{"_id":"5ced93c7bdec2207594b1ee9","slug":"155907378313-bareilly-news164","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरेली-सीतापुर फोरलेन- जरा चूके तो सीतापुर नहीं ‘रामपुर’ ले जाएगा ये हाईवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरेली-सीतापुर फोरलेन- जरा चूके तो सीतापुर नहीं ‘रामपुर’ ले जाएगा ये हाईवे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। 18 सौ करोड़ रुपये फूंककर फोरलेन हाईवे का निर्माण तो खैर बरेली से सीतापुर जाने के लिए किया गया था लेकिन अफसरों ने इस कदर पैसा खाया कि अब इस बात की कोई गारंटी नहीं रह गई है कि यह हाईवे किसी को सीतापुर पहुंचाएगा या ‘रामपुर’। लगातार टूटते-दरकते इस हाईवे पर अब ये हालात हो गए हैं कि रात में जरा भी निगाह चूकते ही कोई भी तेज रफ्तार गाड़ी हादसे का शिकार हो सकती है। पिछली बारिश में जब यह हाईवे तेजी से दरकना शुरू हुआ तो इस पर एनएचएआई अफसरों ने साढ़े सात करोड़ रुपये और बहा डाले, यह अलग बात है कि इसके बाद भी हाईवे की दशा नहीं बदली। हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों में तमाम लोगों के जान गंवाने के बावजूद अफसर कि आने वाले और बड़े खतरे का एहसास करने को तैयार नहीं हैं। एनएचएआई नया टेंडर होने के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है। कई प्वाइंट तो दुर्घटना के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गए है, फिर भी यहां रोड सेफ्टी का कोई काम नहीं दिख रहा। सर्वाधिक खतरा फरीदपुर फ्लाईओवर पर है। कई जगह फ्लाईओवर के किनारे टूटकर गिर चुके हैं। सड़क भी कई फुट नीचे धंस जाने से गाड़ियों के आपस में टकराने और पलटने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद फ्लाईओवर पर न कोई रेडियम सिग्नल है न क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरने वाले लोगों को अलर्ट करने के लिए कोई बोर्ड या क्रश बैरियर। बारिश फिर आने वाली है। हाईवे की जो दशा हो चुकी है, वह साफ बता रही है कि उस पर दिल्ली-लखनऊ का सफर करने वालों की जिंदगी भारी संकट में रहेगी। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को रजऊ परसपुर से फरीदपुर के आगे गुरुद्वारे तक हाईवे का जायजा लिया तो हाईवे पर खतरे ही खतरे नजर आए।
खतरा- 1
रजऊ से आगे टूटे डिवाइडर के बीच बने कट
रजऊ परसपुर से फरीदपुर के बीच हाईवे पर छह से आठ फुट चौड़े डिवाइडर बनाए गए थे। इन पर पेड़ लगाए जाने थे ताकि रात में सामने से आ रहे वाहनों की हेडलाइट ड्राइवर की आंखों पर न पड़े और इस वजह से हादसे न हों। डिवाइडर पर अब तक पेड़ नहीं लगाए गए हैं। जगह-जगह सीमेंट की बाउंड्री टूट गई है। जहां जरूरत महसूस हुई, लोगों ने डिवाइडर तोड़कर कट भी बना लिए हैं। डिवाइडर का पेंट बहुत हल्का हो गया है। व्हाइट पेंट भी साफ न चमकने से हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
खतरा- 2
गौसगंज के पास एक लेन पर दोनों तरफ का ट्रैफिक
गौसगंज से पहले फरीदपुर की तरफ हाईवे का कुछ हिस्सा बना ही नही है। इसलिए यहां पर रूट का डायवर्जन कर सड़क के एक साइड की लेन पर ही दोनों तरफ का ट्रैफिक गुजर रहा है। रूट डायवर्जन के लिए बने मोड़ के पास हाईवे पर गहरा गड्ढा बन गया है। डायवर्जन से आगाह करने के लिए रेडियम बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। रोड के किनारे कुछ रेडियम पोल लगाए गए थे जो जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में फरीदपुर की ओर जाने वाले वाहन चालकों को यहां रात में रूट डायवर्जन का अंदाजा नहीं लग पाता। एनएचएआई ने सुरक्षा के लिहाज से गार्ड भी नहीं लगाए हैं।
विज्ञापन
खतरा- 3
टोल प्लाजा का अधूरा स्ट्रक्चर भी डेंजर जोन
रिलायंस पेट्रोल पंप के पास एनएचएआई ने टोल प्लाजा बनाने की तैयारी की थी। बाद में हाईवे का निर्माण कार्य ही ठप हो गया तो टोल प्लाजा का स्ट्रक्चर भी आधा-अधूरा बना छोड़ दिया गया। अब यहां बीच में गहरे गड्ढे हो गए हैं। हाईवे से गुजरने वालों को इस डेंजर प्वाइंट से बचाने के लिए भी कोई काम नहीं किया गया है। वैसे भी यहां काफी संकरी रोड है, जिसकी वजह से आए दिन वाहन फंसकर पलटते रहते हैं। यहां हुए हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
खतरा- 4
फरीदपुर फ्लाईओवर और एप्रोच रोड के ढहने का खतरा
फरीदपुर बाईपास का फ्लाईओवर और उसकी एप्रोच रोड के ढहने का खतरा भी बना हुआ है। यहां मिट्टी के बहने, हाईवे के दरकने और धंसने का सिलसिला जारी है। कई जगह एप्रोच रोड के किनारे कई फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं। पुल के पास ही सड़क कई फुट नीचे धंस गई है। इससे यहां गुजरने वाले वाहन बेकाबू हो रहे हैं। एनएचएआई ने खतरा भांपते हुए फ्लाईओवर पर आवागमन बंद करते हुए ‘रोड क्लोज्ड’ का बोर्ड लगा दिया है साथ ही हाईवे को सीमेंट के डिवाइडर लगाकर बंद करने की कोशिश की लेकिन लोगों ने डिवाइडर हटा दिए हैं। यहां दिनरात ट्रैफिक गुजरता है। सैकड़ों क्विंटल के वजनी ट्रकों के गुजरने से रोड और पुल के अचानक धंसने का खतरा बना हुआ है।
खतरा- 5
फ्लाईओवर पर एक साइड में नहीं बनी सर्विस लेन
एनएचएआई ने फरीदपुर फ्लाईओवर पर एक साइड में ही सर्विस लेन बनाई है। रोड के दूसरे साइड में सर्विस लेन न बनी होने से भी वाहनों को मजबूरी में खस्ताहाल फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर न खोला जाए तो एक तरफ की पतली सर्विस लेन पर लंबा जाम लग जाता है।
खतरा- 6
गुरुद्वारे के सामने भी ओवरब्रिज पर गड्ढे से खतरा
फरीदपुर के आगे गुरुद्वारे के पास भी ओवरब्रिज काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछले साल ही बारिश में इस फ्लाईओवर की दशा काफी खराब हो गई थी। मरम्मत के नाम पर लीपापोती हुई थी लेकिन बाद में इस काम को अधूरा छोड़ दिया गया। इससे इस फ्लाईओवर पर गुजरना खतरनाक बना हुआ है। पुल की एप्रोच रोड में भी दरारें पड़ गई है। इससे हादसे की संभावना बनी हुई है।
सीतापुर फोरलेन की हालत काफी गंभीर मसला है। इस संबंध में एनएचएआई के चेयरमैन से बात हो गई है। हाईवे पर साढ़े छह करोड़ रुपये से सुरक्षा और मरम्मत के काम होने हैं। काम ठीक से हो जाएं, इसके लिए मॉनीटरिंग भी की जाएगी। -रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
विज्ञापन
खतरा- 1
रजऊ से आगे टूटे डिवाइडर के बीच बने कट
रजऊ परसपुर से फरीदपुर के बीच हाईवे पर छह से आठ फुट चौड़े डिवाइडर बनाए गए थे। इन पर पेड़ लगाए जाने थे ताकि रात में सामने से आ रहे वाहनों की हेडलाइट ड्राइवर की आंखों पर न पड़े और इस वजह से हादसे न हों। डिवाइडर पर अब तक पेड़ नहीं लगाए गए हैं। जगह-जगह सीमेंट की बाउंड्री टूट गई है। जहां जरूरत महसूस हुई, लोगों ने डिवाइडर तोड़कर कट भी बना लिए हैं। डिवाइडर का पेंट बहुत हल्का हो गया है। व्हाइट पेंट भी साफ न चमकने से हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
विज्ञापन
खतरा- 2
गौसगंज के पास एक लेन पर दोनों तरफ का ट्रैफिक
गौसगंज से पहले फरीदपुर की तरफ हाईवे का कुछ हिस्सा बना ही नही है। इसलिए यहां पर रूट का डायवर्जन कर सड़क के एक साइड की लेन पर ही दोनों तरफ का ट्रैफिक गुजर रहा है। रूट डायवर्जन के लिए बने मोड़ के पास हाईवे पर गहरा गड्ढा बन गया है। डायवर्जन से आगाह करने के लिए रेडियम बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। रोड के किनारे कुछ रेडियम पोल लगाए गए थे जो जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में फरीदपुर की ओर जाने वाले वाहन चालकों को यहां रात में रूट डायवर्जन का अंदाजा नहीं लग पाता। एनएचएआई ने सुरक्षा के लिहाज से गार्ड भी नहीं लगाए हैं।
विज्ञापन
खतरा- 3
टोल प्लाजा का अधूरा स्ट्रक्चर भी डेंजर जोन
रिलायंस पेट्रोल पंप के पास एनएचएआई ने टोल प्लाजा बनाने की तैयारी की थी। बाद में हाईवे का निर्माण कार्य ही ठप हो गया तो टोल प्लाजा का स्ट्रक्चर भी आधा-अधूरा बना छोड़ दिया गया। अब यहां बीच में गहरे गड्ढे हो गए हैं। हाईवे से गुजरने वालों को इस डेंजर प्वाइंट से बचाने के लिए भी कोई काम नहीं किया गया है। वैसे भी यहां काफी संकरी रोड है, जिसकी वजह से आए दिन वाहन फंसकर पलटते रहते हैं। यहां हुए हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
खतरा- 4
फरीदपुर फ्लाईओवर और एप्रोच रोड के ढहने का खतरा
फरीदपुर बाईपास का फ्लाईओवर और उसकी एप्रोच रोड के ढहने का खतरा भी बना हुआ है। यहां मिट्टी के बहने, हाईवे के दरकने और धंसने का सिलसिला जारी है। कई जगह एप्रोच रोड के किनारे कई फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं। पुल के पास ही सड़क कई फुट नीचे धंस गई है। इससे यहां गुजरने वाले वाहन बेकाबू हो रहे हैं। एनएचएआई ने खतरा भांपते हुए फ्लाईओवर पर आवागमन बंद करते हुए ‘रोड क्लोज्ड’ का बोर्ड लगा दिया है साथ ही हाईवे को सीमेंट के डिवाइडर लगाकर बंद करने की कोशिश की लेकिन लोगों ने डिवाइडर हटा दिए हैं। यहां दिनरात ट्रैफिक गुजरता है। सैकड़ों क्विंटल के वजनी ट्रकों के गुजरने से रोड और पुल के अचानक धंसने का खतरा बना हुआ है।
खतरा- 5
फ्लाईओवर पर एक साइड में नहीं बनी सर्विस लेन
एनएचएआई ने फरीदपुर फ्लाईओवर पर एक साइड में ही सर्विस लेन बनाई है। रोड के दूसरे साइड में सर्विस लेन न बनी होने से भी वाहनों को मजबूरी में खस्ताहाल फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर न खोला जाए तो एक तरफ की पतली सर्विस लेन पर लंबा जाम लग जाता है।
खतरा- 6
गुरुद्वारे के सामने भी ओवरब्रिज पर गड्ढे से खतरा
फरीदपुर के आगे गुरुद्वारे के पास भी ओवरब्रिज काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछले साल ही बारिश में इस फ्लाईओवर की दशा काफी खराब हो गई थी। मरम्मत के नाम पर लीपापोती हुई थी लेकिन बाद में इस काम को अधूरा छोड़ दिया गया। इससे इस फ्लाईओवर पर गुजरना खतरनाक बना हुआ है। पुल की एप्रोच रोड में भी दरारें पड़ गई है। इससे हादसे की संभावना बनी हुई है।
सीतापुर फोरलेन की हालत काफी गंभीर मसला है। इस संबंध में एनएचएआई के चेयरमैन से बात हो गई है। हाईवे पर साढ़े छह करोड़ रुपये से सुरक्षा और मरम्मत के काम होने हैं। काम ठीक से हो जाएं, इसके लिए मॉनीटरिंग भी की जाएगी। -रणवीर प्रसाद, कमिश्नर