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गर्मी के साथ उपभोक्ताओं को पेयजल के लाले
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With the heat, the consumers crave for drinking water
- फोटो : BANDA
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नरैनी/बबेरू। गर्मी की प्रचंडता के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीण एक-एक बाल्टी पानी के लिए परेशान हैं। ग्राम पंचायत द्वारा 24 घंटे में भेजा जाने वाला एक टैंकर पानी आते ही खाली हो जाता है।
पानी का संकट नरैनी तहसील के पनगरा गांव में ज्यादा है। भीषण गर्मी में जल स्तर नीचे खिसक जाने से करोड़ों रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं दे पा रहा है। टैंक भरने के लिए लगे पांच बोरवेल भी शोपीस बनकर रह गए हैे। ऐसे में 20 हजार की आबादी में पानी में संकट गहरा गया है। ऊंचाई वाले हिस्सों में बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है।
उधर, ग्राम पंचायत द्वारा 24 घंटे में भेजा जाने वाला एक टैंकर पानी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। ग्राम प्रधान जगदीश प्रसाद यादव का कहना है कि पांच बोरवेल में दो ही चालू हैं। एक ने जल स्तर नीचे चले जाने से पानी देना बंद कर दिया।
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उधर, बबेरू में ग्रामीणों ने जल शक्ति राज्यमंत्री को तीन सूत्री ज्ञापन सौंपकर समस्याओं की मांग की है। बताया कि पेयजल आपूर्ति के लिए चार दशक पूर्व डाली की पानी की पाइप लाइन जर्जर हो गई है।
लीकेज होने से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। जल संस्थान जेई तैनाती स्थान पर न रहकर मुख्यालय में आवास बनाए हैं। सप्ताह में एक दो दिन ही आते हैं। ग्रामीणों ने बबेरू जल संस्थान को पुनर्गठन योजना में शामिल कराकर नई पाइप लाइन डलवाने व पंप हाउस के निर्माण की मांग की है।
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पानी का संकट नरैनी तहसील के पनगरा गांव में ज्यादा है। भीषण गर्मी में जल स्तर नीचे खिसक जाने से करोड़ों रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं दे पा रहा है। टैंक भरने के लिए लगे पांच बोरवेल भी शोपीस बनकर रह गए हैे। ऐसे में 20 हजार की आबादी में पानी में संकट गहरा गया है। ऊंचाई वाले हिस्सों में बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है।
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उधर, ग्राम पंचायत द्वारा 24 घंटे में भेजा जाने वाला एक टैंकर पानी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। ग्राम प्रधान जगदीश प्रसाद यादव का कहना है कि पांच बोरवेल में दो ही चालू हैं। एक ने जल स्तर नीचे चले जाने से पानी देना बंद कर दिया।
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उधर, बबेरू में ग्रामीणों ने जल शक्ति राज्यमंत्री को तीन सूत्री ज्ञापन सौंपकर समस्याओं की मांग की है। बताया कि पेयजल आपूर्ति के लिए चार दशक पूर्व डाली की पानी की पाइप लाइन जर्जर हो गई है।
लीकेज होने से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। जल संस्थान जेई तैनाती स्थान पर न रहकर मुख्यालय में आवास बनाए हैं। सप्ताह में एक दो दिन ही आते हैं। ग्रामीणों ने बबेरू जल संस्थान को पुनर्गठन योजना में शामिल कराकर नई पाइप लाइन डलवाने व पंप हाउस के निर्माण की मांग की है।