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यूपी: बांदा में गायें जिंदा दफनाने पर गोसेवकों का गुस्सा फूटा, सड़क पर लगाया जाम, धरना, प्रदर्शन और हंगामा किया
Wed, 08 Dec 2021 12:52 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 08 Dec 2021 12:52 AM IST
सार
यूपी के बांदा जिले में मिट्टी और भारी-भरकम पत्थरों में जिंदा गायों को दफन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया। मंगलवार को विधायक सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों ने इसका विरोध कर कार्रवाई की मांग की।
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बांदा: नरैनी में मुख्य सड़क पर जाम लगाए गो रक्षक
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
अन्ना गायों को सीमावर्ती मध्य प्रदेश की घाटी के जंगल में छोड़ने और कई गायों को जिंदा दफन कर देने का मुद्दा मंगलवार को आंदोलन के रूप में सामने आया। जिले के गोसेवकों ने यहां पूरा दिन विरोध, प्रदर्शन और हंगामा किया। प्रशासन विरोधी नारे लगाए। मुख्य चौराहे पर कई सड़कों को जाम कर दिया। क्षेत्रीय भाजपा विधायक राजकरन कबीर का भी उन्हें समर्थन मिला।
विधायक ने गोरक्षकों को भरोसा दिलाया कि इस जघन्य अपराध के दो्यों पर दो दिन में कार्रवाई करवाएंगे। एफआईआर भी दर्ज होगी। उधर, डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी और अर्थ एवं संख्या अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। गोसेवकों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। कस्बे में गायों की ऐसी दुर्दशा पर सुबह से ही लोगों में नाराजगी देखी गई।
गोसेवकों ने लाउडस्पीकरण पर एनाउंस करके चौराहे पर जाम और प्रदर्शन की घोषणा की। गोसेवक विनोद दीक्षित की अगुवाई में कुछ ही देर में बड़ी संख्या में चौराहे पर हुजूम जमा हो गया। सड़कों को जाम कर दिया गया। कुछ देर बाद विधायक राजकरन उनके बीच पहुंचे और बताया कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिन भर विरोध प्रदर्शन चलता रहा।
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मामला बढ़ने पर दिन के तीसरे पहर मुख्यालय से मुख्य विकास अधिकारी वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और अर्थ एवं संख्याधिकारी संजीव बघेल, एसडीएम सुरजीत सिंह, सीओ नितिन कुमार यहां आए और जाम लगाए लोगों से बातचीत की। सीडीओ ने भरोसा दिलाया कि दो दिन के अंदर वह जांच कर डीएम को रिपोर्ट देंगे और कार्रवाई होगी। इस पर गोरक्षक शांत हुए और जाम खत्म किया। इसी के बाद यह सभी अधिकारी और कुछ गोसेवक उस स्थान के लिए रवाना हो गए, जहां सोमवार को विधायक राजकरन कबीर ने दफन गायों को निकलाया था।
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विधायक ने गोरक्षकों को भरोसा दिलाया कि इस जघन्य अपराध के दो्यों पर दो दिन में कार्रवाई करवाएंगे। एफआईआर भी दर्ज होगी। उधर, डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी और अर्थ एवं संख्या अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। गोसेवकों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। कस्बे में गायों की ऐसी दुर्दशा पर सुबह से ही लोगों में नाराजगी देखी गई।
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गोसेवकों ने लाउडस्पीकरण पर एनाउंस करके चौराहे पर जाम और प्रदर्शन की घोषणा की। गोसेवक विनोद दीक्षित की अगुवाई में कुछ ही देर में बड़ी संख्या में चौराहे पर हुजूम जमा हो गया। सड़कों को जाम कर दिया गया। कुछ देर बाद विधायक राजकरन उनके बीच पहुंचे और बताया कि मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिन भर विरोध प्रदर्शन चलता रहा।
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मामला बढ़ने पर दिन के तीसरे पहर मुख्यालय से मुख्य विकास अधिकारी वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और अर्थ एवं संख्याधिकारी संजीव बघेल, एसडीएम सुरजीत सिंह, सीओ नितिन कुमार यहां आए और जाम लगाए लोगों से बातचीत की। सीडीओ ने भरोसा दिलाया कि दो दिन के अंदर वह जांच कर डीएम को रिपोर्ट देंगे और कार्रवाई होगी। इस पर गोरक्षक शांत हुए और जाम खत्म किया। इसी के बाद यह सभी अधिकारी और कुछ गोसेवक उस स्थान के लिए रवाना हो गए, जहां सोमवार को विधायक राजकरन कबीर ने दफन गायों को निकलाया था।
डीएम ने दो दिन में मांगी रिपोर्ट
अन्ना गायों को जिंदा दफन किए जाने के प्रकरण को डीएम अनुराग पटेल ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को घटना का जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें निर्देश दिया है कि दो दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट दें। डीएम ने जांच आदेश में अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला दिया है।
उधर, नरैनी एसडीएम सुरजीत सिंह और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट में कहा है कि नरैनी स्थित मंडी समिति मोतियारी में नगर पंचायत नरैनी ने अस्थाई गोशाला बना रखी थी। इसमें 91 गोवंश संरक्षित थे। आसपास के गोवंश भी यहां आ गए थे।
इनकी कुल संख्या लगभग 134 थी। इन पशुओं की वजह से धान बेचने आ रहे किसानों को परेशानी हो रही थी। भरण पोषण की भी समस्या थी। इसके मदद्ेनजर मंडी समिति से अन्ना पशुओं को चार अलग-अलग गोशालाओं में पहुंचाया गया है।
इनमें गुढ़ाकलां की अस्थाई गोशाला में 26, मसौनी भरतपुर की अस्थाई गोशाला में 38, नहरी की गोशाला में 25 और रगौली भटपुरा की स्थाई गोशाला में 45 गोवंश भेजे गए हैं। एसडीएम और पशु चिकित्साधिकारी ने कहा है कि इन गोशालाओं के ग्राम प्रधान क्रमश: संतोष कुमार, रामकली, चंद्रकली और रगौली की गोशाला के गोपाल गो सेवा ट्रस्ट ने अपने रजिस्टरों में इन अन्ना पशुओं की इंट्री की है।
अन्ना गायों को जिंदा दफन किए जाने के प्रकरण को डीएम अनुराग पटेल ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को घटना का जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें निर्देश दिया है कि दो दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट दें। डीएम ने जांच आदेश में अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला दिया है।
उधर, नरैनी एसडीएम सुरजीत सिंह और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट में कहा है कि नरैनी स्थित मंडी समिति मोतियारी में नगर पंचायत नरैनी ने अस्थाई गोशाला बना रखी थी। इसमें 91 गोवंश संरक्षित थे। आसपास के गोवंश भी यहां आ गए थे।
इनकी कुल संख्या लगभग 134 थी। इन पशुओं की वजह से धान बेचने आ रहे किसानों को परेशानी हो रही थी। भरण पोषण की भी समस्या थी। इसके मदद्ेनजर मंडी समिति से अन्ना पशुओं को चार अलग-अलग गोशालाओं में पहुंचाया गया है।
इनमें गुढ़ाकलां की अस्थाई गोशाला में 26, मसौनी भरतपुर की अस्थाई गोशाला में 38, नहरी की गोशाला में 25 और रगौली भटपुरा की स्थाई गोशाला में 45 गोवंश भेजे गए हैं। एसडीएम और पशु चिकित्साधिकारी ने कहा है कि इन गोशालाओं के ग्राम प्रधान क्रमश: संतोष कुमार, रामकली, चंद्रकली और रगौली की गोशाला के गोपाल गो सेवा ट्रस्ट ने अपने रजिस्टरों में इन अन्ना पशुओं की इंट्री की है।