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दो की दोबारा इंट्री, दो नए नवेले

Fri, 11 Mar 2022 12:17 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:17 AM IST
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Two re-entry, two newcomers
प्रकाश द्विवेदी। - फोटो : BANDA
बांदा सदर सीट: कई दिग्गज दावेदारों को दरकिनार कर दोबारा टिकट हथियाने के बाद चुनाव भी फतह कर लेना भाजपा प्रत्याशी प्रकाश द्विवेदी की सियासी रणनीति की महारत माना जा सकता है। साथ ही भाजपा की लहर का भी श्रेय रहा। उधर, सपा प्रत्याशी मंजुला सिंह को पति विवेक सिंह की लोकप्रियता की सहानुभूति और सपाइयों की कोशिश का नतीजा रहा कि मंजुला को अपने पति स्व. विवेक सिंह से दोगुना से ज्यादा वोट पा सकीं। वर्ष 2017 के चुनाव में विवेक सिंह को 32,223 वोट मिले थे। मंजुला ने 66,343 वोट पाए। लेकिन भाजपा भारी पड़ी।
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बसपा प्रत्याशी धीरज राजपूत चुनावी राजनीति में माहिर और तजुर्बेकार होने के बाद भी वह गुल नहीं खिला सके। वह पार्टी का पिछला वोट का आंकड़ा भी नहीं जुटा पाए। पिछले 2017 के चुनाव में बसपा के मधुसूदन कुशवाहा दूसरे नंबर पर थे। उन्हें 50,341 वोट मिले थे। धीरज मात्र 38,254 वोट पर ठहर गए। कांग्रेस का हश्र वही हुआ जो लगभग पूरे प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड में रहा। इसके प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण मात्र 1894 वोटों पर निपट गए।
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जातिगत समीकरण में सपा को दिलाई जीत
बबेरू सीट: सपा के दिग्गज नेता विशंभर सिंह यादव तीसरी बार विधायक बने हैं। वह अबकी जिले के इकलौते सपा विधायक चुने गए हैं। वर्ष 2007 और 2012 में भी सपा से यहां से विधायक रहे। क्षेत्र में पकड़ और जातिगत समीकरण उनकी तीसरी जीत के लिए मुफीद साबित हुई। भाजपा के अजय पटेल यहां भाजपा की सीट को वापस पाने में नाकाम रहे। उधर, बसपा के रामसेवक शुक्ला भी जातिगत आंकड़ों के दांव में मात खा गए। बबेरू में पिछड़ी या अनुसूचित जाति का विधायक चुने जाने की परंपरा बरकरार रही।
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विधायकी और साइकिल की सवारी भी नहीं जिता पाई
तिंदवारी सीट: भाजपा से पिछला चुनाव लड़कर विधायक बने बृजेश प्रजापति का अबकी सपा की साइकिल पर चुनावी सफर पूरा नहीं हो पाया। वह पिछली बार मिले वोटों को भी बरकरार नहीं रख पाए। चुनावी राजनीति नए नवेले भाजपा नेता रामकेश निषाद ने बाजी मार ली। यहां भी जातिगत वोटों के धु्रवीकरण का ही खेल रहा। श्री निषाद भाजपा जिलाध्यक्ष थे। उनके स्वभाव और व्यवहार से सभी भाजपाई उनके मुरीद थे। यह चुनाव में काम आया। इकलौते ठाकुर प्रत्याशी बसपा के जयराम सिंह यहां पिछले चुनाव में बसपा को मिले वोट के बराबर भी आंकड़ा नहीं छू पाए। 2017 के चुनाव में यहां बसपा दूसरे नंबर पर थी। प्रत्याशी जगदीश प्रजापति को 44,790 वोट मिले थे। जयराम सिर्फ 39,450 वोटों में जाम हो गए।

भाजपा के टिकट पर पहुंचीं नगर पंचायत से विधानसभा
नरैनी सीट: जनपद की इकलौती सुरक्षित सीट में नगर पंचायत अध्यक्ष से ओममणि वर्मा विधायक पद पर छलांग में सफल रहीं। भाजपा के टिकट उनका यह सफर पूरा कर दिया। सपा की किरन वर्मा ने बाहरी क्षेत्र का बाशिंदा होते हुए भी कड़ी टक्कर दी। उधर, प्रदेश में काबीना मंत्री, विधान सभा में नेता विरोधी दल और बबेरू सीट से तीन बार विधायक रहे बसपा नेता जीसी दिनकर की हालत जहां की तहां रही। वह पिछले चुनाव में भी तीसरे नंबर पर थे। अबकी भी यहीं रहे। पिछले वोट भी बरकरार नहीं रह पाए। उनमें भी लगभग 8 हजार की कमी आ गई।

रामकेश निषाद।

रामकेश निषाद।- फोटो : BANDA

ओममणि वर्मा।

ओममणि वर्मा।- फोटो : BANDA

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