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साहबा के तरीकों पर करें अमल
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बरेली। सीरतुन्नबी व इस्लाहे मुआशरा कांफ्रेंस की पांचवीं नशिस्त बुधवार को नवाबगंज की सड़क वाली मस्जिद में संपन्न हुई। जमीयत उलमा की ओर संपन्न हुई इस कांफ्रेंस में सहाबा के अमल और तलाक देेने की सूरत पर चर्चा की गई।
इस मौके पर मेहमाने खुसूसी मौलाना मोहम्मद तासीर ने साहबा इकराम की जिंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि जिस तरह साहबा ने अपनी जिंदगी में नबी-ए-करीन की बताई बातों पर अमल किया, उसी तरह से हमें भी साहबा के तरीके पर अमल करना चाहिए तभी हम अपने मुआशरे को बदल सकते हैं। सदारत करते हुए जिला जमीयत उलमा के सदर मुफ्ती मोहम्मद मियां ने कहा कि तलाक को लोगों ने समझा नहीं। उन्होंने कहा कि जब शौहर और बीवी में बिल्कुल न बने, नौबत यह आ जाए कि दोनों में कोई गुंजाइश भी न बचे, तब तलाक दिया जा सकता है। हमने तो तलाक को मजाक दिया है। नबी-ए-करीम ने तलाक के अमल को सबसे गलत बताया है। मौलाना शाहिद और मौलाना अरशद मजाहिरी ने निजामत संभाली।
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इस मौके पर मेहमाने खुसूसी मौलाना मोहम्मद तासीर ने साहबा इकराम की जिंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि जिस तरह साहबा ने अपनी जिंदगी में नबी-ए-करीन की बताई बातों पर अमल किया, उसी तरह से हमें भी साहबा के तरीके पर अमल करना चाहिए तभी हम अपने मुआशरे को बदल सकते हैं। सदारत करते हुए जिला जमीयत उलमा के सदर मुफ्ती मोहम्मद मियां ने कहा कि तलाक को लोगों ने समझा नहीं। उन्होंने कहा कि जब शौहर और बीवी में बिल्कुल न बने, नौबत यह आ जाए कि दोनों में कोई गुंजाइश भी न बचे, तब तलाक दिया जा सकता है। हमने तो तलाक को मजाक दिया है। नबी-ए-करीम ने तलाक के अमल को सबसे गलत बताया है। मौलाना शाहिद और मौलाना अरशद मजाहिरी ने निजामत संभाली।
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