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गुर्गों की आड़ में सपा-बसपा नेता बना रहे थे अवैध कालोनी
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बरेली। पीलीभीत बाईपास रोड पर करीब छह महीने से अवैध तरीके से बनाई जा रही विष्णुधाम कालोनी को बीडीए ने ध्वस्त कर दिया। यहां 15 से ज्यादा मकान तोड़े गए। अब सामने आया है कि इस अवैध कालोनी को बनाने वाले अनधिकृत कालोनाइजर के अलावा सपा और बसपा के नेता थे, जिनके गुर्गे यहां निर्माण करा रहे थे।
पीलीभीत बाईपास रोड पर विष्णुधाम कालोनी का कई महीने से निर्माण चल रहा है। अमर उजाला ने कई बार अवैध निर्माण की खबर भी प्रकाशित की। बताया जाता है कि इस अवैध कालोनी का निर्माण सपा और बसपा के नेता अपने गुर्गों की आड़ में करा रहे थे। बीडीए ने आखिरकार इसका संज्ञान लिया और 29 मई को जेसीबी ले जाकर यहां बने दर्जन भर से अधिक अवैध मकान तोड़ दिए। बताया जाता है कि इस कालोनी में एक पूर्व विधायक के भाई भी पार्टनर थे। इस कार्रवाई से नेताओं के अलावा इनके पार्टनर को भी झटका लगा है। मगर मकान टूटने से खरीदार और उनके परिवार वाले आहत हैं। इन परिवारों की मानें तो उनको बताया गया था कि बीडीए में नक्शा दाखिल किया जा चुका है। चिंता करने की जरूरत नहीं।
पहले बता देते तो मकान नहीं बनाते
एफएसडीए में कार्यरत अफसर ने पुराना मकान 22 लाख में बेचकर विष्णुधाम कालोनी में 180 गज का प्लाट खरीदा था। फिर इसे बनवाने के लिए उन्होंने बैंक से 15 लाख का लोन भी लिया। अब पुराना मकान भी नहीं है और बैंक की 15 हजार रुपये महीने किश्त भी देनी पड़ेगी। बोले- कालोनाइजर ले आउट पास न होने की बात बता देते तो लाखों का नुकसान नहीं होता। इसी तरह कालोनी में मकान खरीदने वाले शिक्षक या नौकरीपेशा लोग हैं, जिन्होंने बैंक से लोन लेकर मकान बनाना शुरू किया था। मगर बीडीए के ध्वस्तीकरण अभियान चला दिया।
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पीलीभीत बाईपास रोड पर विष्णुधाम कालोनी का कई महीने से निर्माण चल रहा है। अमर उजाला ने कई बार अवैध निर्माण की खबर भी प्रकाशित की। बताया जाता है कि इस अवैध कालोनी का निर्माण सपा और बसपा के नेता अपने गुर्गों की आड़ में करा रहे थे। बीडीए ने आखिरकार इसका संज्ञान लिया और 29 मई को जेसीबी ले जाकर यहां बने दर्जन भर से अधिक अवैध मकान तोड़ दिए। बताया जाता है कि इस कालोनी में एक पूर्व विधायक के भाई भी पार्टनर थे। इस कार्रवाई से नेताओं के अलावा इनके पार्टनर को भी झटका लगा है। मगर मकान टूटने से खरीदार और उनके परिवार वाले आहत हैं। इन परिवारों की मानें तो उनको बताया गया था कि बीडीए में नक्शा दाखिल किया जा चुका है। चिंता करने की जरूरत नहीं।
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पहले बता देते तो मकान नहीं बनाते
एफएसडीए में कार्यरत अफसर ने पुराना मकान 22 लाख में बेचकर विष्णुधाम कालोनी में 180 गज का प्लाट खरीदा था। फिर इसे बनवाने के लिए उन्होंने बैंक से 15 लाख का लोन भी लिया। अब पुराना मकान भी नहीं है और बैंक की 15 हजार रुपये महीने किश्त भी देनी पड़ेगी। बोले- कालोनाइजर ले आउट पास न होने की बात बता देते तो लाखों का नुकसान नहीं होता। इसी तरह कालोनी में मकान खरीदने वाले शिक्षक या नौकरीपेशा लोग हैं, जिन्होंने बैंक से लोन लेकर मकान बनाना शुरू किया था। मगर बीडीए के ध्वस्तीकरण अभियान चला दिया।
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