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चीन: कैब बुक करते ही आती है स्मार्ट कार, मशीन से कट जाते हैं पैसे: AI ने कैसे बदली रोजमर्रा की जिंदगी?
Mon, 24 Aug 2026 06:29 AM IST
निर्मल कांत
एग्नस चांग, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
एग्नस चांग, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 24 Aug 2026 06:29 AM IST
सार
चीन में स्मार्ट कार, रोबोट और एआई मशीनें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही हैं। कैब से लेकर बाजार और दुकानों तक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। आखिर चीन की एआई रणनीति कितनी तेजी से बदल रही है?
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ह्यूमनॉइड रोबोट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
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विस्तार
चीन में लोकप्रिय पर्यटन स्थल की सड़कों पर टहलते हुए या दफ्तर से घर लौटते वक्त अथवा शॉपिंग करते समय इन्सान का किसी न किसी एआई डिवाइस से टकराए बिना चलना नामुमकिन हो चुका है। इनमें से कई चीजें वाकई काम की हैं।
बूढ़ी होती चीनी आबादी के लिए श्रमिकों की कमी रोबोट पाट रहे हैं, बाजारों में ह्यूमनॉइड का चलन बढ़ चुका है। सड़क पर एक डिवाइस रोड पार करने वाले पैदल यात्रियों को ट्रैक कर पुलिस की मदद कर रही है। सड़क पर गलती की तो डिवाइस आपको पकड़ती है। पर्यटन स्थलों में वेडिंग मशीन चेहरा पहचान कर वीचैट जैसे डिजिटल वॉलेट से पैसे काटती है।
चीन की रणनीति काफी अलग
चीनी कंपनियां बीजिंग के इस विजन को हकीकत में बदलने की होड़ में जुट गई हैं। इसी का नतीजा हैं बढ़ते ह्यूमनॉइड्स, स्मार्ट कारें और कई तरह के रोबोट्स। यह सोच अमेरिकी सोच से इसलिए अलग है क्योंकि अमेरिका खास जगहों पर ही इस तरह के रोबोट्स का प्रयोग करता है।
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ये भी पढ़ें: जापानी कंपनियों की पहली पसंद भारत, फिर भी कारखाने थाईलैंड में ज्यादा; क्या है रणनीति?
ह्यूमनॉइड रोबोट ही संभाल रहे ग्रॉसरी स्टोर
ह्यूमनॉइड रोबोट खुद ही ग्रॉसरी स्टोर को खुद रोबोट संभालता है। यहां तक कि आपके कूड़े को भी पहले एआई स्कैन करता है और बताता है कि वह सूखा कचरा है या गीला। उसके बाद आप सही डिब्बा चुनकर कचरा डालते हैं। सबसे बड़ी बात है कि सरकार खुद अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एआई को सीधे फैक्टरियों, अस्पतालों, स्कूलों और दुकानों में लगाने को प्रेरित कर रही है। जहां अमेरिकी कंपनियां ज्यादातर चैटबॉट्स और सुपरह्यूमन इंटेलिजेंस के अनिश्चित लक्ष्य पर केंद्रित हैं, वहीं चीन सरकार चाहती है कि एआई सीधे फैक्ट्रियों और दुकानों में इस्तेमाल होकर अर्थव्यवस्था को नई ताकत दें।
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बूढ़ी होती चीनी आबादी के लिए श्रमिकों की कमी रोबोट पाट रहे हैं, बाजारों में ह्यूमनॉइड का चलन बढ़ चुका है। सड़क पर एक डिवाइस रोड पार करने वाले पैदल यात्रियों को ट्रैक कर पुलिस की मदद कर रही है। सड़क पर गलती की तो डिवाइस आपको पकड़ती है। पर्यटन स्थलों में वेडिंग मशीन चेहरा पहचान कर वीचैट जैसे डिजिटल वॉलेट से पैसे काटती है।
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चीन की रणनीति काफी अलग
चीनी कंपनियां बीजिंग के इस विजन को हकीकत में बदलने की होड़ में जुट गई हैं। इसी का नतीजा हैं बढ़ते ह्यूमनॉइड्स, स्मार्ट कारें और कई तरह के रोबोट्स। यह सोच अमेरिकी सोच से इसलिए अलग है क्योंकि अमेरिका खास जगहों पर ही इस तरह के रोबोट्स का प्रयोग करता है।
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ह्यूमनॉइड रोबोट ही संभाल रहे ग्रॉसरी स्टोर
ह्यूमनॉइड रोबोट खुद ही ग्रॉसरी स्टोर को खुद रोबोट संभालता है। यहां तक कि आपके कूड़े को भी पहले एआई स्कैन करता है और बताता है कि वह सूखा कचरा है या गीला। उसके बाद आप सही डिब्बा चुनकर कचरा डालते हैं। सबसे बड़ी बात है कि सरकार खुद अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एआई को सीधे फैक्टरियों, अस्पतालों, स्कूलों और दुकानों में लगाने को प्रेरित कर रही है। जहां अमेरिकी कंपनियां ज्यादातर चैटबॉट्स और सुपरह्यूमन इंटेलिजेंस के अनिश्चित लक्ष्य पर केंद्रित हैं, वहीं चीन सरकार चाहती है कि एआई सीधे फैक्ट्रियों और दुकानों में इस्तेमाल होकर अर्थव्यवस्था को नई ताकत दें।