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Banda News: टेंट के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीण
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फोटो -2- गांव पड़ोहरा का श्मशान घाट और क्षतिग्रस्त टीन की चादरें। संवाद
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फोटो -2- गांव पड़ोहरा का श्मशान घाट और क्षतिग्रस्त टिन की चादरें। संवाद
- दो माह पहले आए तूफान में उड़ गई थीं श्मशान स्थल की चादरें
संवाद न्यूज एजेंसी
पैलानी। तहसील क्षेत्र के गांव पड़ोहरा में श्मशान घाट की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। बीते दिनों आए तूफान में श्मशान स्थल पर लगी टीन की चादरें ध्वस्त हो गईं। इसके बाद से बारिश के बीच ग्रामीण टेंट लगाकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।
हाल ही में पड़ोहरा निवासी सुनील (22) की गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई। अंतिम संस्कार के दौरान परिजन और ग्रामीणों को जर्जर स्थल पर बिखरी टिन की चादरों के बीच टेंट लगाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर चंद्रावल नदी की बाढ़ का पानी और दूसरी ओर लगातार बारिश के बीच अंतिम संस्कार करना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीण रामबहादुर, सुनील सिंह, चंद्रपाल निषाद, महादेव निषाद, रामभवन पाल, बदलू पाल और शंकर निषाद ने बताया कि नांदादेव-पड़ोहरा रपटा क्षतिग्रस्त होने के दौरान गांव पहुंचे जिलाधिकारी को भी श्मशान घाट की समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में श्मशान स्थल पर पानी और कीचड़ भर जाने से अंतिम संस्कार में दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र पक्का श्मशान घाट बनवाने और क्षतिग्रस्त टिनशेड की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
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- दो माह पहले आए तूफान में उड़ गई थीं श्मशान स्थल की चादरें
संवाद न्यूज एजेंसी
पैलानी। तहसील क्षेत्र के गांव पड़ोहरा में श्मशान घाट की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। बीते दिनों आए तूफान में श्मशान स्थल पर लगी टीन की चादरें ध्वस्त हो गईं। इसके बाद से बारिश के बीच ग्रामीण टेंट लगाकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।
हाल ही में पड़ोहरा निवासी सुनील (22) की गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई। अंतिम संस्कार के दौरान परिजन और ग्रामीणों को जर्जर स्थल पर बिखरी टिन की चादरों के बीच टेंट लगाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर चंद्रावल नदी की बाढ़ का पानी और दूसरी ओर लगातार बारिश के बीच अंतिम संस्कार करना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीण रामबहादुर, सुनील सिंह, चंद्रपाल निषाद, महादेव निषाद, रामभवन पाल, बदलू पाल और शंकर निषाद ने बताया कि नांदादेव-पड़ोहरा रपटा क्षतिग्रस्त होने के दौरान गांव पहुंचे जिलाधिकारी को भी श्मशान घाट की समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में श्मशान स्थल पर पानी और कीचड़ भर जाने से अंतिम संस्कार में दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र पक्का श्मशान घाट बनवाने और क्षतिग्रस्त टिनशेड की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
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