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खेत में लहलहाई हरी खाद की फसल

Tue, 13 Apr 2021 06:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 13 Apr 2021 06:19 PM IST
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village,former,water,SDM,crops
village,former,water,SDM,crops - फोटो : BANDA
बांदा। बोरियों में भरी खाद बाहर से लाकर डालने के बजाए खेत में ही खाद की फसल भी लहलहाएगी, साथ ही बंजर खेत भी उपजाऊ बनेंगे। बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान असलम ने अपने खेत में हरी खाद की फसल लहलहा कर बुंदेली किसानों को राह दिखाई है। कहा कि सरल व सहज तरीकों और कम लागत से हरी खाद की खेती करके पैदावार बढ़ाई जा सकती है।
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खेती किसानी में कु छ न कुछ नया करते चले आ रहे बुंदेलखंड जैविक खेती फार्म संचालक मोहम्मद असलम ने यहां छनेहरा लालपुर गांव में स्थित अपने कृषि फार्म के बड़े क्षेत्रफल को खाद की फसल से लहलहा दिया है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद और अन्य जहरीले रसायनों के इस्तेमाल से खेती बर्बाद हो रही है। भूमि में आर्गेनिक कार्बन, मित्र सूक्ष्म जीव, मित्र फंगस और जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। गोबर की कई तरह की खादों और अन्य जैविक खादों का प्रयोग लगभग न के बराबर हो रहा है। या बिल्कुल बंद कर दिया गया है। किसान असलम ने बताया कि गेहूं की फसल काटने के बाद अप्रैल से मई माह में पानी की व्यवस्था वाले खेतों में और बारिश के भरोसे खेती वाले क्षेत्रों में मानसून आने पर हरी खाद की बुआई की जा सकती है।
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बताया कि हरी खाद के लिए तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसलें ढेंचा, सनई, लोबिया, ग्वार, मूंग, उर्द आदि की बुआई की जा सकती है। अपने अनुभव का हवाला देकर बताया कि हरी खाद के लिए ढेंचा व सनई सबसे ज्यादा मुफीद है। ढेंचा अंकुरित होने के बाद पानी की कमी या सूखा सह लेती है। बारिश में अधिक पानी भराव को भी सहन कर लेता है। हरी खाद की बुआई के बाद 45 से 55 दिनों में फूल आने से पहले लोहा हल, डिस्क हेरो या रोटावेटर से खेत की मिट्टी पलट दी जाती है। बशर्ते इस समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए, ताकि हरी खाद शीघ्र डिकंपोस्ज (निस्तारित) हो जाए। खाद पलटते समय खेत में घन जीवामृत, वेस्ट डिकॉम्पोजर या सरसों की खली का इस्तेमाल करने पर हरी खाद की फसल जल्दी मिट्टी में मिल जाती है।
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हरी खाद से मिट्टी की संरचना में सुधार
प्रगतिशील किसान असलम बताते हैं कि हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की भौतिक व रासायनिक संरचना में बहुत सुधार होता है। भूमि में देसी केंचुओं की वृद्धि होती है। फसलों के लिए जरूरी सभी मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्व, आर्गेनिक कार्बन, विटामिन, मित्र बैक्टीरिया आदि भी बढ़ जाते हैं। भूमि में नाइट्रोजन भंडारण होता है। इससे भूमि उपजाऊ होती है।
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