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सपा-बसपा गठबंधन भाजपा के लिए बनेगा रोड़ा
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बरेली। लोकसभा चुनाव से पहले 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हुए थे। उसमें भले ही भाजपा को बरेली लोकसभा की सभी नौ सीटों पर जीत मिली हो, लेकिन उस चुनाव में सपा का कांग्रेस से गठबंधन था। बसपा अलग लड़ी थी। इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि सपा-बसपा का गठबंधन है और कांग्रेस अलग से चुनाव लड़ रही है।
अगर उस चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को वोट पड़ गए तो भाजपा के लिए भी चुनावी राह आसान नहीं होगी क्योंकि विधानसभा चुनाव में भाजपा को एतिहासिक जीत थी, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन को जोड़कर प्रत्येक विधानसभा में भाजपा से अधिक वोट मिले थे। अगर यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में होता तो भाजपा को विधानसभा की आधी सीटें भी मिलनी मुश्किल हो जातीं। बरेली की शहर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. अरुण कुमार को 115010 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल को 86343 और बसपा के बसपा अनीस अहमद को 14598 वोट मिले थे। हालांकि शहर सीट पर दोनों के वोट जोड़कर भी भाजपा के बराबर नहीं पहुंच पाए थे। वहीं कैंट में भाजपा के राजेश अग्रवाल को 88441 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मुजाहिद हसन को 75777 और बसपा प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 14239 वोट मिले थे। दोनों के मिलाकर 90006 वोट बनते हैं, जो भाजपा के जीते प्रत्याशी से अधिक हैं। यही हाल अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी था।
भोजीपुरा
भाजपा से बहोरनलाल मौर्य- 100381 वोट
सपा से शहजिल इस्लाम - 72617
बसपा से सुलेमान बेग - 49882
दोनों को मिलाकर- 128993
नोट : मतलब यह सीट भाजपा नहीं जीत पाती।
नवाबगंज -
भाजपा से केसर सिंह गंगवार- 93711
सपा से भगवतसरन गंगवार- 54569
बसपा से वीरेंद्र सिंह गंगवार- 18948
आईएमसी से शहला ताहिर- 36731
तीनों को मिलकर कुल वोट- 110278
मीरगंज -
भाजपा से डॉ. डीसी वर्मा- 108789 वोट
बसपा से सुल्तान बेग- 54289
कांग्रेस से सपा समर्थित नरेंद्र गंगवार- 36938
दोनों मिलाकर 91227 वोट
नोट : अगर सपा-बसपा के वोटरों ने इस तर्ज पर वोट दिए तो भाजपा को केवल मीरगंज और शहर से ही बढ़त मिल पाएगी। नवाबगंज, कैंट और भोजीपुरा से पिछड़ना होगा क्योंकि यह आंकड़ा उस समय का है, जब 2017 में भी पीएम मोदी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला था।
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अगर उस चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को वोट पड़ गए तो भाजपा के लिए भी चुनावी राह आसान नहीं होगी क्योंकि विधानसभा चुनाव में भाजपा को एतिहासिक जीत थी, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन को जोड़कर प्रत्येक विधानसभा में भाजपा से अधिक वोट मिले थे। अगर यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में होता तो भाजपा को विधानसभा की आधी सीटें भी मिलनी मुश्किल हो जातीं। बरेली की शहर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. अरुण कुमार को 115010 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल को 86343 और बसपा के बसपा अनीस अहमद को 14598 वोट मिले थे। हालांकि शहर सीट पर दोनों के वोट जोड़कर भी भाजपा के बराबर नहीं पहुंच पाए थे। वहीं कैंट में भाजपा के राजेश अग्रवाल को 88441 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मुजाहिद हसन को 75777 और बसपा प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 14239 वोट मिले थे। दोनों के मिलाकर 90006 वोट बनते हैं, जो भाजपा के जीते प्रत्याशी से अधिक हैं। यही हाल अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी था।
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भोजीपुरा
भाजपा से बहोरनलाल मौर्य- 100381 वोट
सपा से शहजिल इस्लाम - 72617
बसपा से सुलेमान बेग - 49882
दोनों को मिलाकर- 128993
नोट : मतलब यह सीट भाजपा नहीं जीत पाती।
नवाबगंज -
भाजपा से केसर सिंह गंगवार- 93711
सपा से भगवतसरन गंगवार- 54569
बसपा से वीरेंद्र सिंह गंगवार- 18948
आईएमसी से शहला ताहिर- 36731
तीनों को मिलकर कुल वोट- 110278
मीरगंज -
भाजपा से डॉ. डीसी वर्मा- 108789 वोट
बसपा से सुल्तान बेग- 54289
कांग्रेस से सपा समर्थित नरेंद्र गंगवार- 36938
दोनों मिलाकर 91227 वोट
नोट : अगर सपा-बसपा के वोटरों ने इस तर्ज पर वोट दिए तो भाजपा को केवल मीरगंज और शहर से ही बढ़त मिल पाएगी। नवाबगंज, कैंट और भोजीपुरा से पिछड़ना होगा क्योंकि यह आंकड़ा उस समय का है, जब 2017 में भी पीएम मोदी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला था।
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