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लाडलों के शव देख परिजन रोए तो हर आंख रोई

Tue, 28 Sep 2021 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 11:54 PM IST
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When the family cried seeing the dead bodies of the lads, every eye cried
खत्री पहाड़/गिरवां। गांव में एक साथ एक ही परिवार के तीन बच्चों की मंगलवार को मौत के बाद जहां मातम पसरा हुआ है, वहीं हर आंख नम है। कल तक गांव की गलियों, स्कूल और खेतों में एक दूसरे से हंस-खेलकर बतियाते तीनों के एक साथ इस दुनिया से विदा होने का अहसास किसी को नहीं था, लेकिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था।
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जैसे ही तीनों के शव नदी किनारे लाए गए, उनके परिजन लिपट-लिपट कर जमकर रोए। परिजनों को रोता देखकर हर आंख नम हो गई। गिरवां थाना क्षेत्र के कोलावल रायपुर गांव में स्थित केन नदी में डूबकर मरने वाले सीता, उमेश और सूरज उर्फ छोटू एक ही परिवार के थे।
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एक ही गांव से तीन बच्चों की मौत के बाद महालक्ष्मी पर्व की खुशियां पूरे गांव में मातम में बदल गईं। जैसे-जैसे बच्चों के शव नदी से बाहर लाए गए घाट पर मौजूद परिजनों के करुण क्रंदन की गूंज से माहौल बेहद गमगीन हो गया।
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परिजनों के शवों से लिपटकर बिलखता देख ग्रामीण भी भावुक हो गए। नदी में नहा रहे अन्य महिलाओं के मुताबिक, सबसे पहले उमेश गहरे पानी में डूबने लगा। उसे बचाने की कोशिश में सीता भी गहरे पानी में समाने लगी।
सीता को पकड़ने की कोशिश में सूरज भी डूब गया। तीनों बच्चों के नदी में डूबता देखकर चीख-पुकार शुरू हुई और लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास शुरू कर दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
एक-एक कर तीनों बच्चे गहरे पानी में समा गए। कोई जीवित नहीं बच सका। बाबूराम यादव ने बताया कि उसके नाम मात्र साढ़े चार बीघा जमीन है। खेतीबाड़ी और मनरेगा मजदूरी करके परिवार पाल रहा है। उसके तीन बच्चों में अब मात्र बड़ा बेटा इंटू बचा है।
दोनों बच्चों की जान जाने से वह और पूरा परिवार सदमे में है। मां कामिनी बेसुध है। होश आने पर अपने दोनों बच्चों को याद करती और फिर बेहोश हो जाती है। बताया कि तीसरा मृत बच्चा सूरज उसके छोटे भाई रामफल का पुत्र है।
उधर, रामफल ने बताया कि उसके तीन बेटों में सबसे छोटा सूरज उर्फ छोटू घर का दुलारा था। अपनी मां के बिना नहीं रहता था। महालक्ष्मी पर्व पर मां ऊषा के नदी जाने पर वह भी साथ चला गया। दो बेटे अर्पित और अमित मां के साथ नदी नहीं गए थे, वरना पूरा परिवार ही उजड़ जाता।
टीचर बनने का सपना पानी में मिल गया
खत्रीपहाड़/गिरवां। मृत उमेश और उसकी बहन सीता दोनों पढ़ाई में बहुत होशियार थे। जूनियर हाईस्कूल, खानपुर में उमेश कक्षा सात और सीता कक्षा छह में पढ़ती थी। दोनों की तमन्ना टीचर बनने की थी, लेकिन उनका सपना पानी में मिल गया।
दादी तुलसा ने रोते हुए बताया कि सीता अपने ननिहाल बिलगांव गांव में थी। तीन दिन पहले ही पिता उसे लेकर आए थे। सीता जिद कर रही थी कि वह नहीं जाएगी, क्योंकि स्कूल खुल गए हैं और पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं उमेश का चचेरा भाई सूरज उर्फ छोटू प्राथमिक विद्यालय, बरियारी में तीसरी कक्षा में पढ़ता था।

सपा नेताओं ने ढांढस बंधाया
बांदा। सपा नेताओं ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। पूर्व महासचिव राजेंद्र यादव ने बताया कि परिजनों को आर्थिक मदद दिलाने की कोशिश की जाएगी।
कहा कि इस बाबत प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की जाएगी। इस अवसर पर शिवकरन पाल, अवध बिहारी, राममूरत यादव, राजाराम आदि मौजूद रहे।
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