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घाघरा उफनाई, तराई में हड़कंप
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2015 10:50 PM IST
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घाघरा नदी के तेवर काफी तीखे हो गए हैं नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देख तराईवासियों में हड़कंप मच गया है। नदी का पानी सूरतगंज क्षेत्र के दो गांवों के निकट तक पहुंच गया है। तराई के लोगों का कहना है कि जिस तरह से नदी का पानी बढ़ रहा है। उससे टिकैतनगर क्षेत्र के पांच गांव फिर प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं नदी के बढ़ते जलस्तर को देख प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। चारों तहसीलों के एसडीएम को नदी के पानी पर बराबर नजर रखने के आदेश दिए गए हैं।
घाघरा नदी का पानी बुधवार की रात से बढ़ने लगा। बृहस्पतिवार को नदी का पानी खतरे का निशान 106.076 से बढ़कर 106.476 पर पहुंच गया है।
नदी का जलस्तर एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नदी के तेवर को देख तराई में हड़कंप मच गया है। वहीं सूरतगंज के बेहटा तमरसेपुर और कुरियन पुरवा के पास तक नदी का पानी पहुंच गया है। तराई के लोगों का कहना है की नदी का पानी जिस तरह से बढ़ रहा है यही हाल रहा तो टिकैतनगर क्षेत्र के पांच गांव फिर प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि हाल ही में इधर एक बांध बना दिया गया है। इसलिए पानी इतनी जल्दी नहीं आएगा, लेकिन फिर भी खतरा बना हुआ है। नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान को लेकर जो आशंका अभी तक जताई जा रही थी वह पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
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नदी के रूख को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा फतेहपुर, रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के अफसरोें को नदी के पानी पर बराबर नजर रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
कई गांवों पर बढ़ा खतरा
टिकैतनगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परसावल, मांझा रायपुर, नैपुरा, कमियार, बांसगांव और बंसतपुर पर खतरा बढ़ गया है। यदि नदी का पानी और बढ़ता है तो ये गांव एक बार फिर से प्रभावित हो सकते हैं। यहां के लोगों को भी प्रशासन ने सतर्क कर दिया है और कहा कि किसी भी समय गांव को खाली करना पड़ सकता है। हालांकि एलिग्न चरसडी तटबंध को एक और बंधा बना दिए जाने से यहां तक पानी पहुंचा इतना आसान नहीं रह गया है।
सतर्कता बरतने के निर्देश
घाघरा नदी का पानी बृहस्पतिवार को खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा चारों तहसीलों केे एसडीएम से नदी के पानी पर नजर रखने को कहा गया है।
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वहीं नदी के बढ़ते जलस्तर को देख प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। चारों तहसीलों के एसडीएम को नदी के पानी पर बराबर नजर रखने के आदेश दिए गए हैं।
घाघरा नदी का पानी बुधवार की रात से बढ़ने लगा। बृहस्पतिवार को नदी का पानी खतरे का निशान 106.076 से बढ़कर 106.476 पर पहुंच गया है।
नदी का जलस्तर एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नदी के तेवर को देख तराई में हड़कंप मच गया है। वहीं सूरतगंज के बेहटा तमरसेपुर और कुरियन पुरवा के पास तक नदी का पानी पहुंच गया है। तराई के लोगों का कहना है की नदी का पानी जिस तरह से बढ़ रहा है यही हाल रहा तो टिकैतनगर क्षेत्र के पांच गांव फिर प्रभावित हो सकते हैं।
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हालांकि हाल ही में इधर एक बांध बना दिया गया है। इसलिए पानी इतनी जल्दी नहीं आएगा, लेकिन फिर भी खतरा बना हुआ है। नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान को लेकर जो आशंका अभी तक जताई जा रही थी वह पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
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नदी के रूख को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा फतेहपुर, रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के अफसरोें को नदी के पानी पर बराबर नजर रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
कई गांवों पर बढ़ा खतरा
टिकैतनगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परसावल, मांझा रायपुर, नैपुरा, कमियार, बांसगांव और बंसतपुर पर खतरा बढ़ गया है। यदि नदी का पानी और बढ़ता है तो ये गांव एक बार फिर से प्रभावित हो सकते हैं। यहां के लोगों को भी प्रशासन ने सतर्क कर दिया है और कहा कि किसी भी समय गांव को खाली करना पड़ सकता है। हालांकि एलिग्न चरसडी तटबंध को एक और बंधा बना दिए जाने से यहां तक पानी पहुंचा इतना आसान नहीं रह गया है।
सतर्कता बरतने के निर्देश
घाघरा नदी का पानी बृहस्पतिवार को खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा चारों तहसीलों केे एसडीएम से नदी के पानी पर नजर रखने को कहा गया है।