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Banda News: पोषाहार में भ्रष्टाचार...बच्चों और महिलाओं की सेहत से खिलवाड़
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बांदा। सरकार ने बच्चों और महिलाओं की सेहत का ध्यान रखने के लिए पोषाहार का वितरण करने का आदेश दिया है, लेकिन जिले में पोषाहार में ही भ्रष्टाचार नहीं हुआ, उन बच्चों और महिलाओं की सेहत से भी खिलवाड़ हुआ, जिन्हें यह वितरित किया जाता है।
डीएम अमित आसेरी के आदेश के बाद भी मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। वहीं, विभाग सब कुछ ठीक कराने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाने में लगा है।
पांच अगस्त को बांदा, बबेरू और नरैनी तहसील में संचालित तीन टीएचआर प्लांटों का एसडीएम और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने निरीक्षण किया था। तीनों प्लांटों पर स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, उपलब्ध नहीं मिली थी, इससे यह भी पता नहीं चला कि कितना टीएचआर बना और कितना बांटा गया।
सदर तहसील के दुरेड़ी स्थित शक्ति प्रेरणा लघु उद्योग में भी पैकेटों में निर्धारित मात्रा से कम पोषाहार मिला। निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक मूंगदाल खिचड़ी के 1.20 किलोग्राम के निर्धारित पैकेट में 850 ग्राम, आटा-बेसन सोया बर्फी में 1.04 किलोग्राम के स्थान पर 850 ग्राम और ऊर्जायुक्त दलिया में 849 ग्राम के स्थान पर 750 ग्राम सामग्री मिली। इसी तरह अन्य उत्पादों के पैकेटों में भी निर्धारित मात्रा से कम वजन पाया गया।
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कहीं आपूर्ति नहीं कहीं श्रमिकों की संख्या में मिला था अंतर
नरैनी के गांव मोतियारी स्थित नीलकंठ प्रेरणा उद्योग में जुलाई में 278 आंगनबाड़ी केंद्रों की मांग के सापेक्ष केवल 50 केंद्रों को पूरक पोषाहार की आपूर्ति मिली। बाकी केंद्रों की आपूर्ति के संबंध में मौके पर मौजूद ब्लॉक मिशन मैनेजर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
बबेरू तहसील के मुरवल स्थित लक्ष्मी प्रेरणा लघु उद्योग में स्टॉक के मिलान में भी मात्रा का अंतर मिला। रजिस्टर में दर्ज सामग्री के मुकाबले मौके पर स्टॉक कम पाया गया। उपस्थिति पंजिका में दर्ज श्रमिकों की संख्या और मौके पर मौजूद श्रमिकों में भी अंतर मिला। वहां केवल छह श्रमिक उपस्थित मिले। पैकेटों की जांच में निर्धारित मात्रा से कम सामग्री मिली।
तीनों प्लांटों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला, फोर्टिफिकेशन (खाद्य पौष्टिकीकरण) व पोषण मानकों के अनुरूप उत्पादन तथा श्रमिकों के लिए एप्रन, दस्ताने, कैप और मास्क जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का भी अभाव मिला।
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डीएम ने दिए थे दोषियों पर कार्रवाई के आदेश
निरीक्षण के आधार पर डीसी एनआरएलएम को निर्देश दिया गया था कि वह संबंधित ब्लॉक मिशन प्रबंधकों और संचालन एजेंसियों पर कार्रवाई करें, लेकिन कार्रवाई के बजाय केवल नोटिस और जवाब लेकर ही मामले को फाइलों में दबा दिया गया।
डीएम का आदेश भी फाइलों में ही दफन हो गया। प्रतिमाह करोड़ों रुपये का टीएचआर तैयार और वितरित होने वाले इस काम में स्टॉक व मात्रा में अंतर मिलने के बाद वित्तीय नुकसान की आशंका भी बनी हुई है। इसके बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
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बच्चों और महिलाओं के लिए तैयार होता है टीएचआर
टेक होम राशन (टीएचआर) आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को वितरित किया जाने वाला पौष्टिक सूखा आहार है। इसमें कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और अन्य जरूरी विटामिन-खनिजों से भरपूर सामग्री तैयार की जाती है। सत्तू और मिक्स आटा, हलवा मिक्स समेत विभिन्न पोषक खाद्य उत्पाद इसके प्रमुख हिस्से हैं। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को घर पर ही नियमित पोषण उपलब्ध कराना है।
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डीसी एनआरएलएम नहीं दे पाए जवाब
मामले में जब डीसी एनआरएलएम दिवाकर सिंह से बात की गई तो वह कार्रवाई के संबंध में सीधा जवाब नहीं दे सके। वह लगातार कमियों को दुरुस्त कराने की बात कहते रहे, लेकिन जो गड़बड़ी और अनियमितता हुई, उसके लिए होने वाली कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने सीडीओ कार्यालय फाइल भेजने की बात कही। विकास भवन में दोनों अधिकारियों के कार्यालय होने के बाद भी कब तक यह फाइल चलती रहेगी, इसका किसी के पास जवाब नहीं हे।
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डीएम अमित आसेरी के आदेश के बाद भी मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। वहीं, विभाग सब कुछ ठीक कराने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाने में लगा है।
पांच अगस्त को बांदा, बबेरू और नरैनी तहसील में संचालित तीन टीएचआर प्लांटों का एसडीएम और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने निरीक्षण किया था। तीनों प्लांटों पर स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, उपलब्ध नहीं मिली थी, इससे यह भी पता नहीं चला कि कितना टीएचआर बना और कितना बांटा गया।
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सदर तहसील के दुरेड़ी स्थित शक्ति प्रेरणा लघु उद्योग में भी पैकेटों में निर्धारित मात्रा से कम पोषाहार मिला। निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक मूंगदाल खिचड़ी के 1.20 किलोग्राम के निर्धारित पैकेट में 850 ग्राम, आटा-बेसन सोया बर्फी में 1.04 किलोग्राम के स्थान पर 850 ग्राम और ऊर्जायुक्त दलिया में 849 ग्राम के स्थान पर 750 ग्राम सामग्री मिली। इसी तरह अन्य उत्पादों के पैकेटों में भी निर्धारित मात्रा से कम वजन पाया गया।
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कहीं आपूर्ति नहीं कहीं श्रमिकों की संख्या में मिला था अंतर
नरैनी के गांव मोतियारी स्थित नीलकंठ प्रेरणा उद्योग में जुलाई में 278 आंगनबाड़ी केंद्रों की मांग के सापेक्ष केवल 50 केंद्रों को पूरक पोषाहार की आपूर्ति मिली। बाकी केंद्रों की आपूर्ति के संबंध में मौके पर मौजूद ब्लॉक मिशन मैनेजर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
बबेरू तहसील के मुरवल स्थित लक्ष्मी प्रेरणा लघु उद्योग में स्टॉक के मिलान में भी मात्रा का अंतर मिला। रजिस्टर में दर्ज सामग्री के मुकाबले मौके पर स्टॉक कम पाया गया। उपस्थिति पंजिका में दर्ज श्रमिकों की संख्या और मौके पर मौजूद श्रमिकों में भी अंतर मिला। वहां केवल छह श्रमिक उपस्थित मिले। पैकेटों की जांच में निर्धारित मात्रा से कम सामग्री मिली।
तीनों प्लांटों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला, फोर्टिफिकेशन (खाद्य पौष्टिकीकरण) व पोषण मानकों के अनुरूप उत्पादन तथा श्रमिकों के लिए एप्रन, दस्ताने, कैप और मास्क जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का भी अभाव मिला।
डीएम ने दिए थे दोषियों पर कार्रवाई के आदेश
निरीक्षण के आधार पर डीसी एनआरएलएम को निर्देश दिया गया था कि वह संबंधित ब्लॉक मिशन प्रबंधकों और संचालन एजेंसियों पर कार्रवाई करें, लेकिन कार्रवाई के बजाय केवल नोटिस और जवाब लेकर ही मामले को फाइलों में दबा दिया गया।
डीएम का आदेश भी फाइलों में ही दफन हो गया। प्रतिमाह करोड़ों रुपये का टीएचआर तैयार और वितरित होने वाले इस काम में स्टॉक व मात्रा में अंतर मिलने के बाद वित्तीय नुकसान की आशंका भी बनी हुई है। इसके बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
बच्चों और महिलाओं के लिए तैयार होता है टीएचआर
टेक होम राशन (टीएचआर) आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को वितरित किया जाने वाला पौष्टिक सूखा आहार है। इसमें कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और अन्य जरूरी विटामिन-खनिजों से भरपूर सामग्री तैयार की जाती है। सत्तू और मिक्स आटा, हलवा मिक्स समेत विभिन्न पोषक खाद्य उत्पाद इसके प्रमुख हिस्से हैं। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को घर पर ही नियमित पोषण उपलब्ध कराना है।
डीसी एनआरएलएम नहीं दे पाए जवाब
मामले में जब डीसी एनआरएलएम दिवाकर सिंह से बात की गई तो वह कार्रवाई के संबंध में सीधा जवाब नहीं दे सके। वह लगातार कमियों को दुरुस्त कराने की बात कहते रहे, लेकिन जो गड़बड़ी और अनियमितता हुई, उसके लिए होने वाली कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने सीडीओ कार्यालय फाइल भेजने की बात कही। विकास भवन में दोनों अधिकारियों के कार्यालय होने के बाद भी कब तक यह फाइल चलती रहेगी, इसका किसी के पास जवाब नहीं हे।