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बीडीए का नोटिस गिलास में डालकर पी गए बार मालिक
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बरेली। नेताजी का संरक्षण पाकर बार मालिकों के हौसले बुलंद हो गए। बार मालिकों ने अपने भवन के नक्शे बीडीए में नहीं जमा किए। बीडीए के नोटिस भी उन पर कोई असर नहीं डाल सके। दो महीने बाद भी बीडीए के नोटिस पर बार मालिकों ने किसी तरह का जवाब नहीं भेजा। बार मालिक बीडीए के नोटिस को जाम की तरह गिलास में डालकर पी गए। उधर राजनीतिक सिफारिशों से परेशान अफसरों ने भी हाथ कार्रवाई से खड़े कर लिए हैं।
मॉडल टाउन के आवासीय एरिया में जब चार महीने पहले ‘बार-21’ खुला तो आस-पास के बाशिंदों ने कमिश्नर को शिकायती पत्र भेजकर विरोध जताया। बार की बिल्डिंग पहले बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बन रही थी। बार आवासीय एरिया में तो है ही, मंदिर और गुरुद्वारा भी इस से बहुत दूर नहीं है। अमर उजाला ने जब जनहित के इस मुद्दे को उठाकर आवासीय एरिया में बार खोलने के समाचार प्रकाशित किए तो बीडीए हरकत में आया। बीडीए की टीम ने बिना मानचित्र मंजूर कराए निर्माणाधीन बार को सील कर दिया। तब बार की लैंडयूज बदले बिना आवासीय एरिया में ही कुछ जुर्माना लगाकर कंपाउंडिंग हो गई। मगर, आवासीय एरिया में व्यवसायिक जमीन का भू-उपयोग बदलने का मामला नहीं सुलझा और बार शुरू भी हो गया। इसके बाद बीडीए ने शहर में चल रहे 27 अन्य बार के भवन मालिकों को नोटिस जारी कर उनके मानचित्र की छाया प्रति तलब की। भवन मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया। सूत्रों की मानें तो बार मालिक बीडीए का नोटिस मिलने के बाद नेताजी की शरण में पहुंच गए। नेताजी ने चुनाव नजदीक होने का हवाला देकर तुरंत कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया। जब एक नहीं, बल्कि कई नेताओं के फोन आने लगे तो अफसरों ने भी हाथ खड़े कर लिए। इस तरह नेताजी के संरक्षण में बार मालिक निश्चिंत होकर अवैध भवनों (कहीं मानचित्र आवासीय में स्वीकृत तो कहीं बिल्कुल नहीं) में अपना कारोबार कर रहे हैं।
बार को नोटिस देकर उनके मानचित्र मांगे गए थे। अब तक ज्यादातर बार मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं भेजा है। इनको रिमाइंडर नोटिस भेजे जाएंगे। फिर भी जवाब नहीं आया तो आगे की कार्रवाई होगी। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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मॉडल टाउन के आवासीय एरिया में जब चार महीने पहले ‘बार-21’ खुला तो आस-पास के बाशिंदों ने कमिश्नर को शिकायती पत्र भेजकर विरोध जताया। बार की बिल्डिंग पहले बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बन रही थी। बार आवासीय एरिया में तो है ही, मंदिर और गुरुद्वारा भी इस से बहुत दूर नहीं है। अमर उजाला ने जब जनहित के इस मुद्दे को उठाकर आवासीय एरिया में बार खोलने के समाचार प्रकाशित किए तो बीडीए हरकत में आया। बीडीए की टीम ने बिना मानचित्र मंजूर कराए निर्माणाधीन बार को सील कर दिया। तब बार की लैंडयूज बदले बिना आवासीय एरिया में ही कुछ जुर्माना लगाकर कंपाउंडिंग हो गई। मगर, आवासीय एरिया में व्यवसायिक जमीन का भू-उपयोग बदलने का मामला नहीं सुलझा और बार शुरू भी हो गया। इसके बाद बीडीए ने शहर में चल रहे 27 अन्य बार के भवन मालिकों को नोटिस जारी कर उनके मानचित्र की छाया प्रति तलब की। भवन मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया। सूत्रों की मानें तो बार मालिक बीडीए का नोटिस मिलने के बाद नेताजी की शरण में पहुंच गए। नेताजी ने चुनाव नजदीक होने का हवाला देकर तुरंत कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया। जब एक नहीं, बल्कि कई नेताओं के फोन आने लगे तो अफसरों ने भी हाथ खड़े कर लिए। इस तरह नेताजी के संरक्षण में बार मालिक निश्चिंत होकर अवैध भवनों (कहीं मानचित्र आवासीय में स्वीकृत तो कहीं बिल्कुल नहीं) में अपना कारोबार कर रहे हैं।
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बार को नोटिस देकर उनके मानचित्र मांगे गए थे। अब तक ज्यादातर बार मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं भेजा है। इनको रिमाइंडर नोटिस भेजे जाएंगे। फिर भी जवाब नहीं आया तो आगे की कार्रवाई होगी। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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