फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   सौ बीघा जमीन का घोटाला चार महीने टाला

सौ बीघा जमीन का घोटाला चार महीने टाला

Mon, 03 Jun 2019 01:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jun 2019 01:30 AM IST
विज्ञापन
सौ बीघा जमीन का घोटाला चार महीने टाला
बरेली। भूमाफिया का दखल सरकारी मशीनरी तक पहुंचने और खतौनियों में जालसाजी करके बेशकीमती जमीनों को कब्जाने के खेल का खुलासा फतेहगंज पूर्वी में सैकड़ों बीघा जमीन हड़पने का मामला सामने आने के बाद ही हो गया था लेकिन अफसर फिर भी बेपरवाह बने रहे। लिहाजा यह खेल चलता रहा और धीरे-धीरे इस खेल में शामिल सरकारी स्टाफ ने ‘गिरोह’ की शक्ल अख्त्यिार कर ली। हौसला इस कदर बढ़ा कि नवाबगंज के गांव डंडिया नजमुल निशा में खतौनी में जालसाजी कर सौ बीघा जमीन इधर से उधर करा देने वाले सरकारी कर्मचारियों ने अपने अफसरों के आदेश तक पलट डाले। जैसे-तैसे इस घोटाले की जांच पूरी हुई लेकिन जब इस घोटाले में सारे के सारे आरोपी सरकारी कर्मचारी निकले तो अफसर एक बार फिर बैकफुट पर आ गए। इसी वजह से चार महीने आरोपियों पर एफआईआर कराने का मामला लटका रहा।
विज्ञापन

नवाबगंज जमीन घोटाले की जांच तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने एसीएम फर्स्ट जलालुद्दीन से कराई थी। जांच में अफसरों के आदेश पलटे जाने के हैरतअंगेज खुलासे भी हुए जिसके बाद उसकी रिपोर्ट तैयार कर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को जनवरी में ही भेज दी गई थी। जांच रिपोर्ट में घोटालेबाजों पर एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की गई थी। रिकार्ड रूम के कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी देख कलक्ट्रेट के कई कर्मचारी डीएम से मिले थे। डीएम पर कार्रवाई न करने का दबाव भी बनाने की कोशिश की गई।
विज्ञापन

इसके बाद डीएम ने जांच रिपोर्ट में कई खामियां गिनाते हुए कार्रवाई पर रोक लगा दी और फाइल को वापस एडीएम सिटी के कार्यालय में भेज दिया था। इसके बाद इस मामले में पूरी कार्रवाई ठप हो गई। अधिकारी आरोपियों पर शीघ्र कार्रवाई की बात तो करते रहे लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया। फरवरी बीतने के बाद मार्च में आचार संहिता और चुनावी व्यस्तता के बीच इस घोटाले की फाइल कलक्ट्रेट में ही पड़ी रही। इसके चलते इस मामले की कार्रवाई की उम्मीद भी कम हो गई। रविवार को अचानक प्रशासन की और से इस मामले में कोतवाली में तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करा दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकारी चिट्ठी भी गायब कर दी थी घोटालेबाजों ने
पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने मामले की जांच में जो चिट्ठी नवाबगंज तहसीलदार को भेजी थी, उसे भी घोटालेबाजों ने गायब करा दिया था। उसके बदले एडीएम और उनके पेशकार के नकली दस्तखत बनाकर फर्जी चिट्ठी नवाबगंज तहसीलदार के पास पहुंचा दी गई। बाद में तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने इसका जवाब भेजा तो भी इसमें खेल हो गया और इस लेटर को कलक्ट्रेट में गायब कर दिया गया। मामले में तहसील के डाक रनर वेदप्रकाश की भूमिका संदिग्ध मिली थी।

डील की रकम पर कलक्ट्रेट में हुआ झगड़ा तो खुला खेल
खतौनी में फर्जीवाड़ा कराने वाले व्यक्ति तारिक के बेटे फिरोज ने 24 जनवरी को कलक्ट्रेट में अहलमद रमोद सक्सेना से जमीन की डील के एवज में दी गई रकम को वापस मांगा था। बताते हैं कि इसी बात को लेकर इन दोनों के ही बीच झड़प हुई थी। एडीएम सिटी ओपी वर्मा के पास यह मामला पहुंच गया तो उन्होंने दोनों को ही शांति भंग में जेल भेज दिया था। 24 घंटे से ज्यादा समय जेल में रहने पर रमोद सक्सेना सस्पेंड हो गए थे।


नवाबगंज जमीन घोटाले में सभी नौ आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। इसमें शामिल सरकारी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई भी होगी। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ संस्तुति भेजी जाएगी।
-वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed