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Barabanki News: 169 विद्यालयों में चलेगी मस्ती की बाल वाटिका
Tue, 08 Jul 2025 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:35 AM IST
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बाराबंकी। निजी स्कूलों की तर्ज पर जिले के 169 परिषदीय विद्यालयों में भी बच्चों के लिए मस्ती की बाल वाटिका चलेगी। इसमें तीन से छह साल तक के बच्चों को पढ़ाई के साथ ही खेल व रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए इन विद्यालयों में विशेष शिक्षकों की तैनाती भी होगी। यह वह विद्यालय होंगे जहां आंगनबाड़ी केंद्र अटैच हैं।
मस्ती की इस पाठशाला में सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि रंग, खेल के साथ उनकी सृजनात्मक शक्ति बढ़ाने की कवायद होगी। ताकि उनकी रचनात्मकता क्षमता निखर सके। इसके लिए चिह्नित विद्यालयों में ईसीसीई एजुकेटर (विशेष शिक्षक) तैनात किए जाने की चयन प्रक्रिया भी जल्दी शुरू होगी। जिले में 169 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जिनमें आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होते हैं।
50 से कम बच्चों वाले स्कूलों की पेयरिंग होने के चलते शासन स्तर पर गांव के विद्यालय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका के रूप में तब्दील करने का फैसला किया गया है। ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों को हाईटेक बनाकर बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को रोचक बनाया जा सके। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारी की देखरेख में गठित समिति इन एजुकेटर्स का चयन करेगी।
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चयनित शिक्षक खेल, कला, कहानियों और गतिविधियों के जरिए बच्चों की रचनात्मकता, भाषा कौशल और सामाजिक विकास पर काम करेंगे। इनकी तैनाती 11 माह के लिए अनुबंध के आधार पर होगी और इनका मानदेय 10313 रूपए प्रतिमाह होगा। इनका चयन विभाग की देखरेख में सेवा प्रदाता कंपनी करेगी।
स्नातक व प्रशिक्षित शिक्षक होंगे तैनात
मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से गृह विज्ञान विषय के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंकों से स्नातक हो। या फिर नर्सरी टीचर ट्रेनिंग या डीपीएसई का दो वर्ष का डिप्लोमा हो। इनकी अधिकतम आयु 1 जुलाई 2024 को 40 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
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ईसीसीई एजुकेटरों की जिम्मेदारी
- 3 से 6 साल के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार करना।
- बच्चों के मानसिक विकास के लिए रंग, ध्वनि, आकार, पेड़-पौधे, पक्षी, जानवर जैसी चीजों को पढ़ाई का हिस्सा बनाना।
- 5 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए निपुण भारत मिशन के तय अधिगम स्तर को प्राप्त कराना।
- खेल, नाटक, पिकनिक, क्षेत्र भ्रमण, संगीत और हस्तकला जैसी गतिविधियों को भी पढ़ाई में शामिल करना।
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मस्ती की इस पाठशाला में सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि रंग, खेल के साथ उनकी सृजनात्मक शक्ति बढ़ाने की कवायद होगी। ताकि उनकी रचनात्मकता क्षमता निखर सके। इसके लिए चिह्नित विद्यालयों में ईसीसीई एजुकेटर (विशेष शिक्षक) तैनात किए जाने की चयन प्रक्रिया भी जल्दी शुरू होगी। जिले में 169 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जिनमें आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होते हैं।
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50 से कम बच्चों वाले स्कूलों की पेयरिंग होने के चलते शासन स्तर पर गांव के विद्यालय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका के रूप में तब्दील करने का फैसला किया गया है। ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों को हाईटेक बनाकर बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को रोचक बनाया जा सके। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारी की देखरेख में गठित समिति इन एजुकेटर्स का चयन करेगी।
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चयनित शिक्षक खेल, कला, कहानियों और गतिविधियों के जरिए बच्चों की रचनात्मकता, भाषा कौशल और सामाजिक विकास पर काम करेंगे। इनकी तैनाती 11 माह के लिए अनुबंध के आधार पर होगी और इनका मानदेय 10313 रूपए प्रतिमाह होगा। इनका चयन विभाग की देखरेख में सेवा प्रदाता कंपनी करेगी।
स्नातक व प्रशिक्षित शिक्षक होंगे तैनात
मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से गृह विज्ञान विषय के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंकों से स्नातक हो। या फिर नर्सरी टीचर ट्रेनिंग या डीपीएसई का दो वर्ष का डिप्लोमा हो। इनकी अधिकतम आयु 1 जुलाई 2024 को 40 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
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ईसीसीई एजुकेटरों की जिम्मेदारी
- 3 से 6 साल के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार करना।
- बच्चों के मानसिक विकास के लिए रंग, ध्वनि, आकार, पेड़-पौधे, पक्षी, जानवर जैसी चीजों को पढ़ाई का हिस्सा बनाना।
- 5 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए निपुण भारत मिशन के तय अधिगम स्तर को प्राप्त कराना।
- खेल, नाटक, पिकनिक, क्षेत्र भ्रमण, संगीत और हस्तकला जैसी गतिविधियों को भी पढ़ाई में शामिल करना।