीश और दिलखुश आपस में प्यार अधिक करते थे। नितीश अपने पिता की तीन संतान में इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं। नितीश की मां सुनीता अपने बच्चे के शव को देख गश खाकर गिर पड़ी। जबकि केशराम मीणा के दो बेटों में दिलखुश बड़ा था। परिजनों की मानें तो राजस्थान में देवता को गंगा स्नान कराने का रिवाज है। इसी को पूरा करने के लिए सोमवती अमावस्या का दिन शुभ माना जाता है, लेकिन धार्मिक रिवाज पूरा करते समय ही केशराम के परिवार के साथ जो अशुभ हुआ, वह उन्हें उम्र भर कचोटता रहेगा।
मां प्रेमा का हाथ छोड़ मौत के मुहं में समाया शिवम
उझानी। गंगा नहाते समय राजस्थान में ही धौलपुर निवासी नेमसिंह का बेटा (4) अपनी मां प्रेमा के साथ था। नहाते समय दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े थे, लेकिन अचानक ही शिवम मां का हाथ छोड़कर आगे बढ़ गया। बेटा नजर नहीं आने पर प्रेमा ने शोर भी मचाया। बेटे का शव गोताखोरों ने गंगा से बाहर निकाला तो प्रेमा फफक पड़ी। वह बेटे के शव को आंचल में समेट कर बिलखती रही।