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राम मंदिर के निर्माण में हस्तक्षेप रोकने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:37 PM IST
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बाराबंकी में सोमवार को कचहरी में वकीलों के साथ कोर्ट में वाद दायर कर बाहर निकलते नगर पालिका अध्यक्ष रंजीत बहादुर श्रीवास्तव।
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के प्रदेश अध्यक्ष व बाराबंकी नगर पालिका के चेयरमैन ने सोमवार को सिविल जज (सी. डि.) की कोर्ट में वाद दाखिल कर आल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के चेयरमैन को मंदिर निर्माण में हस्तक्षेप करने से रोकने की मांग की है।
सिविल जज (सी. डि.) अभिषेक श्रीवास्तव ने इसे प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए ग्राह्यता पर सुनवाई के लिए विपक्षी को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 5 मई को तय की है।
सिविल जज (सी. डि.) की कोर्ट में दाखिल वाद में रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें श्री रामजन्म भूमि मंदिर का निर्माण न्यास, जानकीदास घाट बड़ा स्थान अयोध्या के महंत जन्मेजय दास द्वारा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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बताया कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान को गर्भगृह के नाम से जाना जाता है, जिस पर हिंदू समाज के लोग काबिज चले आ रहे हैं और मंदिर स्थापित कर पूजन अर्चन करते रहे हैं।
मुस्लिम विद्वानों व इतिहासकारों के अनुसार 1528 ई. के आसपास बाबर द्वारा श्रीराम जन्म स्थान के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर एक इमारत कायम की गई और उसे बाबरी मस्जिद का नाम दिया गया। विभिन्न आंदोलनों व विधिक प्रयासों के परिणाम स्वरूप पुन: हिंदू धर्म के लोगों को श्रीराम जन्म स्थान पर कब्जा व दखल मिला और पूजन अर्चन होने लगा।
वादी ने बताया कि 13 अप्रैल को सारावगी स्थित कार्यालय में सदस्यों के राम मंदिर निर्माण को लेकर बैठक चल रही थी, तभी आल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के चेयरमैन जफरयाब जिलानी व उनके कार्यकर्ता मंदिर निर्माण न होने की धमकी देने लगे और कार्यालय पर कब्जे का प्रयास किया।
वादी ने बताया कि इसकी सूचना एसपी बाराबंकी व फैजाबाद को भी दी। वादी रंजीत बहादुर ने विवादित संपत्ति संवरगृह/जन्मस्थान में प्रतिवादी द्वारा मंदिर निर्माण में हस्तक्षेप रोकने की मंाग की।
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सिविल जज (सी. डि.) अभिषेक श्रीवास्तव ने इसे प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए ग्राह्यता पर सुनवाई के लिए विपक्षी को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 5 मई को तय की है।
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सिविल जज (सी. डि.) की कोर्ट में दाखिल वाद में रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें श्री रामजन्म भूमि मंदिर का निर्माण न्यास, जानकीदास घाट बड़ा स्थान अयोध्या के महंत जन्मेजय दास द्वारा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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बताया कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान को गर्भगृह के नाम से जाना जाता है, जिस पर हिंदू समाज के लोग काबिज चले आ रहे हैं और मंदिर स्थापित कर पूजन अर्चन करते रहे हैं।
मुस्लिम विद्वानों व इतिहासकारों के अनुसार 1528 ई. के आसपास बाबर द्वारा श्रीराम जन्म स्थान के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर एक इमारत कायम की गई और उसे बाबरी मस्जिद का नाम दिया गया। विभिन्न आंदोलनों व विधिक प्रयासों के परिणाम स्वरूप पुन: हिंदू धर्म के लोगों को श्रीराम जन्म स्थान पर कब्जा व दखल मिला और पूजन अर्चन होने लगा।
वादी ने बताया कि 13 अप्रैल को सारावगी स्थित कार्यालय में सदस्यों के राम मंदिर निर्माण को लेकर बैठक चल रही थी, तभी आल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के चेयरमैन जफरयाब जिलानी व उनके कार्यकर्ता मंदिर निर्माण न होने की धमकी देने लगे और कार्यालय पर कब्जे का प्रयास किया।
वादी ने बताया कि इसकी सूचना एसपी बाराबंकी व फैजाबाद को भी दी। वादी रंजीत बहादुर ने विवादित संपत्ति संवरगृह/जन्मस्थान में प्रतिवादी द्वारा मंदिर निर्माण में हस्तक्षेप रोकने की मंाग की।