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डीएवी कॉलेज की लीज खत्म, शुरू हुई भूमि वापस लेने की कवायद
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बरेली। आर्य समाज अनाथालय प्रबंधन ने अपनी जमीन पर किरायेदार डीएवी कालीचरन हायर सेकेंडरी विद्यालय का अनुबंध समाप्त होने और उसके भवन की हालत जर्जर होने की बात कहते हुए उसे खाली कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए अनाथालय प्रबंधन ने जिला विद्यालय निरीक्षक और नगर आयुक्त को भी चिट्ठियां भेजी हैं।
अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि डीएवी कालीचरन हायर सेकेंडरी स्कूल उसका किरायेदार है। अनाथालय प्रबंधन ने अपनी भूमि को इस विद्यालय के संचालन के लिए वर्ष 1944 में लीज पर दिया था। अनाथालय के प्रेसीडेंट हर्षवर्धन का कहना है कि 75 वर्षों में विद्यालय प्रबंधन ने भवन के रखरखाव पर किसी भी प्रकार का व्यय नहीं किया है। इससे यह भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। पिछले साल बरसात के दिनों में स्कूल भवन का कुछ हिस्सा ढह गया था। इसके अलावा जनवरी 2015 के बाद अब तक करीब चार साल का किराया तक जमा नहीं है, जबकि इसकी लीज जनवरी 1971 से फरवरी 1986 तक की थी, जो समाप्त हो चुकी है। इसके अनुबंध को आज तक आगे नहीं बढ़ाया गया है। नियमानुसार जब विद्यालय के पास मालिकाना हक और अपना निजी भवन ही नहीं रहा तो विद्यालय का संचालन भी नहीं हो सकता। अनाथालय प्रबंधन ने डीआईओएस को लेटर भेजकर यह भी बताया है कि विद्यालय का भवन बहुत ही खस्ताहाल है। दो कमरे पिछले बरसात के सीजन में धराशायी हो चुके हैं। भवन का बाकी हिस्सा भी जर्जर होने से यहां पढ़ने वाले बच्चे और अध्यापकों के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। अनाथालय प्रबंधन की तरफ से नगर आयुक्त को भी इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।
इस स्कूल की लीज खत्म हो चुकी है। नियमित तौर से किराया भी जमा न होने के साथ इसकी बिल्डिंग भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। इसलिए इस जमीन को अनाथालय वापस लेने की कोशिश कर रहा है।
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-हर्षवर्धन, प्रेसीडेंट, आर्यसमाज अनाथालय
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अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि डीएवी कालीचरन हायर सेकेंडरी स्कूल उसका किरायेदार है। अनाथालय प्रबंधन ने अपनी भूमि को इस विद्यालय के संचालन के लिए वर्ष 1944 में लीज पर दिया था। अनाथालय के प्रेसीडेंट हर्षवर्धन का कहना है कि 75 वर्षों में विद्यालय प्रबंधन ने भवन के रखरखाव पर किसी भी प्रकार का व्यय नहीं किया है। इससे यह भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। पिछले साल बरसात के दिनों में स्कूल भवन का कुछ हिस्सा ढह गया था। इसके अलावा जनवरी 2015 के बाद अब तक करीब चार साल का किराया तक जमा नहीं है, जबकि इसकी लीज जनवरी 1971 से फरवरी 1986 तक की थी, जो समाप्त हो चुकी है। इसके अनुबंध को आज तक आगे नहीं बढ़ाया गया है। नियमानुसार जब विद्यालय के पास मालिकाना हक और अपना निजी भवन ही नहीं रहा तो विद्यालय का संचालन भी नहीं हो सकता। अनाथालय प्रबंधन ने डीआईओएस को लेटर भेजकर यह भी बताया है कि विद्यालय का भवन बहुत ही खस्ताहाल है। दो कमरे पिछले बरसात के सीजन में धराशायी हो चुके हैं। भवन का बाकी हिस्सा भी जर्जर होने से यहां पढ़ने वाले बच्चे और अध्यापकों के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। अनाथालय प्रबंधन की तरफ से नगर आयुक्त को भी इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।
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इस स्कूल की लीज खत्म हो चुकी है। नियमित तौर से किराया भी जमा न होने के साथ इसकी बिल्डिंग भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। इसलिए इस जमीन को अनाथालय वापस लेने की कोशिश कर रहा है।
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-हर्षवर्धन, प्रेसीडेंट, आर्यसमाज अनाथालय