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जिला अस्पताल की फर्जी रसीद से जमानत लेने कोशिश
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बरेली। जिला अस्पताल में बुधवार को दिल्ली से भेजे गए दस्तावेजों के सत्यापन में फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया है। दस्तावेजों की जांच की गई तो वह फर्जी निकले। इसके बाद सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने दिल्ली पुलिस को दस्तावेज फर्जी होने की रिपोर्ट भेज दी है। अस्पताल में दिनभर यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।
दिल्ली के उत्तरी रेंज के एसिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस कार्यालय की ओर से भेेजे गए पत्र के मुताबिक वर्ष 2015 में आंवला के थाना बिसारतगंज के गांव सहसा निवासी शाकिर अली को मादक पदार्थों के साथ दिल्ली में पकड़ा गया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। जेल में शाकिर ने खुद को ब्रेन ट्यूमर बताते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की है। कोर्ट में उसने जिला अस्पताल में चल रहे इलाज की रसीदें सौंपी हैं। जिनको सत्यापित कराने के लिए कोर्ट ने रेंज को आदेशित किया है। रेंज ने सत्यापन के लिए दस्तावेज जिला अस्पताल भेजे। मंगलवार को इनकी जांच की गई। जिला अस्पताल के डॉक्टर को दिखाने की पर्ची, उसमें लिखी दवाएं और हस्ताक्षर सब बेमेल मिले। पर्ची पर जिस डॉक्टर का नाम है उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस ने तत्काल सत्यापन की रिपोर्ट भेज दी है।
दिल्ली पुलिस की ओर से एक बंदी के चल रहे इलाज के संबंध में दस्तावेजों का सत्यापन कराने को भेजा था, जो जांच में फर्जी मिले हैं। रिपोर्ट भेज दी गई है। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस
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दिल्ली के उत्तरी रेंज के एसिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस कार्यालय की ओर से भेेजे गए पत्र के मुताबिक वर्ष 2015 में आंवला के थाना बिसारतगंज के गांव सहसा निवासी शाकिर अली को मादक पदार्थों के साथ दिल्ली में पकड़ा गया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। जेल में शाकिर ने खुद को ब्रेन ट्यूमर बताते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की है। कोर्ट में उसने जिला अस्पताल में चल रहे इलाज की रसीदें सौंपी हैं। जिनको सत्यापित कराने के लिए कोर्ट ने रेंज को आदेशित किया है। रेंज ने सत्यापन के लिए दस्तावेज जिला अस्पताल भेजे। मंगलवार को इनकी जांच की गई। जिला अस्पताल के डॉक्टर को दिखाने की पर्ची, उसमें लिखी दवाएं और हस्ताक्षर सब बेमेल मिले। पर्ची पर जिस डॉक्टर का नाम है उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस ने तत्काल सत्यापन की रिपोर्ट भेज दी है।
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दिल्ली पुलिस की ओर से एक बंदी के चल रहे इलाज के संबंध में दस्तावेजों का सत्यापन कराने को भेजा था, जो जांच में फर्जी मिले हैं। रिपोर्ट भेज दी गई है। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस
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