फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   UP: After 12 years out of Pakistan's jail, the son reached Banda, cried after seeing his parents

यूपी: पाकिस्तान की जेल से 12 सालों बाद निकला बेटा पहुंचा बांदा, मां-बाप को देख फफक कर रोया

Thu, 09 Sep 2021 04:38 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 09 Sep 2021 04:38 PM IST
सार

पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ रामबहादुर 12 वर्षों बाद आज दोहपर अपने पैतृक गांव पचोखर पहुंचा। इतने सालों बाद रामबहादुर को देखकर परिजनों के साथ पूरे गांव की आंखें नम हो गई। लोगों ने फूल माला पहनाकर उसका स्वागत किया। इतने सालों बाद घर लौटने की खुशी रामबहादुर के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी।

विज्ञापन
UP: After 12 years out of Pakistan's jail, the son reached Banda, cried after seeing his parents
बांदा: 12 सालों बाद घर लौटने की खुशी (सफेद कुर्ते में रामबहादुर) - फोटो : amar ujala

विस्तार

पाकिस्तान की लाहौर जेल से 12 साल बाद रिहा होकर बृहस्पतिवार को गांव पहुंचा रामबहादुर अपनों को नहीं पहचान सका, लेकिन धूमिल यादों से पहचानने की कोशिश करता रहा। मां कुसुमा और पिता गिल्ला ने गले लगाकर जब बेटा कहा तो भावुक हो गया।
विज्ञापन


मां-पिता और पुत्र के मिलन को देखकर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। बाद में पिता ने उसे सबसे परिचित कराया। पचोखर गांव निवासी रामबहादुर 15 साल की उम्र में लापता हो गया था। लगभग 12 साल लाहौर जेल में कैद रहा। करीब एक सप्ताह पूर्व उसे लाहौर जेल से रिहा कर भारत भेज दिया गया।
विज्ञापन


 

अमृतसर प्रशासन ने उसे कब्जे में ले लिया और अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया। रामबहादुर की पूरी जानकारी जुटाई। सत्यापन के बाद अमृतसर प्रशासन ने घर जाने की अनुमति दी। रामबहादुर को लेने के लिए बबेरू नायब तहसीलदार अभिनव तिवारी और अतर्रा थाने के दरोगा सुधीर चौरसिया अमृतसर गए और ट्रेन से कानपुर आए और फिर बोलेरो से गांव पहुंचे। 

पिता के बयान लेने के बाद प्रशासन ने रामबहादुर को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। वह कुर्ता-पायजामा में खाली हाथ आया था, लेकिन सालों बाद घर पहुंचा रामबहादुर माता-पिता व अन्य किसी भी परिजन को नहीं पहचान सका। सभी को एकटक देखता रहा।

छोटे भाई मैकू ने उसके पैर छुए। पिता ने गले लगाया और मां कुसुमा ने तिलक लगा मिठाई खिलाई। तब रामबहादुर ने पिता, मां और अन्य बड़े-बुजुर्गों के पैर छुए। रामबहादुर को देखने बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उसके घर में जुटे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed