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Banda News: खा गए गच्चा, सस्ता बिक रहा बासमती धान
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बांदा। बुंदेलखंड में किसान धान लगाने में गच्चा खा गया। अच्छे दाम के लिए बासमती, परसन, चिन्नावर (पतला) धान लगाया। धान मंडी लेकर पहुंचे तो दाम सुनकर होश उड़ गए। आढ़ती तीन हजार रुपये क्विंटल से अधिक में धान खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि सरकारी धान क्रय केंद्रों पर मोटा धान 2300 रुपये क्विंटल खरीदा जा रहा है।
चित्रकूटधाम मंडल में सर्वाधिक धान का उत्पादन बांदा व चित्रकूट जिले में होता है। महोबा व हमीरपुर में धान कम लगाया जाता है। मंडल के चारों जनपदों में इस वर्ष 64, 252 हेक्टेयर में धान लगाया गया। पिछले वर्ष अच्छे दाम मिले तो इस वर्ष करीब 20 हजार हेक्टेयर में किसानों ने बासमती, परसन, चिन्नावर धान लगाया, लेकिन इस वर्ष ऊपर से मांग न होने से मंडियों में पतले धान की कीमतें काफी गिर गई हैं। परसन, बासमती जैसे धान को आढ़ती तीन हजार रुपये क्विंटल से ज्यादा में नहीं खरीद रहे हैं। चिन्नावर आदि पतले धान के दाम तो एमएसपी से ज्यादा नहीं मिल रहे। ऐसे में किसान खासा परेशान है। शादी, बीमारी आदि के चलते वह औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर है। किसानों का कहना है कि सरकार को मोटे चावल की तरह पतले सुगंधित धान की भी अलग से एमएसपी तय कर उसकी खरीद करनी चाहिए।
चार्ट
मंडल में धान की खेती (हेक्टेयर में)
जनपद सामान्य सुगंधित
हमीरपुर 1200 145
महोबा 100 91
बांदा 35501 17000
चित्रकूट 8115 2100
योग 49916 19336
कम दाम पर बेचना पड़ रहा धान
मदन भाई पटेल का कहना है कि मंडी में पतले धान के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर धान बेच रहा है। आढ़ती किसानों को 6-आर भी नहीं दे रहे हैं।
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पिछले साल पांच हजार रुपये क्विंटल बिका था धान
रामचंद्र सरस का कहना है कि पिछले वर्ष बासमती धान 1121 व 1718 पांच हजार रुपये क्विंटल बिक रहा था। इस वर्ष आढ़तिया तीन हजार का क्विंटल देने को तैयार नहीं है।
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विदेश नहीं जा रहा चावल
गल्ला व्यापारी विष्णु गुप्ता का कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध है। इजराइल, यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से चावल विदेश नहीं जा पा रहा है। जिससे वह सस्ता है।
अधिक धान आने पर घटा देते हैं दाम
मंडी सचिव प्रदीप रंजन का कहना है कि सुगंधित चावल अधिक आने से मिलर्स रेट घटा देते है। 2300 एमएसपी पर धान की सरकारी खरीद हो रही है। किसान खाने के अतिरिक्त मोटा धान लगाए।
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चित्रकूटधाम मंडल में सर्वाधिक धान का उत्पादन बांदा व चित्रकूट जिले में होता है। महोबा व हमीरपुर में धान कम लगाया जाता है। मंडल के चारों जनपदों में इस वर्ष 64, 252 हेक्टेयर में धान लगाया गया। पिछले वर्ष अच्छे दाम मिले तो इस वर्ष करीब 20 हजार हेक्टेयर में किसानों ने बासमती, परसन, चिन्नावर धान लगाया, लेकिन इस वर्ष ऊपर से मांग न होने से मंडियों में पतले धान की कीमतें काफी गिर गई हैं। परसन, बासमती जैसे धान को आढ़ती तीन हजार रुपये क्विंटल से ज्यादा में नहीं खरीद रहे हैं। चिन्नावर आदि पतले धान के दाम तो एमएसपी से ज्यादा नहीं मिल रहे। ऐसे में किसान खासा परेशान है। शादी, बीमारी आदि के चलते वह औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर है। किसानों का कहना है कि सरकार को मोटे चावल की तरह पतले सुगंधित धान की भी अलग से एमएसपी तय कर उसकी खरीद करनी चाहिए।
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मंडल में धान की खेती (हेक्टेयर में)
जनपद सामान्य सुगंधित
हमीरपुर 1200 145
महोबा 100 91
बांदा 35501 17000
चित्रकूट 8115 2100
योग 49916 19336
कम दाम पर बेचना पड़ रहा धान
मदन भाई पटेल का कहना है कि मंडी में पतले धान के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर धान बेच रहा है। आढ़ती किसानों को 6-आर भी नहीं दे रहे हैं।
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पिछले साल पांच हजार रुपये क्विंटल बिका था धान
रामचंद्र सरस का कहना है कि पिछले वर्ष बासमती धान 1121 व 1718 पांच हजार रुपये क्विंटल बिक रहा था। इस वर्ष आढ़तिया तीन हजार का क्विंटल देने को तैयार नहीं है।
विदेश नहीं जा रहा चावल
गल्ला व्यापारी विष्णु गुप्ता का कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध है। इजराइल, यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से चावल विदेश नहीं जा पा रहा है। जिससे वह सस्ता है।
अधिक धान आने पर घटा देते हैं दाम
मंडी सचिव प्रदीप रंजन का कहना है कि सुगंधित चावल अधिक आने से मिलर्स रेट घटा देते है। 2300 एमएसपी पर धान की सरकारी खरीद हो रही है। किसान खाने के अतिरिक्त मोटा धान लगाए।