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बुंदेलखंड में 8163 एमटी मिड डे मील का घपला

Sun, 12 Jan 2020 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 11:51 PM IST
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मिड-डे मील में 8163 मीट्रिक टन राशन का घपला
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बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, जालौन और ललितपुर में बच्चों तक नहीं पहुंचा राशन
नियंत्रक महालेखा परीक्षक के आडिट में हुआ खुलासा, मिड-डे मील प्राधिकरण ने राशन वसूलने के दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बुंदेलखंड के पांच जिलों में मिड-डे मील का 8163 मीट्रिक टन राशन बच्चों तक नहीं पहुंचा। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के आडिट में यह पोल खुली। आडिट के बाद मिड-डे मील प्राधिकरण ने पांचों जिलों के डीएम को निर्देश दिए हैं कि संबंधित ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संस्थाओं से यह राशन वसूला जाए। प्राधिकरण ने 15 जनवरी तक इसकी रिपोर्ट मांगी है।
आडिट में यह खुलासा हुआ कि बुंदेलखंड के पांच जिलों बांदा, चित्रकूट, महोबा, जालौन और ललितपुर में वर्ष 2005 से 2010 तक कुल 9041.44 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित हुआ था, लेकिन इसमें 8163 मीट्रिक टन राशन बच्चों तक नहीं पहुंचा। जिला स्तर पर कुल 868 मीट्रिक टन राशन का ही समायोजन किया गया है। शेष राशन का कोई हिसाब किताब नहीं है। महालेखा परीक्षक ने मध्यांह भोजन प्राधिकरण को यह राशन वसूलने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण निदेशक विजय किरन आनंद ने पांचों जिलों के जिलाधिकारियों को भेज पत्र में कहा है कि संबंधित ग्राम पंचायतों व स्वयंसेवी संस्थाओं से यह राशन वसूल कर 15 जनवरी तक प्राधिकरण को रिपोर्ट दी जाए, ताकि 27 जनवरी को भारत लेखा समिति की बैठक में इसकी जानकारी दी जा सके। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए।
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इनसेट...
मिड-डे मील का जनपदवार आंवटन और अवशेष वितरण (मीट्रिक टन में)-
जिला आवंटन वितरण अवशेष
बांदा 4384.90 00 4384.90
चित्रकूट 90.59 00 90.59
जालौन 2959.93 709.07 2241.86
ललितपुर 277.24 73.32 203.92
महोबा 1328.78 86.32 1242.46
योग 9041.44 868.71 8163.73
इनसेट...
दो अफसरों ने अलग-अलग दी सफाई
बच्चों तक नहीं पहुंचे मिड-डे मील राशन को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारी अपनी अलग-अलग सफाई दे रहे हैं। चित्रकूटधाम मंडल के अपर निदेशक (बेसिक) जीएस राजपूत का कहना है कि मामला 2005 से 2010 के बीच का है। पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू कराई जाएगी। उधर, एमडीएम के जिला समन्वयक अश्वनी कुमार भास्कर का कहना है कि पूर्व में भेजी गई रिपोर्ट में गलती हो जाने से अवशेष खाद्यान्न निकल रहा है। आंकड़ों को दुरूस्त कर रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी जाएगी।
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