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बांदा: कौन बनेगा प्रशासक, पांच ब्लाकों में फंसा पेंच
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बांदा। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद जिले में यह पेंच फंसता नजर आ रहा है कि पांच ब्लाकों की ग्राम पंचायतों का प्रभार कौन संभालेगा? इन ब्लाकों में एडीओ (पंचायत) के पद खाली हैं। शासन ने गाइड लाइन जारी की है कि एडीओ से नीचे स्तर के किसी कर्मचारी को ग्राम पंचायत की कमान नहीं दी जाए। जिले में सिर्फ तीन विकास खंडों में ही एडीओ (पंचायत) तैनात हैं।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए पंचायत प्रतिनिधियों का निर्वाचन न होने तक गांवों में चल रहे विकास कार्य व अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रशासक की तैनाती की जानी है। चुनाव में अभी कई माह बाकी हैं। इस अवधि में ग्राम पंचायतों के सामान्य कार्यों के अलावा शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन नियुक्त किए गए प्रशासक के हाथ रहेगा।
जिले में आठ विकास खंड (ब्लाक) हैं। इनमें सिर्फ तीन ब्लाकों बबेरू, तिंदवारी और जसपुरा में ही स्थायी रूप से एडीओ (पंचायत) तैनात हैं। शेष पांच ब्लाकों महुआ, बड़ोखर खुर्द, नरैनी, बिसंडा और कमासिन में एडीओ की नियुक्ति न होने से यहां ग्राम पंचायत सचिव को इस पद का अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। वे प्रभारी एडीओ के रूप में काम कर रहे हैं। इनका मूल पद एडीओ से नीचे स्तर का है।
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उधर, इस बारे में अपर डीपीआरओ रमेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि शासन ने यह भी विकल्प दिया है कि एडीओ (पंचायत) से ऊपर के अधिकारी को ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाया जा सकता है। बताया कि इसका निर्णय डीएम लेंगे।
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ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए पंचायत प्रतिनिधियों का निर्वाचन न होने तक गांवों में चल रहे विकास कार्य व अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रशासक की तैनाती की जानी है। चुनाव में अभी कई माह बाकी हैं। इस अवधि में ग्राम पंचायतों के सामान्य कार्यों के अलावा शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन नियुक्त किए गए प्रशासक के हाथ रहेगा।
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जिले में आठ विकास खंड (ब्लाक) हैं। इनमें सिर्फ तीन ब्लाकों बबेरू, तिंदवारी और जसपुरा में ही स्थायी रूप से एडीओ (पंचायत) तैनात हैं। शेष पांच ब्लाकों महुआ, बड़ोखर खुर्द, नरैनी, बिसंडा और कमासिन में एडीओ की नियुक्ति न होने से यहां ग्राम पंचायत सचिव को इस पद का अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। वे प्रभारी एडीओ के रूप में काम कर रहे हैं। इनका मूल पद एडीओ से नीचे स्तर का है।
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उधर, इस बारे में अपर डीपीआरओ रमेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि शासन ने यह भी विकल्प दिया है कि एडीओ (पंचायत) से ऊपर के अधिकारी को ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाया जा सकता है। बताया कि इसका निर्णय डीएम लेंगे।