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शौचालय निर्माण में लाखों का घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Wed, 26 Jul 2017 10:53 PM IST
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14वें वित्त घोटाले की तरह ही जिले में पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों में बनवाए गए शौचालयों में भी जमकर घोटाला किया गया है। प्रधानों व सचिवों ने मिलकर इस खेल को अंजाम दिया। शिकायत पर शुरू हुई जांच के बाद इस भ्रष्टाचार का खुलासा हो रहा है। कुछ इसी प्रकार के शौचालय निर्माण का घोटाला रामनगर के तीन व हरख तथा सूरतगंज ब्लॉक की एक-एक ग्राम पंचायत में जमकर किया गया है। सबसे बड़ा घोटाला रामनगर के कॉफ फत्तेउल्लापुर ग्राम पंचायत में हुआ है।
यहां बनने के लिए दिए गए डेढ़ सौ शौचालयों में मात्र तीन शौचालय बनाकर पैसा हजम कर लिया गया। जिसको लेकर जहां पंचायती राज विभाग जांच में दोषी पाए गए सचिवों पर कार्रवाई कर रहा हैं। वहीं अब दोषी मिल रहे प्रधानों पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिकवरी के आदेश किए जा रहे हैं।
पंचायती राज विभाग द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में रामनगर ब्लॉक के लेन ग्राम पंचायत मेें नौ लाख 10 हजार 788 रुपये की लागत से 247 शौचालय बनने थे, जिसमें से जहां 214 शौचालय आज तक अधूरे पड़े हैं, वहीं 33 शौचालयों का निर्माण ही नहीं कराया गया। जिसके बाद प्रधान व सचिव के विरुद्ध रिकवरी के आदेश दिए गए हैं। इसी प्रकार इसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेहटा में भी 12 लाख 66 हजार 607 रुपये की लागत से 266 शौचालय बनने थे। लेकिन यहां पर भी 61 शौचालय बनाए ही नहीं गए।
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वहीं 205 शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। भ्रष्टाचार किए जाने को लेकर डीएम के निर्देश पर प्रधान व सचिव के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रिकवरी के आदेश दिए हैं। इसी प्रकार का एक मामला सूरतगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पतौंजा का आया है। यहां पर पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में 124 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए 14 लाख 88 हजार रुपये का बजट दिया गया था। लेकिन प्रधान व सचिव ने मिलकर 60 शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा कराया। आज भी 48 शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। वहीं 15 शौचालयों का निर्माण कार्य ही नहीं शुरू हुआ और बजट खर्च हो गया। सबसे बड़ा शौचालय घोटाला रामनगर ब्लॉक के कॉफ फत्तेउल्लाहपुर में हुआ है।
यहां पर 2011-12 में 2200 रुपये प्रति शौचालय की दर से 150 शौचालय बनने थे। लेकिन इस ग्राम पंचायत में मात्र तीन शौचालय बनाकर करीब तीन लाख 15 हजार रुपये का बंदरबांट कर लिया गया। उस समय यहां तैनात प्रधान व सचिव से रिकवरी कराने के लिए डीएम की ओर से रिकवरी के निर्देश दे दिए गए हैं। हरख ब्लॉक के इब्राहिमपुर गांव में भी पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में लगभग 100 शौचालय आठ लाख 4 हजार 79 रुपये की लागत से बनने थे, लेकिन राशि का बंदरबांट कर लिया गया। जांच में पोल खुलने के बाद डीएम ने रिकवरी के आदेश विभाग को दे दिए हैं।
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यहां बनने के लिए दिए गए डेढ़ सौ शौचालयों में मात्र तीन शौचालय बनाकर पैसा हजम कर लिया गया। जिसको लेकर जहां पंचायती राज विभाग जांच में दोषी पाए गए सचिवों पर कार्रवाई कर रहा हैं। वहीं अब दोषी मिल रहे प्रधानों पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिकवरी के आदेश किए जा रहे हैं।
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पंचायती राज विभाग द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में रामनगर ब्लॉक के लेन ग्राम पंचायत मेें नौ लाख 10 हजार 788 रुपये की लागत से 247 शौचालय बनने थे, जिसमें से जहां 214 शौचालय आज तक अधूरे पड़े हैं, वहीं 33 शौचालयों का निर्माण ही नहीं कराया गया। जिसके बाद प्रधान व सचिव के विरुद्ध रिकवरी के आदेश दिए गए हैं। इसी प्रकार इसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेहटा में भी 12 लाख 66 हजार 607 रुपये की लागत से 266 शौचालय बनने थे। लेकिन यहां पर भी 61 शौचालय बनाए ही नहीं गए।
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वहीं 205 शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। भ्रष्टाचार किए जाने को लेकर डीएम के निर्देश पर प्रधान व सचिव के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रिकवरी के आदेश दिए हैं। इसी प्रकार का एक मामला सूरतगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पतौंजा का आया है। यहां पर पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में 124 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए 14 लाख 88 हजार रुपये का बजट दिया गया था। लेकिन प्रधान व सचिव ने मिलकर 60 शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा कराया। आज भी 48 शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। वहीं 15 शौचालयों का निर्माण कार्य ही नहीं शुरू हुआ और बजट खर्च हो गया। सबसे बड़ा शौचालय घोटाला रामनगर ब्लॉक के कॉफ फत्तेउल्लाहपुर में हुआ है।
यहां पर 2011-12 में 2200 रुपये प्रति शौचालय की दर से 150 शौचालय बनने थे। लेकिन इस ग्राम पंचायत में मात्र तीन शौचालय बनाकर करीब तीन लाख 15 हजार रुपये का बंदरबांट कर लिया गया। उस समय यहां तैनात प्रधान व सचिव से रिकवरी कराने के लिए डीएम की ओर से रिकवरी के निर्देश दे दिए गए हैं। हरख ब्लॉक के इब्राहिमपुर गांव में भी पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में लगभग 100 शौचालय आठ लाख 4 हजार 79 रुपये की लागत से बनने थे, लेकिन राशि का बंदरबांट कर लिया गया। जांच में पोल खुलने के बाद डीएम ने रिकवरी के आदेश विभाग को दे दिए हैं।