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दसवीं का रिजल्ट भी शत-प्रतिशत
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रिजल्ट आने की खुशी मनाते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सोबतीज पब्लिक स्कूल के सिद्धांत ने पाए 99.8 फीसदी अंक
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बरेली। सीबीएसई के दसवीं का परीक्षा परिणाम मंगलवार दोपहर 12 बजे जारी हो गया। परिणाम जारी होने के बाद बच्चे स्कूल पहुंचने लगे। वहां उन्होंने शिक्षकों और अपने साथियों संग खुशियां साझा कीं। सोबतीज पब्लिक स्कूल के सिद्धांत शुक्ला ने 99.8 फीसदी अंक पाए हैं। वह सौ फीसदी अंक लाने में हिंदी में एक नंबर कम मिलने से चूक गए।
बरेली में सीबीएसई के 60 स्कूलों में 8200 विद्यार्थी पंजीकृत थे। सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। दोपहर करीब 12 बजे परिणाम आने शुरू हुए तो विद्यार्थी खुशी से झूम उठे। हाल ही में आए बारहवीं के परिणाम की अपेक्षा दसवीं में बच्चों के नंबर बेहतर आए हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। स्कूलों में शिक्षकों के साथ और ग्रुप बनाकर बच्चे सेल्फी लेते रहे।
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सीबीएसई के सिटी कोआर्डीनेटर वीके मिश्र ने बताया कि बोर्ड ने सर्वे कराया था। इसमें यह बात निकलकर सामने आई कि हर स्कूल ने एक यूनिक टेस्ट जरूर कराया है। अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी सभी ने कराईं थीं। इसके अलावा प्री बोर्ड परीक्षाओं में भी लगभग सभी विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इसी के आधार पर नंबर दिए जाने थे। जिन बच्चों ने प्री बोर्ड में हिस्सा नहीं लिया था, उनके स्कूलों से कहा गया कि वे ऑनलाइन प्री बोर्ड परीक्षाएं कराएं।
दसवीं के परिणाम में 10 नंबर यूनिक टेस्ट, 30 नंबर अर्द्धवार्षिक परीक्षा और 40 नंबर प्री बोर्ड परीक्षा से दिए गए। बाकी 20 नंबर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए गए। आंतरिक मूल्यांकन में पांच नंबर पोर्टफोलियो और पांच नंबर विषय कौशल के आधार पर दिए गए। बाकी दस नंबर विभिन्न परीक्षाएं जो वर्ष भर होती हैं, उनके आधार पर दिए गए। इसमें क्विज या कक्षा के आधार पर होने वाली परीक्षाएं शामिल रहीं।
इसके बाद बोर्ड ने तीन रेंज तय कर दी थीं। उसी के आधार पर स्कूलों को परीक्षा परिणाम बोर्ड में दाखिल करना था। इसके लिए असेसमेंट पॉलिसी बनाई गई। इस पॉलिसी के तहत पिछले तीन साल के स्कूल के रिजल्ट में जो सर्वाधिक नंबर थे, उससे अधिक नंबर न देने की शर्त रखी गई। इसमें विषय औसत को भी शामिल किया गया। इसमें हर स्कूल में दस शिक्षकों की कमेटी बना दी गई थी। इस कमेटी में आठ शिक्षक उसी स्कूल के थे और दो शिक्षक बाहरी स्कूल के थे। कुछ जगहों पर बोर्ड ने पर्यवेक्षक भेजे और कुछ कमेटियों में बोर्ड ने अपने पर्यवेक्षकाें को भी शामिल किया। इस फार्मूले को सुप्रीम कोर्ट में भी बोर्ड ने दाखिल किया था।
बरेली में सीबीएसई के 60 स्कूलों में 8200 विद्यार्थी पंजीकृत थे। सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। दोपहर करीब 12 बजे परिणाम आने शुरू हुए तो विद्यार्थी खुशी से झूम उठे। हाल ही में आए बारहवीं के परिणाम की अपेक्षा दसवीं में बच्चों के नंबर बेहतर आए हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। स्कूलों में शिक्षकों के साथ और ग्रुप बनाकर बच्चे सेल्फी लेते रहे।
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सारणीकरण नीति से जारी हुआ परीक्षा परिणाम
बरेली। कोरोना की वजह से परीक्षा नहीं हुई लिहाजा दसवीं का परिणाम सीबीएसई ने सारणीकरण नीति के तहत जारी किया। इसमें 80 नंबर यूनिक टेस्ट, अर्द्धवार्षिक परीक्षा और प्री बोर्ड के आधार पर दिए गए। बाकी बीस नंबर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए गए।
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सीबीएसई के सिटी कोआर्डीनेटर वीके मिश्र ने बताया कि बोर्ड ने सर्वे कराया था। इसमें यह बात निकलकर सामने आई कि हर स्कूल ने एक यूनिक टेस्ट जरूर कराया है। अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी सभी ने कराईं थीं। इसके अलावा प्री बोर्ड परीक्षाओं में भी लगभग सभी विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इसी के आधार पर नंबर दिए जाने थे। जिन बच्चों ने प्री बोर्ड में हिस्सा नहीं लिया था, उनके स्कूलों से कहा गया कि वे ऑनलाइन प्री बोर्ड परीक्षाएं कराएं।
दसवीं के परिणाम में 10 नंबर यूनिक टेस्ट, 30 नंबर अर्द्धवार्षिक परीक्षा और 40 नंबर प्री बोर्ड परीक्षा से दिए गए। बाकी 20 नंबर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए गए। आंतरिक मूल्यांकन में पांच नंबर पोर्टफोलियो और पांच नंबर विषय कौशल के आधार पर दिए गए। बाकी दस नंबर विभिन्न परीक्षाएं जो वर्ष भर होती हैं, उनके आधार पर दिए गए। इसमें क्विज या कक्षा के आधार पर होने वाली परीक्षाएं शामिल रहीं।
इसके बाद बोर्ड ने तीन रेंज तय कर दी थीं। उसी के आधार पर स्कूलों को परीक्षा परिणाम बोर्ड में दाखिल करना था। इसके लिए असेसमेंट पॉलिसी बनाई गई। इस पॉलिसी के तहत पिछले तीन साल के स्कूल के रिजल्ट में जो सर्वाधिक नंबर थे, उससे अधिक नंबर न देने की शर्त रखी गई। इसमें विषय औसत को भी शामिल किया गया। इसमें हर स्कूल में दस शिक्षकों की कमेटी बना दी गई थी। इस कमेटी में आठ शिक्षक उसी स्कूल के थे और दो शिक्षक बाहरी स्कूल के थे। कुछ जगहों पर बोर्ड ने पर्यवेक्षक भेजे और कुछ कमेटियों में बोर्ड ने अपने पर्यवेक्षकाें को भी शामिल किया। इस फार्मूले को सुप्रीम कोर्ट में भी बोर्ड ने दाखिल किया था।