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एक दिन ही क्यों, लाेग रोज पहनें खादी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sat, 28 May 2016 12:11 AM IST
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खादी
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खादी का क्रेज बच्चों व युवाओं में बढ़ता जा रहा है। बुजुर्गों की पसंद तो है ही। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को सप्ताह में एक खादी पहनने की अपील ने खादी उद्योग में नई जान फूंक दी है।
खादी वस्त्रों के उत्पादन से जुड़े लोगों की मानें तो खादी की मांग दिन प्रति दिन बढ़ रही है लेकिन सीएम द्वारा की गई अपील के बाद इस उद्योग को नए पंख मिलने का आसार बढ़ गए हैं।
पिछले साल बिक्री में 25 फीसदी बढ़ोतरी ः पिछले एक दशक से खादी वस्त्रों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान खादी में प्रतिवर्ष 8 से 10 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खादी आश्रम के क्षेत्रीय मंत्री दीनानाथ सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह बढ़ोतरी करीब 25 फीसदी रही। इस वर्ष में खादी वस्त्रों की बिक्री करीब 9.5 करोड़ तक रही। जबकि जनपद में उत्पादन सात करोड़ का हुआ।
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इससे पहले वित्तीय वर्ष 2014-15 में उत्पादन करीब 6.5 करोड़ का रहा जबकि बिक्री करीब पौने आठ करोड़ रही। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में लगने वाली एक माह की प्रदर्शनी में वित्तीय वर्ष 2015-16 में करीब 40 लाख रुपये के पकड़े बेेचे गए थे जो इसके पहले वाले वित्तीय वर्ष से करीब 15 रुपये अधिक है।
पहले से पसंद हैं खादी के कपड़े
खादी वस्त्रों की मांग काफी है। इनसे तैयार वस्त्र काफी आरामदायक होते हैं। साथ ही लोेगों के लिए लाभकारी है। खादी वस्त्रों का प्रयोग मेरी प्राथमिकता रही है। अब तो मुख्यमंत्री ने भी अपील की है। ऐसे में स्वयं भी इसका प्रयोग बढ़ाएंगे। सहयोगियों से भी खादी वस्त्रों के प्रयोग की अपील करेंगे। इससे खादी उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। - नीलम, एसडीएम सदर
खादी कोई वस्त्र नहीं विचार है
खादी कोई वस्त्र नहीं एक संस्कृति व विचार है। हर भारतीय संस्कृति की पहिचान भी है। खादी के पकड़े आरामदायक तो होेते ही हैं। इसके अलावा खादी में समय के साथ बदलाव भी आया है। अब यह उद्योग भी अन्य कपड़ा उद्योगों को मात दे रहे हैं। ऐसे में लोगों का रुझान खादी को ओर बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों को खादी का प्रयोग एक दिन नहीं, रोज करना चाहिए। - अजय सिंह, साहित्यकार
योजनाएं केंद्र द्वारा संचालित होती हैं। जनपद में बुनकर स्टॉल, रुमाल या गमछा बनाने तक ही सीमित हैं। शासन से जो योजनाएं आती हैं। उन्हें बुनकरों को दिए जाने के पूरे प्रयास हो रहे हैं। लेकिन लोगों का रुझान बुनकरी की ओर से कम हो रहा है। मुख्यमंत्री के खादी पहनने की अपील से इस उद्योग को फिर से बढ़ावा मिलेगा। - मनोज दोहरे, टेक्सटाइल निरीक्षक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग
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खादी वस्त्रों के उत्पादन से जुड़े लोगों की मानें तो खादी की मांग दिन प्रति दिन बढ़ रही है लेकिन सीएम द्वारा की गई अपील के बाद इस उद्योग को नए पंख मिलने का आसार बढ़ गए हैं।
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पिछले साल बिक्री में 25 फीसदी बढ़ोतरी ः पिछले एक दशक से खादी वस्त्रों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान खादी में प्रतिवर्ष 8 से 10 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खादी आश्रम के क्षेत्रीय मंत्री दीनानाथ सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह बढ़ोतरी करीब 25 फीसदी रही। इस वर्ष में खादी वस्त्रों की बिक्री करीब 9.5 करोड़ तक रही। जबकि जनपद में उत्पादन सात करोड़ का हुआ।
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इससे पहले वित्तीय वर्ष 2014-15 में उत्पादन करीब 6.5 करोड़ का रहा जबकि बिक्री करीब पौने आठ करोड़ रही। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में लगने वाली एक माह की प्रदर्शनी में वित्तीय वर्ष 2015-16 में करीब 40 लाख रुपये के पकड़े बेेचे गए थे जो इसके पहले वाले वित्तीय वर्ष से करीब 15 रुपये अधिक है।
पहले से पसंद हैं खादी के कपड़े
खादी वस्त्रों की मांग काफी है। इनसे तैयार वस्त्र काफी आरामदायक होते हैं। साथ ही लोेगों के लिए लाभकारी है। खादी वस्त्रों का प्रयोग मेरी प्राथमिकता रही है। अब तो मुख्यमंत्री ने भी अपील की है। ऐसे में स्वयं भी इसका प्रयोग बढ़ाएंगे। सहयोगियों से भी खादी वस्त्रों के प्रयोग की अपील करेंगे। इससे खादी उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। - नीलम, एसडीएम सदर
खादी कोई वस्त्र नहीं विचार है
खादी कोई वस्त्र नहीं एक संस्कृति व विचार है। हर भारतीय संस्कृति की पहिचान भी है। खादी के पकड़े आरामदायक तो होेते ही हैं। इसके अलावा खादी में समय के साथ बदलाव भी आया है। अब यह उद्योग भी अन्य कपड़ा उद्योगों को मात दे रहे हैं। ऐसे में लोगों का रुझान खादी को ओर बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों को खादी का प्रयोग एक दिन नहीं, रोज करना चाहिए। - अजय सिंह, साहित्यकार
योजनाएं केंद्र द्वारा संचालित होती हैं। जनपद में बुनकर स्टॉल, रुमाल या गमछा बनाने तक ही सीमित हैं। शासन से जो योजनाएं आती हैं। उन्हें बुनकरों को दिए जाने के पूरे प्रयास हो रहे हैं। लेकिन लोगों का रुझान बुनकरी की ओर से कम हो रहा है। मुख्यमंत्री के खादी पहनने की अपील से इस उद्योग को फिर से बढ़ावा मिलेगा। - मनोज दोहरे, टेक्सटाइल निरीक्षक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग