{"_id":"628152a6856d0c420a1f485c","slug":"farmers-are-not-coming-silence-at-purchasing-centers-barabanki-news-lko630762258","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं आ रहे किसान, क्रय केंद्रों पर सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं आ रहे किसान, क्रय केंद्रों पर सन्नाटा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। गांवों तक पहुंचना तो दूर, क्रय केंद्र प्रभारी किसानों से संपर्क तक नहीं साध रहे हैं। यहीं कारण है कि क्रय केंद्रों पर सन्नाटा प्रसरा हुआ है। किसान क्रय केंद्रों की ओर रुख तक नहीं कर रहे हैं जबकि प्रभारी पूरी तरह से मौज काट रहे हैं।
जिले में गेहूं खरीद के लिए 64 केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक महज 11 सौ एमटी ही गेहूं की खरीद की जा सकी है। आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारी गेहूं खरीद में जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शासन ने गांवों में जाकर मोबाइल क्रय केंद्रों के माध्यम से गेहूं खरीद के आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है।
जहां किसान क्रय केंद्रों की ओर रुख करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं, वहीं केंद्र प्रभारी भी किसानों की चौखट तक जाना उचित नहीं समझ रहे हैं। यही कारण है कि साधन सहकारी समिति बनीकोडर समेत कई गेहूं खरीद केंद्रों पर पिछले कई दिनों से पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।
विज्ञापन
हालांकि जिलाधिकारी से लेकर अपर जिलाधिकारी बराबर गेहूं खरीद को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं परंतु केंद्र प्रभारियों की मनमानी के कारण गेहूं खरीद को वह गति नहीं मिल पा रही है जिसकी अपेक्षा की जा रही है। प्रभारी केंद्रों पर आते हैं और कुछ देर रुकने के बाद नदारद हो जाते हैं। जानकारी करने पर बताया जाता है कि गांव गए हुए हैं जबकि हकीकत में वे किसानों से संपर्क करने की आड़ में पूरी तरह से मौज काट रहे हैं।
गेहूं खरीद आशा के अनुरूप न होने का प्रमुख कारण बाजार भाव अधिक होना भी बताया जा रहा है। शासन ने गेहूं का समर्थन मूल्य जहां 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है, वहीं किसानों को उनके दरवाजे से ही 2100 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं जबकि बाजार भाव अभी और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। यही कारण है कि किसान इस बार सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं लेकर जाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
गेहूं खरीद में तेजी लाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर जिले में मोबाइल क्रय केंद्र से गेहूं खरीद भी शुरू करा दी गई है। इस संबंध में सभी क्रय केंद्र प्रभारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाने पर ऐसे प्रभारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
विज्ञापन
जिले में गेहूं खरीद के लिए 64 केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक महज 11 सौ एमटी ही गेहूं की खरीद की जा सकी है। आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारी गेहूं खरीद में जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शासन ने गांवों में जाकर मोबाइल क्रय केंद्रों के माध्यम से गेहूं खरीद के आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
जहां किसान क्रय केंद्रों की ओर रुख करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं, वहीं केंद्र प्रभारी भी किसानों की चौखट तक जाना उचित नहीं समझ रहे हैं। यही कारण है कि साधन सहकारी समिति बनीकोडर समेत कई गेहूं खरीद केंद्रों पर पिछले कई दिनों से पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।
विज्ञापन
हालांकि जिलाधिकारी से लेकर अपर जिलाधिकारी बराबर गेहूं खरीद को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं परंतु केंद्र प्रभारियों की मनमानी के कारण गेहूं खरीद को वह गति नहीं मिल पा रही है जिसकी अपेक्षा की जा रही है। प्रभारी केंद्रों पर आते हैं और कुछ देर रुकने के बाद नदारद हो जाते हैं। जानकारी करने पर बताया जाता है कि गांव गए हुए हैं जबकि हकीकत में वे किसानों से संपर्क करने की आड़ में पूरी तरह से मौज काट रहे हैं।
गेहूं खरीद आशा के अनुरूप न होने का प्रमुख कारण बाजार भाव अधिक होना भी बताया जा रहा है। शासन ने गेहूं का समर्थन मूल्य जहां 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है, वहीं किसानों को उनके दरवाजे से ही 2100 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं जबकि बाजार भाव अभी और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। यही कारण है कि किसान इस बार सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं लेकर जाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
गेहूं खरीद में तेजी लाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर जिले में मोबाइल क्रय केंद्र से गेहूं खरीद भी शुरू करा दी गई है। इस संबंध में सभी क्रय केंद्र प्रभारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाने पर ऐसे प्रभारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी