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Barabanki News: शस्त्र लाइसेंस में फर्जी हलफनामा लगाने पर सात साल की सजा
Tue, 23 Jun 2026 01:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:47 AM IST
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बाराबंकी। आपराधिक इतिहास छिपाकर और फर्जी शपथपत्र के सहारे शस्त्र लाइसेंस हथियाने की कोशिश एक शख्स को भारी पड़ गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी बृजेश कुमार को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अनार सिंह ने बताया कि यह मामला साल 2004 का है। जहांगीराबाद क्षेत्र के ग्राम अंजना निवासी बृजेश कुमार ने अपने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन के साथ एक झूठा हलफनामा लगाया था। इसमें उसने दावा किया था कि उसका दामन बिल्कुल साफ है और देश के किसी भी कोने में उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है।
आवेदन के बाद जब तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (नगर) कुलदीप नारायण ने प्रपत्रों की जांच और सत्यापन किया तो आरोपी की पोल खुल गई। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी बृजेश के खिलाफ पहले से ही थाना जहांगीराबाद में मारपीट और गाली-गलौज का मुकदमा दर्ज था।
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जांच रिपोर्ट सामने आने पर तत्कालीन उप जिला मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी (आयुध) उमेश मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 27 जून 2005 को कोतवाली में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचक की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद से यह मामला सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। दोनों पक्षों के वकीलों की तीखी बहस और सबूतों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को जालसाजी का दोषी पाया और उसे जेल भेज दिया।
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वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अनार सिंह ने बताया कि यह मामला साल 2004 का है। जहांगीराबाद क्षेत्र के ग्राम अंजना निवासी बृजेश कुमार ने अपने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन के साथ एक झूठा हलफनामा लगाया था। इसमें उसने दावा किया था कि उसका दामन बिल्कुल साफ है और देश के किसी भी कोने में उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है।
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आवेदन के बाद जब तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (नगर) कुलदीप नारायण ने प्रपत्रों की जांच और सत्यापन किया तो आरोपी की पोल खुल गई। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी बृजेश के खिलाफ पहले से ही थाना जहांगीराबाद में मारपीट और गाली-गलौज का मुकदमा दर्ज था।
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जांच रिपोर्ट सामने आने पर तत्कालीन उप जिला मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी (आयुध) उमेश मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 27 जून 2005 को कोतवाली में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचक की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद से यह मामला सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। दोनों पक्षों के वकीलों की तीखी बहस और सबूतों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को जालसाजी का दोषी पाया और उसे जेल भेज दिया।