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चौखड़ा फार्म में घास चर रहे मवेशियों पर बाघ का हमला
Updated Fri, 13 Oct 2017 06:54 PM IST
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लखीमपुर खीरी/मझगईं।
चौखड़ा फार्म में घास चर रहे मवेशियों पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में एक भैंसें को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया, वहीं पास में ही घास काट रहा एक ग्रामीण और कुछ चरवाहे इस हमले में बाल-बाल बच गए। उन लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। कुछ दूरी पर चार दिन पहले ही बाघ एक सांड़ को भी मौत के घाट उतार चुका है। बाघ के लगातार हमले से ग्रामीणों में दहशत फैली हुई है।
क्षेत्र के गांव कोठिया निवासी सियाराम बृहस्पतिवार को चौखड़ा फार्म के खल्ला गुरुद्वारा के आगे जसवंत सिंह के खेत के पास अपने मवेशियों को चरा रहा था। इस दौरान वहां छिपे बैठे बाघ ने मवेशियों पर हमला बोलकर एक भैंसें को मार डाला। कुछ दूरी पर ही गांव का सियाराम घास काट रहा था, बाघ के हमले से घबराकर वह भाग खड़ा हुआ। वहीं पास ही गांव का ही छड़ीराम भी मवेशियों के लिए चारा काट रहा था। दोनों वहां से जान बचाकर बुरी तरह से भागे।
बता दें कि अभी चार दिन पहले ही वहां से कुछ दूर मटैहिया घाट जाने वाले रास्ते के करीब एक सांड़ को भी बाघ ने मौत के घाट उतार दिया था। दो हफ्ते में दो मवेशियों पर हुए बाघ से हमले से चरवाहों में दहशत है। वहीं ग्रामीण भी खेतों की तरफ जाने से कतराने लगे हैं।
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चौखड़ा फार्म में घास चर रहे मवेशियों पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में एक भैंसें को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया, वहीं पास में ही घास काट रहा एक ग्रामीण और कुछ चरवाहे इस हमले में बाल-बाल बच गए। उन लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। कुछ दूरी पर चार दिन पहले ही बाघ एक सांड़ को भी मौत के घाट उतार चुका है। बाघ के लगातार हमले से ग्रामीणों में दहशत फैली हुई है।
क्षेत्र के गांव कोठिया निवासी सियाराम बृहस्पतिवार को चौखड़ा फार्म के खल्ला गुरुद्वारा के आगे जसवंत सिंह के खेत के पास अपने मवेशियों को चरा रहा था। इस दौरान वहां छिपे बैठे बाघ ने मवेशियों पर हमला बोलकर एक भैंसें को मार डाला। कुछ दूरी पर ही गांव का सियाराम घास काट रहा था, बाघ के हमले से घबराकर वह भाग खड़ा हुआ। वहीं पास ही गांव का ही छड़ीराम भी मवेशियों के लिए चारा काट रहा था। दोनों वहां से जान बचाकर बुरी तरह से भागे।
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बता दें कि अभी चार दिन पहले ही वहां से कुछ दूर मटैहिया घाट जाने वाले रास्ते के करीब एक सांड़ को भी बाघ ने मौत के घाट उतार दिया था। दो हफ्ते में दो मवेशियों पर हुए बाघ से हमले से चरवाहों में दहशत है। वहीं ग्रामीण भी खेतों की तरफ जाने से कतराने लगे हैं।
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