फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   तब मीरगंज और बिथरी बने थे जीत-हार के टर्निंग प्वाइंट

तब मीरगंज और बिथरी बने थे जीत-हार के टर्निंग प्वाइंट

Thu, 23 May 2019 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2019 02:33 AM IST
विज्ञापन
तब मीरगंज और बिथरी बने थे जीत-हार के टर्निंग प्वाइंट
बरेली। दस साल पहले हुए लोकसभा चुनाव की जब मतगणना चल रही थी, उसमें प्रत्याशियों को काफी उतार-चढाव देखने पड़े। उस चुनाव में लगातार सातवीं बार भाजपा से चुनाव मैदान में उतरे संतोष गंगवार अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे। मगर जब मतगणना शुरू हुई तो उनको अप्रत्याशित हार मिली। संतोष गंगवार उस चुनाव में केवल नवाबगंज से ही जीत पाए थे। बाकी चारो विधानसभाओं शहर, कैंट, मीरगंज और भोजीपुरा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण सिंह ऐरन से पिछड़ गए थे। मीरगंज से पिछड़ते ही संतोष गंगवार ने हार मान ली थी और बीच मतगणना में ही उठकर चले आए थे।
विज्ञापन

संतोष गंगवार लगातार छह बार चुनाव जीत चुके थे। 2009 में सातवीं जीत दर्ज करने के इरादे से उतरे। उस समय न तो नरेंद्र मोदी फैक्टर था, न ही अन्य किसी तरह की लहर। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की नाराजगी के चलते लोध वोट भी भाजपा से नाराज था। संतोष गंगवार ने लोध वोटरों की नाराजगी दूर करने के लिए मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को बुलाकर उनकी सभा भी कराई, लेकिन वह काम नहीं नहीं आ सकी। लोध बिरादरी के मतदाताओं ने भाजपा से किनारा कर लिया और संतोष गंगवार को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन

दूसरी ओर उसी चुनाव में पीलीभीत की सांसद मेनका गांधी ने आंवला से लोकसभा चुनाव लड़ा। उनको तबके सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप और बसपा के सर्वराज सिंह कड़ा मुकाबला करना पड़ा। मेनका गांधी अपनी परंपरागत सीट पीलीभीत छोड़कर आंवला चुनाव लड़ने आई थीं। मतगणना जब प्रारंभ हुई तो उस समय के सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप लगातार मेनका गांधी पर बढ़त बनाए रहे। एक बार तो मेनका को लगा कि वह चुनाव में पराजित हो गईं और वह बीच मतगणना में ही उठकर चली गईं। वह शेखूपुर में भारी अंतर से सपा प्रत्याशी से पिछड़ गई थीं, लेकिन जब बिथरी का नंबर आया तो यहां से मेनका को बंपर वोट मिले। उन वोटों ने न केवल शेखूपुर के अंतर को पाटा बल्कि उनको बढ़ दिलाकर जीत भी दिला दी। मतलब 2009 के लोकसभा चुनाव की मतगणना में मीरगंज और बिथरी बरेली और आंवला लोकसभा सीटों पर जीत के टर्निंग प्वाइंट बने थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed