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साहित्यकारों ने किया बुंदेलखंड का नाम रोशन
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बांदा। बुंदेलखंड का नाम रोशन करने में यहां के साहित्यकारों और लेखकों का महान योगदान है। यह हमेशा याद रखा जाएगा। यह बात केदार स्मृति न्यास और प्रगतिशील लेखक संघ के संयुक्त आयोजन में रविवार को आयोजित गोष्ठी में कही गई।
वरिष्ठ लेखिका छाया सिंह के कहानी संग्रह सांझी छत पर गोष्ठी में विशेष चर्चा हुई। छाया ने कहा कि अभी इसके और संग्रह भी आएंगे। यह प्रथम संग्रह है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर शोहरत मिली है। आनंद किशोर मंजुल ने कहा कि यह रचनाएं बुंदेलखंड का नाम स्थापित करने और महान साहित्यिक योगदान देने के लिए हमेशा याद रखी जाएगी।
गोष्ठी को डॉ. भानू प्रताप सिंह भानू, बनमाला सिंह चौहान, राहुल जैन, डॉ. भानू प्रताप भटनागर, सावित्री सिंह सिसौदिया, रजनी गुप्ता, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह आदि ने भी संबोधित करते हुए कहा कि छाया सिंह ने अपने अंदर अन्य जिम्मेदारियों के साथ कहानीकार को भी जिंदा रखा।
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केदार न्यास सचिव नरेंद्र पुंडरीक ने न्यास की ओर से आभार जताया। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने कहा कि छाया सिंह समकालीन प्रगतिशील कथा शिल्पियों में प्रशंसित हैं। गोष्ठी को प्रशांत चौहान और छाया के पुत्र प्रांजल ने भी संबोधित किया। संचालन आनंद देव लाल ने किया।
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वरिष्ठ लेखिका छाया सिंह के कहानी संग्रह सांझी छत पर गोष्ठी में विशेष चर्चा हुई। छाया ने कहा कि अभी इसके और संग्रह भी आएंगे। यह प्रथम संग्रह है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर शोहरत मिली है। आनंद किशोर मंजुल ने कहा कि यह रचनाएं बुंदेलखंड का नाम स्थापित करने और महान साहित्यिक योगदान देने के लिए हमेशा याद रखी जाएगी।
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गोष्ठी को डॉ. भानू प्रताप सिंह भानू, बनमाला सिंह चौहान, राहुल जैन, डॉ. भानू प्रताप भटनागर, सावित्री सिंह सिसौदिया, रजनी गुप्ता, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह आदि ने भी संबोधित करते हुए कहा कि छाया सिंह ने अपने अंदर अन्य जिम्मेदारियों के साथ कहानीकार को भी जिंदा रखा।
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केदार न्यास सचिव नरेंद्र पुंडरीक ने न्यास की ओर से आभार जताया। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने कहा कि छाया सिंह समकालीन प्रगतिशील कथा शिल्पियों में प्रशंसित हैं। गोष्ठी को प्रशांत चौहान और छाया के पुत्र प्रांजल ने भी संबोधित किया। संचालन आनंद देव लाल ने किया।