{"_id":"125-87403","slug":"Barabanki-87403-125","type":"story","status":"publish","title_hn":"यादों का कारवां छोड़ गया देवा महोत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यादों का कारवां छोड़ गया देवा महोत्सव
Barabanki
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवा (बाराबंकी)। ...चंद दिनों में एक रिश्ता सा बन गया, लेकिन आज वो अलविदा कह गया। रंग-बिरंगी आतिशबाजी के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर चुका देवा महोत्सव यादों का कारवां छोड़ सोमवार को अलविदा कह गया। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस वार्षिक महोत्सव के आयोजन पर खुफिया व पुलिस की नजरें लगी रहीं। बांग्लादेश, नेपाल, मारीशस से आए जायरीन की उपस्थिति ने चार चांद लगा दिए। महोत्सव के आयोजन ने सूफी संत के कौमी एकता व आपसी भाई चारे के संदेश को यथार्थ कर दिखा दिया।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पावन तपोभूमि पर चलने वाले विख्यात देवा महोत्सव का अंतिम दिन सोमवार को परंपरागत ढंग से आतिशबाजी के बीच विधिवत समापन हुआ। महोत्सव में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने बड़ी अकीदत के साथ शिरकत कर बाबा को अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की। देवा मेला (महोत्सव) चरम की ओर अग्रसर हो ही रहा था कि हुदहुद के कहर से मेले में दुश्वारियां पसर गईं। बारिश से मेला प्रभावित रहा। लेकिन दो दिन बाद ही धूप ने मेले में रौनक वापस ला दी। बारिश से दुकानदारों व दूर दराज से आए जायरीन को दिक्कत हुई। इन बावजूद आस्था दुश्वारियों पर भारी दिखाई दी। दो दिन पूर्व जायरीन की इतनी भीड़ उमड़ी कि बीते वर्ष का रिकार्ड टूट गया। सांस्कृतिक पंडाल में हुआ एक बढ़कर एक कार्यक्रम यादों का कारवां छोड़ गया। बिरहा, आल्हा, सूफियाना कलाम, सीरतुन्नवी, लोकगीत, नृत्य, मानस कार्यक्रम, भजन, नाटक, भोजपुरी संध्या, गजल गायन, मुशायरा, कवि सम्मेलन, हंसराज हंस की सूफी नाइट, लोकनृत्य, सपना अवस्थी की म्यूजिकल नाइट, राजू श्रीवास्तव की मिमिक्री, हॉकी, वालीबाल, बैडमिंटन समेत लोगों को जागरूक करने वाली गोष्ठियों की भी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहा।
विज्ञापन
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पावन तपोभूमि पर चलने वाले विख्यात देवा महोत्सव का अंतिम दिन सोमवार को परंपरागत ढंग से आतिशबाजी के बीच विधिवत समापन हुआ। महोत्सव में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने बड़ी अकीदत के साथ शिरकत कर बाबा को अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की। देवा मेला (महोत्सव) चरम की ओर अग्रसर हो ही रहा था कि हुदहुद के कहर से मेले में दुश्वारियां पसर गईं। बारिश से मेला प्रभावित रहा। लेकिन दो दिन बाद ही धूप ने मेले में रौनक वापस ला दी। बारिश से दुकानदारों व दूर दराज से आए जायरीन को दिक्कत हुई। इन बावजूद आस्था दुश्वारियों पर भारी दिखाई दी। दो दिन पूर्व जायरीन की इतनी भीड़ उमड़ी कि बीते वर्ष का रिकार्ड टूट गया। सांस्कृतिक पंडाल में हुआ एक बढ़कर एक कार्यक्रम यादों का कारवां छोड़ गया। बिरहा, आल्हा, सूफियाना कलाम, सीरतुन्नवी, लोकगीत, नृत्य, मानस कार्यक्रम, भजन, नाटक, भोजपुरी संध्या, गजल गायन, मुशायरा, कवि सम्मेलन, हंसराज हंस की सूफी नाइट, लोकनृत्य, सपना अवस्थी की म्यूजिकल नाइट, राजू श्रीवास्तव की मिमिक्री, हॉकी, वालीबाल, बैडमिंटन समेत लोगों को जागरूक करने वाली गोष्ठियों की भी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहा।
विज्ञापन