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निर्धन कन्या के विवाह में किया सहयोग
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बरेली। मानव सेवा क्लब के तत्वाधान मेें सोमवार को कहरवान स्थित कार्यालय पर निर्धन कन्या के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग समेत गृहस्थी के सभी सामान मुहैया कराया गया। क्लब अध्यक्ष सुरेंद्र बीनू सिन्हा ने बताया कि कन्या के पिता चौपुला पुल के नीचे झुग्गी में रहता है। जो चाकू पर धार लगाकर कमाए रुपयो से परिवार का भरण पोषण करता है। ऐसे में उसकी बेटी के विवाह के लिए क्लब ने सामूहिक रूप से विवाह समेत गृहस्थी के लिए उपयोगी सामान समेत बरातियों के खाने का इंतजाम भी किया।
पेश की खिराजे अकीदत
बरेली। कुुंवरपुर में आल इंडिया गद्दी समाज के पदाधिकारियों ने समरउद्दीन एडवोकेट व समाजसेवी असलम अली के इंतकाल पर खिराजे अकीदत पेश की। प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी शाह आलम ने उनकी दीनी, माली खिदमात पर रौशनी डाली। यहां संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दाउद अहमद समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
‘जैसी सोच, वैसे ही बन जाओगेे’
सीबीगंज। सर्वोदयनगर मंदिर में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य राजेन्द्र ने नियम, संयम, ध्यान, योग और सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में बताया। कहा कि हालात कैसे भी हों, हमारा दृष्टिकोण और विचार हमेशा सकारात्मक रहने चाहिए। क्योंकि हम जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।
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कहा कि संयम, ध्यान और योग में ईश्वर को पाने का मार्ग भी छिपा है। योग ही हमें खुद से और ईश्वर से एकाकार कराता है। जिस योग से हमारा मन अपने आराध्य की सेवा में लग जाए, वह सच्चा योग है। उन्होंने भक्ति का मार्ग बताने के लिए भक्त ध्रुव की कथा सुनाई और अहंकार से दूर रहने के लिए राजा दक्ष का प्रसंग सुनाया। आचार्य ने कहा कि जहां सच्ची भक्ति हो, वहां अहंकार नहीं रहता।
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पेश की खिराजे अकीदत
बरेली। कुुंवरपुर में आल इंडिया गद्दी समाज के पदाधिकारियों ने समरउद्दीन एडवोकेट व समाजसेवी असलम अली के इंतकाल पर खिराजे अकीदत पेश की। प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी शाह आलम ने उनकी दीनी, माली खिदमात पर रौशनी डाली। यहां संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दाउद अहमद समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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‘जैसी सोच, वैसे ही बन जाओगेे’
सीबीगंज। सर्वोदयनगर मंदिर में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य राजेन्द्र ने नियम, संयम, ध्यान, योग और सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में बताया। कहा कि हालात कैसे भी हों, हमारा दृष्टिकोण और विचार हमेशा सकारात्मक रहने चाहिए। क्योंकि हम जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।
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कहा कि संयम, ध्यान और योग में ईश्वर को पाने का मार्ग भी छिपा है। योग ही हमें खुद से और ईश्वर से एकाकार कराता है। जिस योग से हमारा मन अपने आराध्य की सेवा में लग जाए, वह सच्चा योग है। उन्होंने भक्ति का मार्ग बताने के लिए भक्त ध्रुव की कथा सुनाई और अहंकार से दूर रहने के लिए राजा दक्ष का प्रसंग सुनाया। आचार्य ने कहा कि जहां सच्ची भक्ति हो, वहां अहंकार नहीं रहता।