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पांच दिन पहले बने शौचालय भरभरा कर गिरे
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:27 PM IST
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जिले के लोहिया ग्राम योजना का सच जानना हो तो हरख के इब्राहिमाबाद गांव को देखिए। यहां सिर्फ पीली ईंटों और बालू के सहारे विकास कार्यों को मजबूती दी जा रही है। गांव में निर्माण कार्यों में किस हद तक मनमानी हो रही इसका सुबूत है कि पांच दिन पहले बने आधा दर्जन शौचालय (प्रसाधन) बनने के दो दिन बाद ही भरभरा कर गिर गए। साथ ही यहां प्रसाधन के सेप्टिक टैंक लिए बाल्टीनुमा छोटे-छोटे गड्ढे खोद दिए गए हैं। सीसी रोड में पत्थर की बजाए पुरानी ईंटों का बोल्डर डालकर काम हो रहा है। इस गांव में युद्धस्तर पर काम इसलिए चल रहा है कि सचिव ग्राम्य विकास अगले सप्ताह यहां का निरीक्षण कर सकते हैं।
हरख ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत इब्राहिमाबाद में 18 मजरे शामिल हैं। इस ग्राम पंचायत का चयन डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के तहत 2015-16 में हुआ है। लोहिया ग्राम इब्राहिमाबाद में भुलभुलिया, सैदहा, धूरियापुरवा, पीरपुर, अलीपुर, मैकूपुरवा, हेतमापुर, कारदेवन, ठाकुरपुर, लालपुर सहित 18 मजरे हैं। यहां पर विभाग द्वारा करीब दो हजार प्रसाधनों का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन जो प्रसाधन बनाए जा रहे हैं वह बहुत ही घटिया हैं। प्रसाधन के निर्माण में सिर्फ पीली ईंट और बालू का प्रयोग हो रहा है। सीमेंट का इस्तेमाल में दाल में नमक की तरह हो रहा है।
इसका नतीजा ये है कि एक तरफ प्रसाधनों का निर्माण हो रहा है तो दूसरी तरफ वो भरभरा कर गिरते जा रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि शिकायतों के बाद भी अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे कार्य कराने वालों के हौसले खासे बुलंद हैं। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी का कहना है कि शासनादेश में पीली ईंट से प्रसाधन का निर्माण कराए जाने का आदेश है।
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हरख ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत इब्राहिमाबाद में 18 मजरे शामिल हैं। इस ग्राम पंचायत का चयन डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के तहत 2015-16 में हुआ है। लोहिया ग्राम इब्राहिमाबाद में भुलभुलिया, सैदहा, धूरियापुरवा, पीरपुर, अलीपुर, मैकूपुरवा, हेतमापुर, कारदेवन, ठाकुरपुर, लालपुर सहित 18 मजरे हैं। यहां पर विभाग द्वारा करीब दो हजार प्रसाधनों का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन जो प्रसाधन बनाए जा रहे हैं वह बहुत ही घटिया हैं। प्रसाधन के निर्माण में सिर्फ पीली ईंट और बालू का प्रयोग हो रहा है। सीमेंट का इस्तेमाल में दाल में नमक की तरह हो रहा है।
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इसका नतीजा ये है कि एक तरफ प्रसाधनों का निर्माण हो रहा है तो दूसरी तरफ वो भरभरा कर गिरते जा रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि शिकायतों के बाद भी अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे कार्य कराने वालों के हौसले खासे बुलंद हैं। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी का कहना है कि शासनादेश में पीली ईंट से प्रसाधन का निर्माण कराए जाने का आदेश है।
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