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बेटे ने ही की थी मां की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 26 Aug 2016 11:39 PM IST
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असंद्रा थाना क्षेत्र के ग्राम पश्चिमी बेलाव में चार दिन पूर्व वृद्धा की धारदार हथियार से हत्या उसी के बेटे ने की थी। बृहस्पतिवार को पुलिस ने नयापुरा पुल के पास से सुबह उसको गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया हुआ बांका भी बरामद कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी बेटे ने सास का पैर काटने के मुकदमे में सुलह का दबाव बनाने को मां की हत्या कर वादियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। असंद्रा थाना क्षेत्र के पश्चिमी बेलाव में 23 अगस्त को घर में ही गुरदेई (65) पत्नी स्व. राम आधार रावत की हत्या का खुलासा शुक्रवार को एसपी राजू बाबू सिंह ने किया।
बताया कि गुरदेई के बेटे दिलीप कुमार पुत्र स्व. राम अधार ने की है। आरोपी हत्यारे को बृहस्पतिवार की सुबह क्षेत्र के नयापुरा पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजा गया है। पुलिस ने हत्या आरोपी की निशानदेही पर झाड़ियों में छिपाया बांका भी बरामद किया है।
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मुकदमा से छूटने के लिए मां को मारा
पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह ने बताया कि हत्या आरोपी दिलीप कुमार ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2010 में गांव की एक लड़की राजकुमारी से जबरन शादी कर ली थी। उसकी एक बेटी भी है। जिसकी देखभाल उसकी बहन मालती करती है। दिलीप शराब पीकर आने पर पत्नी राजकुमारी से अक्सर मारपीट करता। जिससे परेशान होकर उसकी पत्नी कहीं भाग गई।
दिलीप को शक हुआ कि उसके ससुराल वालों ने ही उसे भगाया है। इस पर दिलीप ने अपने साथी अमर सिंह निवासी पश्चिमी बेलाव के साथ मिल कर 7 जुलाई 2014 को सास प्रेमावती के दोनों पैर फावड़े से काट डाले। इस मामले में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दिलीप के साले सुहारी लाल रावत पुत्र छेदू रावत ने दर्ज कराई थी।
जिसके बाद दिलीप डेढ़ साल जेल में रहा। इसी मुकदमे में समझौता कराने को दबाव बनाने के लिए योजना बनाकर अपनी मां गुरदेई की हत्या की। दिलीप ने इस मामले में अपने साले सुहारीलाल व साले के मामा गुड्डू उर्फ हरिश्चंद्र पुत्र सालिकराम को नामजद किया।
इसके अलावा गुरदेई के नाम दस बिस्वां जमीन थी। जिसका बैनामा लखैचा के भगौती प्रसाद ने दिया था। इसका ढाई लाख रुपया मिलना बाकी था। मां की हत्या के बाद जमीन दिलीप के नाम आ जाती। इन दोनों कारणों से दिलीप ने अपनी मां की हत्या की।
सम्मानित की गई टीम
पश्चिम बेलाव में हुए इस हत्याकांड के खुलासे में बनाई टीम में छह लोग शामिल रहे। इसमें थानाध्यक्ष असंद्रा अरुण कुमार द्विवेदी, एसआई मदनलाल, कांस्टेबल कबीर अहमद, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, विमलेश यादव व विष्णु तिवारी शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह ने टीम को पांच हजार रुपये नगद देकर सम्मानित किया है।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी बेटे ने सास का पैर काटने के मुकदमे में सुलह का दबाव बनाने को मां की हत्या कर वादियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। असंद्रा थाना क्षेत्र के पश्चिमी बेलाव में 23 अगस्त को घर में ही गुरदेई (65) पत्नी स्व. राम आधार रावत की हत्या का खुलासा शुक्रवार को एसपी राजू बाबू सिंह ने किया।
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बताया कि गुरदेई के बेटे दिलीप कुमार पुत्र स्व. राम अधार ने की है। आरोपी हत्यारे को बृहस्पतिवार की सुबह क्षेत्र के नयापुरा पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजा गया है। पुलिस ने हत्या आरोपी की निशानदेही पर झाड़ियों में छिपाया बांका भी बरामद किया है।
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मुकदमा से छूटने के लिए मां को मारा
पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह ने बताया कि हत्या आरोपी दिलीप कुमार ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2010 में गांव की एक लड़की राजकुमारी से जबरन शादी कर ली थी। उसकी एक बेटी भी है। जिसकी देखभाल उसकी बहन मालती करती है। दिलीप शराब पीकर आने पर पत्नी राजकुमारी से अक्सर मारपीट करता। जिससे परेशान होकर उसकी पत्नी कहीं भाग गई।
दिलीप को शक हुआ कि उसके ससुराल वालों ने ही उसे भगाया है। इस पर दिलीप ने अपने साथी अमर सिंह निवासी पश्चिमी बेलाव के साथ मिल कर 7 जुलाई 2014 को सास प्रेमावती के दोनों पैर फावड़े से काट डाले। इस मामले में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दिलीप के साले सुहारी लाल रावत पुत्र छेदू रावत ने दर्ज कराई थी।
जिसके बाद दिलीप डेढ़ साल जेल में रहा। इसी मुकदमे में समझौता कराने को दबाव बनाने के लिए योजना बनाकर अपनी मां गुरदेई की हत्या की। दिलीप ने इस मामले में अपने साले सुहारीलाल व साले के मामा गुड्डू उर्फ हरिश्चंद्र पुत्र सालिकराम को नामजद किया।
इसके अलावा गुरदेई के नाम दस बिस्वां जमीन थी। जिसका बैनामा लखैचा के भगौती प्रसाद ने दिया था। इसका ढाई लाख रुपया मिलना बाकी था। मां की हत्या के बाद जमीन दिलीप के नाम आ जाती। इन दोनों कारणों से दिलीप ने अपनी मां की हत्या की।
सम्मानित की गई टीम
पश्चिम बेलाव में हुए इस हत्याकांड के खुलासे में बनाई टीम में छह लोग शामिल रहे। इसमें थानाध्यक्ष असंद्रा अरुण कुमार द्विवेदी, एसआई मदनलाल, कांस्टेबल कबीर अहमद, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, विमलेश यादव व विष्णु तिवारी शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह ने टीम को पांच हजार रुपये नगद देकर सम्मानित किया है।