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Banda News: रात में कहां हुआ नितिन का इलाज...अब तक नहीं मिला जवाब
Sat, 22 Aug 2026 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 22 Aug 2026 11:25 PM IST
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फोटो-4-स्कूल का बंद गेट और लटका ताला। संवाद
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बांदा। झील का पुरवा स्थित निजी आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत के मामले में एक और गंभीर सवाल सामने आया है।
16 अगस्त की रात करीब एक बजे नितिन की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए ले जाया गया था लेकिन जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में रात के समय नितिन के उपचार की कोई इंट्री नहीं मिली। ऐसे में उसका इलाज कहां कराया गया, अब तक प्रबंधन ने अभिभावकों को इसका जवाब नहीं दिया है।
हादसे के बाद नितिन के परिजन जब विद्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद बच्चों ने उन्हें बताया कि 16 अगस्त की रात करीब एक बजे नितिन की हालत अचानक बिगड़ गई थी। उसे इलाज के लिए विद्यालय से बाहर ले जाया गया था। बच्चों के मुताबिक उपचार के बाद उसे वापस विद्यालय लाया गया। इसके बाद सुबह दोबारा उसकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया।
नितिन के परिजन के मुताबिक सुबह विद्यालय प्रबंधन की ओर से सूचना मिलने पर वे अस्पताल पहुंचे थे। वहां प्रबंधक ने उन्हें बताया था कि नितिन का रात में जिला अस्पताल में इलाज कराया गया था लेकिन परिजन को जिला अस्पताल में रात में नितिन के इलाज का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं दूसरे छात्र अरुण की अस्पताल में इंट्री सुबह करीब छह बजे हुई थी। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी।
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परिजन के अनुसार जिला अस्पताल के डॉक्टर ने भी रात में नितिन का उपचार किए जाने की जानकारी से इन्कार किया। अस्पताल के रिकॉर्ड में नितिन की पहली इंट्री सुबह करीब सात बजे की है, जब उसे मृत अवस्था में लाया गया था।
ऐसे में अब जांच में यह सवाल अहम हो गया है कि रात करीब एक बजे तबीयत बिगड़ने के बाद नितिन को आखिर कहां ले जाया गया था। क्या उसे किसी निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया था या कहीं और उसका उपचार कराया गया? यदि उपचार कराया गया तो उसका कोई पर्चा, दवा, बिल या अन्य रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
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रिकॉर्ड से सामने आएगा रात का सच
दो छात्रों की मौत के मामले की जांच में नितिन के रात के उपचार का ब्योरा अहम कड़ी साबित हो सकता है। विद्यालय प्रबंधन और कर्मचारियों से इस संबंध में पूछताछ होने के साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि रात में नितिन को कहां ले जाया गया और वहां उसका किस तरह उपचार हुआ। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड और विद्यालय प्रबंधन के दावे में अंतर ने मामले की जांच को और गंभीर बना दिया है।
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स्कूल के बंद दरवाजे पर दस्तक देकर लौट रही पुलिस की जांच
बांदा। झील का पुरवा स्थित आवासीय विद्यालय के दो बच्चों की मौत के बाद पुलिस की जांच शुरू हो गई है लेकिन जांच स्कूल के बंद दरवाजे पर दस्तक देकर लौट रही है।
पुलिस विद्यालय के प्रबंधक से किसी तरह से संपर्क स्थापित करने में लगी है। जिससे उन्हें सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर मिल सके। ताला नहीं खुलने पर पुलिस, मजिस्ट्रेट बुलाकर ताला तुड़वाने की प्रक्रिया भी करने की तैयारी में है।
शुक्रवार को मृतक छात्र नितिन और अरुण के परिजन ने डीएम अमित आसेरी से मिलकर प्रकरण की शिकायत की थी। डीएम ने तुरंत पुलिस को विद्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक करने और डीवीआर जब्त करने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर पुलिस टीम शुक्रवार की शाम झील का पुरवा स्थित विद्यालय पहुंची लेकिन यहां ताला बंद मिला। प्रबंधक को फोन मिलाया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था। ऐसे में टीम दरवाजे से लौट आई थी।
शनिवार की सुबह को पुलिस टीम फिर से विद्यालय पहुंची लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर विपिन यादव ने बताया की टीम दो बार जांच के लिए गई थी लेकिन विद्यालय बंद मिला। जिम्मेदारों से संपर्क करने का प्रयास जारी है। अगर ताला नहीं खुलता है तो फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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ताला बंद होने से अटकी है विभागों की जांच
आवासीय विद्यालय के खिलाफ शुरू हुई जांच में स्कूल का बंद दरवाजा बाधा बना हुआ है। अब तक डीआईओएस ने अपनी जांच पूरी की है जबकि बीएसए ने केवल मान्यता प्रत्याहरण का नोटिस दिया है।
विद्यालय के छह कमरों में कक्षा आठ तक के बच्चों को किस तरह से पढ़ाया और बैठाया जा रहा था। इसकी जांच होनी बाकी है। यह जांच भी अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नहीं की गई है। ताला बंद होने से अग्निशमन विभाग की जांच भी अधूरी है।
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अग्निशमन विभाग देगा नोटिस, जवाब नहीं तो कार्रवाई
दो छात्रों की मौत के बाद शुरू हुई जांच में अग्निशमन विभाग ने भी विद्यालय पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विद्यालय ने विभाग से इमारत संबंधी एनओसी प्राप्त नहीं की थी। यह रिपोर्ट तो विभाग ने डीएम को भेज दी है।
सीएफओ मतलूब हसन ने बताया कि विभाग की ओर संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। जवाब नहीं मिलने पर डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सोमवार को विद्यालय संचालक नोटिस दी जा सकती है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर मजिस्ट्रेट इमारत को सील करने की प्रक्रिया कर सकते हैं।
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घटना के पांचवें दिन मोमोज विक्रेता के घर पहुंची पुलिस और एफएसडीए टीम
बांदा। आवासीय विद्यालय में 16 अगस्त की रात को जिस मोमोज विक्रेता के यहां से खाद्य सामग्री स्कूल पहुंची थी। पुलिस व खाद्य विभाग की टीम शुक्रवार को उसके घर पहुंच गई।
पुलिस ने विक्रेता दंपती से पूछताछ की तो महिला ने 16 अगस्त की रात को मोमोज व फिंगर बिक्री करने की बात स्वीकार की। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से उसके यहां बनने वाले फास्ट फूड का सैंपल लिया गया।
घटना में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा था कि विद्यालय में मोमोज व फिंगर किस दुकान से आए थे। छात्रों ने बताया था कि महाराणा प्रताप चौक से यह सामान लाया गया था। हालांकि शुक्रवार को जब पुलिस जांच करते हुए झील का पुरवा निवासी डिल्ला के घर पहुंची तो यह बात साफ हो गई कि मोमोज चौक से नहीं लिया गया था।
पुलिस ने डिल्ला व उसकी पत्नी नौखी से बातचीत की तो नौखी ने बताया कि 16 अगस्त की रात उसी के यहां से मोमोज व फिंगर गए थे और वह घर पर ही दुकान लगाते हैं।
पुलिस की सूचना पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम भी पहुंची। टीम ने मोमोज व फिंगर बनाने में प्रयोग होने वाले रिफाइंड व आरारोट के नमूने लिए। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय जयप्रकाश तिवारी ने बताया कि घटना के बाद विद्यालय व फास्ट फूड की दुकानों से लिए गए सैंपल को दूसरे दिन प्रयोगशाला भेजा चुका है।
शुक्रवार को झील का पुरवा से लिए गए रिफाइंड व आरारोट का सैंपल भी तुरंत प्रयोगशाला भेज दिया गया है। इसके साथ ही अलग से पत्र लिखकर सैंपल की जांच रिपोर्ट देने का अनुरोध भी किया गया है। जिससे जल्द से जल्द सवालों का जवाब मिल सके।
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चिह्नित करने में लगा समय, रिजल्ट पर शंका
बांदा। मोमोज विक्रेता को चिह्नित करने में पुलिस ने करीब पांच दिन का समय लिया है। पांचवें दिन उसकी दुकान पर सैंपलिंग की गई है। जानकार मानते यह काम घटना के तुरंत बाद पुलिस को करना चाहिए था। चार दिन लिए गए सैंपल में कुछ भी निकले लेकिन घटना के तुरंत बाद लिए गए नमूने ज्यादा विश्वसनीय होते।
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16 अगस्त की रात करीब एक बजे नितिन की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए ले जाया गया था लेकिन जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में रात के समय नितिन के उपचार की कोई इंट्री नहीं मिली। ऐसे में उसका इलाज कहां कराया गया, अब तक प्रबंधन ने अभिभावकों को इसका जवाब नहीं दिया है।
हादसे के बाद नितिन के परिजन जब विद्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद बच्चों ने उन्हें बताया कि 16 अगस्त की रात करीब एक बजे नितिन की हालत अचानक बिगड़ गई थी। उसे इलाज के लिए विद्यालय से बाहर ले जाया गया था। बच्चों के मुताबिक उपचार के बाद उसे वापस विद्यालय लाया गया। इसके बाद सुबह दोबारा उसकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया।
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नितिन के परिजन के मुताबिक सुबह विद्यालय प्रबंधन की ओर से सूचना मिलने पर वे अस्पताल पहुंचे थे। वहां प्रबंधक ने उन्हें बताया था कि नितिन का रात में जिला अस्पताल में इलाज कराया गया था लेकिन परिजन को जिला अस्पताल में रात में नितिन के इलाज का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं दूसरे छात्र अरुण की अस्पताल में इंट्री सुबह करीब छह बजे हुई थी। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी।
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परिजन के अनुसार जिला अस्पताल के डॉक्टर ने भी रात में नितिन का उपचार किए जाने की जानकारी से इन्कार किया। अस्पताल के रिकॉर्ड में नितिन की पहली इंट्री सुबह करीब सात बजे की है, जब उसे मृत अवस्था में लाया गया था।
ऐसे में अब जांच में यह सवाल अहम हो गया है कि रात करीब एक बजे तबीयत बिगड़ने के बाद नितिन को आखिर कहां ले जाया गया था। क्या उसे किसी निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया था या कहीं और उसका उपचार कराया गया? यदि उपचार कराया गया तो उसका कोई पर्चा, दवा, बिल या अन्य रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
रिकॉर्ड से सामने आएगा रात का सच
दो छात्रों की मौत के मामले की जांच में नितिन के रात के उपचार का ब्योरा अहम कड़ी साबित हो सकता है। विद्यालय प्रबंधन और कर्मचारियों से इस संबंध में पूछताछ होने के साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि रात में नितिन को कहां ले जाया गया और वहां उसका किस तरह उपचार हुआ। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड और विद्यालय प्रबंधन के दावे में अंतर ने मामले की जांच को और गंभीर बना दिया है।
स्कूल के बंद दरवाजे पर दस्तक देकर लौट रही पुलिस की जांच
बांदा। झील का पुरवा स्थित आवासीय विद्यालय के दो बच्चों की मौत के बाद पुलिस की जांच शुरू हो गई है लेकिन जांच स्कूल के बंद दरवाजे पर दस्तक देकर लौट रही है।
पुलिस विद्यालय के प्रबंधक से किसी तरह से संपर्क स्थापित करने में लगी है। जिससे उन्हें सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर मिल सके। ताला नहीं खुलने पर पुलिस, मजिस्ट्रेट बुलाकर ताला तुड़वाने की प्रक्रिया भी करने की तैयारी में है।
शुक्रवार को मृतक छात्र नितिन और अरुण के परिजन ने डीएम अमित आसेरी से मिलकर प्रकरण की शिकायत की थी। डीएम ने तुरंत पुलिस को विद्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक करने और डीवीआर जब्त करने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर पुलिस टीम शुक्रवार की शाम झील का पुरवा स्थित विद्यालय पहुंची लेकिन यहां ताला बंद मिला। प्रबंधक को फोन मिलाया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था। ऐसे में टीम दरवाजे से लौट आई थी।
शनिवार की सुबह को पुलिस टीम फिर से विद्यालय पहुंची लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर विपिन यादव ने बताया की टीम दो बार जांच के लिए गई थी लेकिन विद्यालय बंद मिला। जिम्मेदारों से संपर्क करने का प्रयास जारी है। अगर ताला नहीं खुलता है तो फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ताला बंद होने से अटकी है विभागों की जांच
आवासीय विद्यालय के खिलाफ शुरू हुई जांच में स्कूल का बंद दरवाजा बाधा बना हुआ है। अब तक डीआईओएस ने अपनी जांच पूरी की है जबकि बीएसए ने केवल मान्यता प्रत्याहरण का नोटिस दिया है।
विद्यालय के छह कमरों में कक्षा आठ तक के बच्चों को किस तरह से पढ़ाया और बैठाया जा रहा था। इसकी जांच होनी बाकी है। यह जांच भी अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नहीं की गई है। ताला बंद होने से अग्निशमन विभाग की जांच भी अधूरी है।
अग्निशमन विभाग देगा नोटिस, जवाब नहीं तो कार्रवाई
दो छात्रों की मौत के बाद शुरू हुई जांच में अग्निशमन विभाग ने भी विद्यालय पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विद्यालय ने विभाग से इमारत संबंधी एनओसी प्राप्त नहीं की थी। यह रिपोर्ट तो विभाग ने डीएम को भेज दी है।
सीएफओ मतलूब हसन ने बताया कि विभाग की ओर संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। जवाब नहीं मिलने पर डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सोमवार को विद्यालय संचालक नोटिस दी जा सकती है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर मजिस्ट्रेट इमारत को सील करने की प्रक्रिया कर सकते हैं।
घटना के पांचवें दिन मोमोज विक्रेता के घर पहुंची पुलिस और एफएसडीए टीम
बांदा। आवासीय विद्यालय में 16 अगस्त की रात को जिस मोमोज विक्रेता के यहां से खाद्य सामग्री स्कूल पहुंची थी। पुलिस व खाद्य विभाग की टीम शुक्रवार को उसके घर पहुंच गई।
पुलिस ने विक्रेता दंपती से पूछताछ की तो महिला ने 16 अगस्त की रात को मोमोज व फिंगर बिक्री करने की बात स्वीकार की। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से उसके यहां बनने वाले फास्ट फूड का सैंपल लिया गया।
घटना में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा था कि विद्यालय में मोमोज व फिंगर किस दुकान से आए थे। छात्रों ने बताया था कि महाराणा प्रताप चौक से यह सामान लाया गया था। हालांकि शुक्रवार को जब पुलिस जांच करते हुए झील का पुरवा निवासी डिल्ला के घर पहुंची तो यह बात साफ हो गई कि मोमोज चौक से नहीं लिया गया था।
पुलिस ने डिल्ला व उसकी पत्नी नौखी से बातचीत की तो नौखी ने बताया कि 16 अगस्त की रात उसी के यहां से मोमोज व फिंगर गए थे और वह घर पर ही दुकान लगाते हैं।
पुलिस की सूचना पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम भी पहुंची। टीम ने मोमोज व फिंगर बनाने में प्रयोग होने वाले रिफाइंड व आरारोट के नमूने लिए। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय जयप्रकाश तिवारी ने बताया कि घटना के बाद विद्यालय व फास्ट फूड की दुकानों से लिए गए सैंपल को दूसरे दिन प्रयोगशाला भेजा चुका है।
शुक्रवार को झील का पुरवा से लिए गए रिफाइंड व आरारोट का सैंपल भी तुरंत प्रयोगशाला भेज दिया गया है। इसके साथ ही अलग से पत्र लिखकर सैंपल की जांच रिपोर्ट देने का अनुरोध भी किया गया है। जिससे जल्द से जल्द सवालों का जवाब मिल सके।
चिह्नित करने में लगा समय, रिजल्ट पर शंका
बांदा। मोमोज विक्रेता को चिह्नित करने में पुलिस ने करीब पांच दिन का समय लिया है। पांचवें दिन उसकी दुकान पर सैंपलिंग की गई है। जानकार मानते यह काम घटना के तुरंत बाद पुलिस को करना चाहिए था। चार दिन लिए गए सैंपल में कुछ भी निकले लेकिन घटना के तुरंत बाद लिए गए नमूने ज्यादा विश्वसनीय होते।
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